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डॉ जीतराम भट्ट

डॉ जीतराम भट्ट
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नागरिकता: भारतीय

भाषाएँ : संस्कृत,हिन्दी,गढवाली

जन्म तिथि: 1962|225px]]

जीवन परिचय[संपादित करें]

डॉ.भट्ट ने वेद, ज्योतिष व कर्मकाण्ड का परम्परिक पद्धति से अध्ययन किया तथा अनेक वर्षों तक ऋषिकेश में ‘ध्यान‘ कुण्डलिनी -जागरण व शक्तिपात विषयों पर अनुसनधान किया। दो वर्षों तक संस्कृत गुरूकुल में पढाने के पश्चात् आपने 14 वर्षों तक दिल्ली में स्ंस्कृत प्रवक्ता के रूप् में अध्यापन कार्य किया तथा संस्कृत के प्रसार के लिए भारत संस्कृत परिषद् की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान दिया। विगत वर्षां से आप दिल्ली संस्कृत अकादमी तथा हिन्दी अकादमी में सचिव के दायित्व का निर्वाह कर रहें है तथा डॉ0 गि0 ला0शा0 प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान में निदेशक के पद पर कार्य कर रहे है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में आपके डेढ़ सौ से अधिक शोध लेख प्रकाशित हो चुके हैं। अनेक राष्ट्रीय अनताराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलनों में आपके शोध निबन्ध प्रस्तुत हो चुके हैं।

प्रारंभिक जीवन [संपादित करें]

आपका जन्म भट्टवाडी , उत्तराखण्ड में हुआ आपके पिता का नाम स्व. डॉ0 ईश्वरदत्त भट्ट और माता का नाम स्व. कस्तूरी देवी भट्ट है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा गाँव की पाठशाला में ही सम्पन्न हुई। आपने काशी से आचार्य(व्याकरण),हिमाचल से एम.ए (लोकप्रकाशन), दिल्ली से बी.एड् और श्रीनगर तथा आरोग्यधाम, गोरखपुर से प्राकृतिक चिकित्सा में प्रशिक्षण भी प्राप्त किये।

मान्यता [संपादित करें]

डॉ जीतराम भट्ट संस्कृत के जाने माने कवि हैं जिन्होंने संस्कृत को बढ़ावा देना के लिए हर माध्यम से भरसक प्रयास करते हुए एक ऐसे अधिनायक की भूमिका निभाई है जो कि संस्कृत को श्लोक एवं पूजा पाठ की भाषा से हटकर सामान्य व्यवहार की भाषा बनाया है। संस्कृत और हिन्दी के बीच की दूरी हो या सामान्य जनता में संस्कृत की चेतना को जगाना हो डॉ भट्ट ने अपना जीवन संस्कृत को समर्पित कर दिया है।[1]आपने डी.डी.न्यूज के माध्यम से वार्तावली कार्यक्रम में संस्कृत भाषा का प्रचार प्रसार किया जिसके माध्यम से जन सामान्य को संस्कृत की शिक्षा मिल रही है।


पुरूस्कार एवं सम्मान [संपादित करें]

’’विद्वत्त सम्मान’’ अखिल भारतीय विद्वत्त परिषद्, बनारस, उत्तर प्रदेश ’’लोकमान्य तिलक गौरव’’ वृतपत्र लेखक संघ, महाराष्ट्र ’’प्रशस्तिपत्र’’, गाँधी समृति एवं दर्शन समिति, भारत सरकार ’’नवोदित संस्कृत कवि पुरूस्कार’’ दिल्ली संस्कृत अकादमी, दिल्ली सरकार ’’संस्कृत सेवा सम्मान’’ संस्कृत अकादमी, हरियाणा सरकार

कृतियां[संपादित करें]

"अनुभूतिशतकम्"2007 ISBN- 9788190438308

[2]"वैचित्रयम"2007 ISBN- 9789380277035

"भक्तिवल्लरि"2007 ISBN-9789380277028

[3]"शतपथ ब्राह्मण " Editor 2009 ISBN-9788178541693

"श्री मधुमाशंकर काव्यम" 2009 ISBN-9789380277011

"संस्कृत स्वाध्यायम्" 2016

"श्री शनि-समाराधना" ISBN-978-81-904383-8-4

[4]"संस्कृत शिक्षणम् काव्यम~" ISBN-978-81-930681-3-7

"ईश्वर आराधना" ISBN-978-80277-20-2

स्त्रोत रचना उदाहरण[संपादित करें]

देव स्तुति एवं भक्ति में प्राचीन काल से चलती आ रही पद्धति को पुनः उजागर करते हुए की गयी द्वादश ज्योतिर्लिंग की स्तुति अपने आप में साहित्य में नई खोज है इस स्त्रोत में स्मस्त द्वादश ज्योतिर्लिंगो की आराधना है। आराधना में जिस प्रकार ज्योतिर्लिंग का नाम है उसी प्रकार उससे नाम के प्रथम वर्ण से समस्त छंद लिखे गये हैं।


श्री सोमनाथ स्तुतिः

[5] सोमप्रियाय प्रभवे स्थिराय

सौम्याय साम्बाय च शंकराय।

सर्वात्मने सर्वकराय तस्मै

श्री सोमनाथाय नमः शिवाय।।

हिन्दी अनुवाद

(चन्द्रमा के प्रिय, सामर्थ्यवान्,सर्वदा तपस्या में स्थिर रहने वाले,सौम्य स्वभाव वाले अम्बा अर्थात दुर्गा सहित विराजमान रहने वाले,मंगलकारक, सभी आत्माओं में निवास करने वाले, सभी को बनाने वाले, शिवस्वरूप श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग को मेरा नमस्कार है।)


ज्योतिष से सम्बन्धित श्लोक और अर्थ[संपादित करें]

[6]शयस्य देवो विधातास्ति गोत्रं कश्यपनामकम् ।

यशछायासूर्ययोः सूनुः स शनिर्वरदो भवेत् ।।

हिन्दी अनुवाद

जिनके देवता ब्रह्मा जी है,जिनका कश्यपनामक गोत्र है,जो छाया और सूर्य के पुत्र हैं, वे शनिदेव मेरे लिए वरदान देने वाले हों।


गढ़वाली उपन्यास का अंश[संपादित करें]

सबेर माँ जीतू स्ययूँ छ। शोभनी का स्वारा (कठैतों का गौं) माँ जीतू तैं द्वी दिन ह्वेग्याँ। शोभनी की नणद वरुणा माटु-माटु ऑन्दी अर चुपचाप जीतू का झ्वल्लै उन्दे बाँसुलि़ निकाल़दी। शोभनी देखि द्योन्दी पर कुछ नी ब्वॉलदी।वरुणा गौरु दगडी़ बऽण चली जान्दी। अगनै गौरु अर पिछनै वरुणा। थ्वऽड़ देर माँ जीतू उठद। स्वो अपणा झ्वल़्ला़ तैं द्योखद अर अपुणी बाँसुलि़ तैं ख्वज्योन्द। जीतू अपुणी बैण शोभनी तैं पूछद।


हिन्दी अनुवाद

प्रातःकाल जीतू सोया हुआ है। शोभनी के ससुराल में जीतू को दो दिन हो गये। शोभनी की ननद वरुणा धीरे-धीरे आती है और चुपचाप जीतू की थैले से बाँसुरी निकालती है । शोभनी देखती है, किन्तु कुछ नहीं बोलती है। वरुणा गायों के साथ जंगल चली जाती है। आगे गायें और पीछे से वरुणा कुछ देर में जीतू जागता है। वह अपने थैले को देखता है और अपनी बाँसुरी को खोजता है। जीतू अपनी बहन शाभनी को पूछता है।



सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "vartavali". sanskrit magazine.
  2. jeetram, bhatt (2009). vaichitriyam (1 संस्करण). new delhi: prakarsh. पृ॰ 45. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-93-80277-03-5.
  3. shatpath brahman (1 संस्करण). new delhi. 2009. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-7854-169-3.
  4. jeetram, bhatt (2017). sanskrit shikshanam kavyam. new delhi: Dr G.G.L.P.V.P. पृ॰ 121. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-930681-3-7.
  5. jeetram, bhatt (2011). dwadash jyotirling strotam (1 संस्करण). new delhi: prakarsh. पृ॰ 1. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-93-80277-10-3. |pages= और |page= के एक से अधिक मान दिए गए हैं (मदद)
  6. jeetram, bhatt (2009). shree shani samaradhna (1 संस्करण). new delhi: prakarsh. पृ॰ 45. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-904383-8-4. |pages= और |page= के एक से अधिक मान दिए गए हैं (मदद)

"अनुभूतिशतकम्"2007 ISBN- 9788190438308

"भक्तिवल्लरि"2007 ISBN-9789380277028

"श्री मधुमाशंकर काव्यम" 2009 ISBN-9789380277011

"ईश्वर आराधना" ISBN-978-80277-20-2

http://ddinews.gov.in/shows/vaartavali

https://www.youtube.com/watch?v=E7Hn2-M0G3Y&t=4s

https://www.hindustantimes.com/delhi-news/delhi-government-to-open-75-sanskrit-learning-centres/story-9hgB9r7uopYquETL0WKFyL.html

https://nenow.in/north-east-news/sanskrit-singer-ranjan.html

https://navbharattimes.indiatimes.com/metro/delhi/other-news/akhil-bharatiya-sanskrit-sammelan-commenced/articleshow/63456841.cms