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[[File:Wikipedia-logo-v2-hi.svgऋथथदंथययथथथततभमतमछमजण प्राणायामप्राणायाम का योग में बहुत महत्व है। आदि शंकराचार्य श्वेताश्वतर उपनिषद पर अपने भाष्य में कहते हैं, "प्राणायाम के द्वारा जिस मन का मैल धुल गया है वही मन ब्रह्म में स्थिर होता है। इसलिए शास्त्रों में प्राणायाम के विषय में उल्लेख है।"[1] स्वामी विवेकानंद इस विषय में अपना मत व्यक्त करते हैं, "इस प्राणायाम में सिद्ध होने पर हमारे लिए मानो अनंत शक्ति का द्वार खुल जाता है। मान लो, किसी व्यक्ति की समझ में यह प्राण का विषय पूरी तरह आ गया और वह उस पर विजय प्राप्त करने में भी कृतकार्य हो गया , तो फिर संसार में ऐसी कौन-सी शक्ति है, जो उसके अधिकार में न आए? उसकी आज्ञा से चन्द्र-सूर्य अपनी जगह से हिलने लगते हैं, क्षुद्रतम परमाणु से वृहत्तम सूर्य तक सभी उसके वशीभूत हो जाते हैं, क्योंकि उसने प्राण को जीत लिया है। प्रकृति को वशीभूत करने की शक्ति प्राप्त करना ही प्राणायाम की साधना का लक्ष्य है।"[2]का महत्वका महत्वका महत्वप्राणायाम का योग में बहुत महत्व है। आदि शंकराचार्य श्वेताश्वतर उपनिषद पर अपने भाष्य में कहते हैं, "प्राणायाम के द्वारा जिस मन का मैल धुल गया है वही मन ब्रह्म में स्थिर होता है। इसलिए शास्त्रों में प्राणायाम के विषय में उल्लेख है।"[1] स्वामी विवेकानंद इस विषय में अपना मत व्यक्त करते हैं, "इस प्राणायाम में सिद्ध होने पर हमारे लिए मानो अनंत शक्ति का द्वार खुल जाता है। मान लो, किसी व्यक्ति की समझ में यह प्राण का विषय पूरी तरह आ गया और वह उस पर विजय प्राप्त करने में भी कृतकार्य हो गया , तो फिर संसार में ऐसी कौन-सी शक्ति है, जो उसके अधिकार में न आए? उसकी आज्ञा से चन्द्र-सूर्य अपनी जगह से हिलने लगते हैं, क्षुद्रतम परमाणु से वृहत्तम सूर्य तक सभी उसके वशीभूत हो जाते हैं, क्योंकि उसने प्राण को जीत लिया है। प्रकृति को वशीभूत करने की शक्ति प्राप्त करना ही प्राणायाम की साधना का लक्ष्य है।"[2]सावधानियाँ संपादित करें

सबसे पहले तीन बातों की आवश्यकता है, विश्वास,सत्यभावना, दृढ़ता। प्राणायाम करने से पहले हमारा शरीर अन्दर से और बाहर से शुद्ध होना चाहिए। बैठने के लिए नीचे अर्थात भूमि पर आसन बिछाना चाहिए। बैठते समय हमारी रीढ़ की हड्डियाँ एक पंक्ति में अर्थात सीधी होनी चाहिए। सुखासन, सिद्धासन, पद्मासन, वज्रासन किसी भी आसन में बैठें, मगर जिसमें आप अधिक देर बैठ सकते हैं, उसी आसन में बैठें। प्राणायाम करते समय हमारे हाथों को ज्ञान या किसी अन्य मुद्रा में होनी चाहिए। प्राणायाम करते समय हमारे शरीर में कहीं भी किसी प्रकार का तनाव नहीं होना चाहिए, यदि तनाव में प्राणायाम करेंगे तो उसका लाभ नहीं मिलेगा। प्राणायाम करते समय अपनी शक्ति का अतिक्रमण ना करें। हर साँस का आना जाना बिलकुल आराम से होना चाहिए। जिन लोगो को उच्च रक्त-चाप की शिकायत है, उन्हें अपना रक्त-चाप साधारण होने के बाद धीमी गति से प्राणायाम करना चाहिये। यदि आँप्रेशन हुआ हो तो, छः महीने बाद ही प्राणायाम का धीरे धीरे अभ्यास करें। हर साँस के आने जाने के साथ मन ही मन में ओम् का जाप ओम् का जाप का उपचारण करने से हमारे पूरे शरीर मे (सिर से ले कर पैर के अंगूठे तक ) एक वाइब्रेशन होती है जो हमारे अंदर की नगेस्टिव एनर्जी को बाहर निकल के मन और आत्मा को शुद्ध करती है।सावधानियाँ संपादित करें सबसे पहले तीन बातों की आवश्यकता है, विश्वास,सत्यभावना, दृढ़ता। प्राणायाम करने से पहले हमारा शरीर अन्दर से और बाहर से शुद्ध होना चाहिए। बैठने के लिए नीचे अर्थात भूमि पर आसन बिछाना चाहिए। बैठते समय हमारी रीढ़ की हड्डियाँ एक पंक्ति में अर्थात सीधी होनी चाहिए। सुखासन, सिद्धासन, पद्मासन, वज्रासन किसी भी आसन में बैठें, मगर जिसमें आप अधिक देर बैठ सकते हैं, उसी आसन में बैठें। प्राणायाम करते समय हमारे हाथों को ज्ञान या किसी अन्य मुद्रा में होनी चाहिए। प्राणायाम करते समय हमारे शरीर में कहीं भी किसी प्रकार का तनाव नहीं होना चाहिए, यदि तनाव में प्राणायाम करेंगे तो उसका लाभ नहीं मिलेगा। प्राणायाम करते समय अपनी शक्ति का अतिक्रमण ना करें। हर साँस का आना जाना बिलकुल आराम से होना चाहिए। जिन लोगो को उच्च रक्त-चाप की शिकायत है, उन्हें अपना रक्त-चाप साधारण होने के बाद धीमी गति से प्राणायाम करना चाहिये। यदि आँप्रेशन हुआ हो तो, छः महीने बाद ही प्राणायाम का धीरे धीरे अभ्यास करें। हर साँस के आने जाने के साथ मन ही मन में ओम् का जाप ओम् का जाप का उपचारण करने से हमारे पूरे शरीर मे (सिर से ले कर पैर के अंगूठे तक ) एक वाइब्रेशन होती है जो हमारे अंदर की नगेस्टिव एनर्जी को बाहर निकल के मन और आत्मा को शुद्ध करती है।सबसे पहले तीन बातों की आवश्यकता है, विश्वास,सत्यभावना, दृढ़ता। प्राणायाम करने से पहले हमारा शरीर अन्दर से और बाहर से शुद्ध होना चाहिए। बैठने के लिए नीचे अर्थात भूमि पर आसन बिछाना चाहिए। बैठते समय हमारी रीढ़ की हड्डियाँ एक पंक्ति में अर्थात सीधी होनी चाहिए। सुखासन, सिद्धासन, पद्मासन, वज्रासन किसी भी आसन में बैठें, मगर जिसमें आप अधिक देर बैठ सकते हैं, उसी आसन में बैठें। प्राणायाम करते समय हमारे हाथों को ज्ञान या किसी अन्य मुद्रा में होनी चाहिए। प्राणायाम करते समय हमारे शरीर में कहीं भी किसी प्रकार का तनाव नहीं होना चाहिए, यदि तनाव में प्राणायाम करेंगे तो उसका लाभ नहीं मिलेगा। प्राणायाम करते समय अपनी शक्ति का अतिक्रमण ना करें। हर साँस का आना जाना बिलकुल आराम से होना चाहिए। जिन लोगो को उच्च रक्त-चाप की शिकायत है, उन्हें अपना रक्त-चाप साधारण होने के बाद धीमी गति से प्राणायाम करना चाहिये। यदि आँप्रेशन हुआ हो तो, छः महीने बाद ही प्राणायाम का धीरे धीरे अभ्यास करें। हर साँस के आने जाने के साथ मन ही मन में ओम् का जाप ओम् का जाप का उपचारण करने से हमारे पूरे शरीर मे (सिर से ले कर पैर के अंगूठे तक ) एक वाइब्रेशन होती है जो हमारे अंदर की नगेस्टिव एनर्जी को बाहर निकल के मन और आत्मा को शुद्ध करती है।सावधानियाँ संपादित करें सबसे पहले तीन बातों की आवश्यकता है, विश्वास,सत्यभावना, दृढ़ता। प्राणायाम करने से पहले हमारा शरीर अन्दर से और बाहर से शुद्ध होना चाहिए। बैठने के लिए नीचे अर्थात भूमि पर आसन बिछाना चाहिए। बैठते समय हमारी रीढ़ की हड्डियाँ एक पंक्ति में अर्थात सीधी होनी चाहिए। सुखासन, सिद्धासन, पद्मासन, वज्रासन किसी भी आसन में बैठें, मगर जिसमें आप अधिक देर बैठ सकते हैं, उसी आसन में बैठें। प्राणायाम करते समय हमारे हाथों को ज्ञान या किसी अन्य मुद्रा में होनी चाहिए। प्राणायाम करते समय हमारे शरीर में कहीं भी किसी प्रकार का तनाव नहीं होना चाहिए, यदि तनाव में प्राणायाम करेंगे तो उसका लाभ नहीं मिलेगा। प्राणायाम करते समय अपनी शक्ति का अतिक्रमण ना करें। हर साँस का आना जाना बिलकुल आराम से होना चाहिए। जिन लोगो को उच्च रक्त-चाप की शिकायत है, उन्हें अपना रक्त-चाप साधारण होने के बाद धीमी गति से प्राणायाम करना चाहिये। यदि आँप्रेशन हुआ हो तो, छः महीने बाद ही प्राणायाम का धीरे धीरे अभ्यास करें। हर साँस के आने जाने के साथ मन ही मन में ओम् का जाप ओम् का जाप का उपचारण करने से हमारे पूरे शरीर मे (सिर से ले कर पैर के अंगूठे तक ) एक वाइब्रेशन होती है जो हमारे अंदर की नगेस्टिव एनर्जी को बाहर निकल के मन और आत्मा को शुद्ध करती है।𝓖𝓸𝓸𝓭 𝓶𝓸𝓻𝓷𝓲𝓷𝓰+91 90817 22601+91 90817 22601सबसे पहले तीन बातों की आवश्यकता है, विश्वास,सत्यभावना, दृढ़ता। प्राणायाम करने से पहले हमारा शरीर अन्दर से और बाहर से शुद्ध होना चाहिए। बैठने के लिए नीचे अर्थात भूमि पर आसन बिछाना चाहिए। बैठते समय हमारी रीढ़ की हड्डियाँ एक पंक्ति में अर्थात सीधी होनी चाहिए। सुखासन, सिद्धासन, पद्मासन, वज्रासन किसी भी आसन में बैठें, मगर जिसमें आप अधिक देर बैठ सकते हैं, उसी आसन में बैठें। प्राणायाम करते समय हमारे हाथों को ज्ञान या किसी अन्य मुद्रा में होनी चाहिए। प्राणायाम करते समय हमारे शरीर में कहीं भी किसी प्रकार का तनाव नहीं होना चाहिए, यदि तनाव में प्राणायाम करेंगे तो उसका लाभ नहीं मिलेगा। प्राणायाम करते समय अपनी शक्ति का अतिक्रमण ना करें। हर साँस का आना जाना बिलकुल आराम से होना चाहिए। जिन लोगो को उच्च रक्त-चाप की शिकायत है, उन्हें अपना रक्त-चाप साधारण होने के बाद धीमी गति से प्राणायाम करना चाहिये। यदि आँप्रेशन हुआ हो तो, छः महीने बाद ही प्राणायाम का धीरे धीरे अभ्यास करें। हर साँस के आने जाने के साथ मन ही मन में ओम् का जाप

ओम् का जाप का उपचारण करने से हमारे पूरे शरीर मे (सिर से ले कर पैर के अंगूठे तक ) एक वाइब्रेशन होती है जो हमारे अंदर की नगेस्टिव एनर्जी को बाहर निकल के मन और आत्मा को शुद्ध करती है।|175px]]
HindiWikipediaMainpageScreenshot1October2012.png
प्रकार
ज्ञानकोश
उपलब्ध भाषाहिन्दी
मालिकविकिमीडिया संस्थान
नाराएक मुक्त ज्ञानकोश
जालस्थलhi.wikipedia.org
व्यावसायिकनहीं
पंजीकरणवैकल्पिक
शुरू11 जुलाई 2003
वर्तमान स्थितिसक्रिय

हिन्दी विकिपीडिया, विकिपीडिया का हिन्दी भाषा का संस्करण है, जिसका स्वामित्व विकिमीडिया संस्थापन के पास है। हिन्दी संस्करण जुलाई २००३ में आरम्भ किया गया था और १ दिसम्बर २०१६ तक इस पर 1,42,056 लेख और लगभग 5,88,243 पंजीकृत सदस्य हैं।[1] [2] ३० अगस्त २०११ के दिन यह एक लाख लेखों का आँकड़ा पार करने वाला प्रथम भारतीय भाषा विकिपीडिया बना। यह लेखों की संख्या, सक्रिय सदस्यों, प्रयोक्ताओं की संख्या, सम्पादनों इत्यादि के आधार पर भारतीय भाषाओं में उपलब्ध विकिपीडिया का सबसे बड़ा संस्करण है और सभी संस्करणों में पचपनवाँ। और इसे मुख्यतः हिन्दी भाषी लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिया बनाया गया था। चूँकि हिन्दी विकिपीडिया इण्डिक स्क्रिप्ट (देवनागरी) का प्रयोग करता है इसलिए इसमें जटिल पाठ प्रतिपादन सहायक की आवश्यकता पड़ती है। विकिपीडिया पर ध्वन्यात्मक रोमन वर्णमाला परिवर्तक उपलब्ध है, इसलिए बिना किसी विशेष हिन्दी टाइपिंग सॉफ्टवेर डाउनलोड किये रोमन कुंजीपटल का उपयोग देवनागरी में टंकण करने के लिए किया जा सकता है।

विशेष उपलब्धियाँ[संपादित करें]

  • ११ जुलाई २००३ - हिन्दी विकिपीडिया का शुभारम्भ।
  • २५ जनवरी २००५ - हिन्दी विकिपीडिया पर लेखों की संख्या १,००० पहुँची।
  • १६ जनवरी २००७ - हिन्दी विकिपीडिया पर लेखों की संख्या ५,००० पहुँची।
  • १४ मार्च २००७ - हिन्दी विकिपीडिया पर लेखों की संख्या १०,००० पहुँची।
  • ६ दिसंबर २००७ - हिन्दी विकिपीडिया पर लेखों की संख्या १५,००० पहुँची।
  • २९ मई २००८ - हिन्दी विकिपीडिया पर लेखों की संख्या २०,००० पहुँची।
  • ११ जुलाई २००८ - हिन्दी विकिपीडिया के पाँच वर्ष पूरे हुए।
  • ०९ मई २००९ - हिन्दी विकिपीडिया पर लेखों की संख्या ३०,००० पहुँची।
  • ८ सितंबर २००९ - हिन्दी विकिपीडिया भारतीय भाषाओं में विकिपीडिया का सबसे बड़ा संस्करण बना।
  • १४ सितंबर २००९ - हिन्दी विकिपीडिया पर लेखों की संख्या ५०,००० पहुँची।
  • १३ फ़रवरी २०१० - हिन्दी विकिपीडिया पर सदस्यों की संख्या २५,००० से अधिक हुई।
  • २० जून २०१० - हिन्दी विकिपीडिया पर सदस्यों की संख्या ३०,००० से अधिक हुई।
  • २६ नवम्बर २०१० - हिन्दी विकिपीडिया पर सदस्यों की संख्या ३७,००० से अधिक हुई।
  • २९ जनवरी २०११ - हिन्दी विकिपीडिया पर सदस्यों की संख्या ४०,००० से अधिक हुई।
  • १४ अगस्त २०११ - हिन्दी विकिपीडिया पर सदस्यों की संख्या ५०,००० से अधिक हुई।
  • ३० अगस्त २०११ - हिन्दी विकिपीडिया पर लेखों की संख्या एक लाख से अधिक हुई।
  • १७ जनवरी २०१२ - हिन्दी विकिपीडिया पर सदस्यों की संख्या ६०,००० से अधिक हुई।
  • ७ नवम्बर २०१३ - हिन्दी विकिपीडिया पर सदस्यों की संख्या एक लाख से अधिक हुई।
  • १ दिसम्बर २०१५ - हिन्दी विकिपीडिया पर पंजीकृत सदस्यों की संख्या दो लाख से अधिक हुई।
  • २३ अक्टूबर २०१८ - हिन्दी विकिपीडिया पर पंजीकृत सदस्यों की संख्या चार लाख के पार हुई।

आँकड़ों में हिन्दी विकिपीडिया[संपादित करें]

हिन्दी विकिपीडिया का मुखपृष्ठ (१२ फ़रवरी २०१२)।
क्रमांक महीना वर्ष लेख संख्या
१. जुलाई २००३ १+
२. अगस्त २००३ २२+
३. फ़रवरी २००४ १००+
४. जनवरी २००५ ५००+
५. फ़रवरी २००५ १,०००+
६. जनवरी २००७ ५,०००+
७. मार्च २००७ १०,०००+
८. जनवरी २००८ १५,०००+
९. जुलाई २००८ २०,०००+
१०. अनुपलब्ध अनुपलब्ध २५,०००+
११. मई २००९ ३०,०००+
१२. अगस्त २००९ ३५,०००+
१३. ३१ अगस्त २००९ ४०,०००+
१४. सितम्बर २००९ ४५,०००+
१५. १४ सितम्बर २००९ ५०,०००+
१६. ९ जून २०१० ५५,०००+
१७. ३० अगस्त २०११ १,००,०००+

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "हिन्दी विकिपीडिया के आँकड़े". मूल से 23 अक्तूबर 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 15 जून 2020.
  2. एच.टी.एम.एल प्रारुप में आँकड़े

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]