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गावर,जाटों का गोत्र है।,जो मथुरा के मांट में कई गावों में गावर रहते है,मांट का अर्थ है मट्टी के बरतन, मांट यमुना नदी के किनारे बसा है।जब श्री कृष्ण अपने शखाओ के साथ गाय चराते थे, तब सखियों के सिर पर रखे बर्तनों को तोड़ना खेल खेलते थे। लोग उन्हें और उनके शाखाओं को ग्वाला कहते थे। जो बाद में समय के अनुसार बदल कर गावर हो गया। जो कि एक वीरता से परिपूर्ण ये लोग कृष्ण की सेना में भी योद्धा थे। गाय की सेवा करना और युद्ध लड़ना इनका कार्य था। आज भी गायो का पालन और खेती करते है। गावरो का श्री कृष्ण से गहरा सम्बन्ध है।