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पर्यावरण डाइजेस्‍ट (संपादन|वार्ता|इतिहास|कड़ियाँ|ध्यान रखें|लॉग)

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नामांकन के लिये कारण:

blogspot.in डोमेन में प्रसिद्ध हो रही ई पत्रिका का लेख जो उल्लेखनीय नहीं है। आर्यावर्त (वार्ता) 05:55, 26 जनवरी 2018 (UTC)

@आर्यावर्त: जी, जैसा कि मेरे द्वारा यह अध्ययन किया गया है, उससे यह स्पष्ट होता है कि ब्लॉग्स्पॉट डॉट इन पर केवल सामग्रियों को संग्रहीत किया गया है। इसकी मुद्रित सामाग्री हर माह अलग से प्रकाशित होती रही है। पिछले दो-तीन दशकों के इतिहास को देखें तो ऐसी पत्रिकाएं दो-चार ही देखने को मिलेंगी। इनमे प्रमुखता से पर्यावरण डाइजेस्ट का नाम उभरकर सामने आता है। मध्यप्रदेश के रतलाम शहर से जनवरी 1987 से सतत् प्रकाशित हो रही मासिक पर्यावरण डाइजेस्ट ने बेहद सीमित संसाधनों और प्रबल इच्छाशक्ति के बलबूते पच्चीस बरसों का लम्बा सफर तय किया। हिन्दी पत्रकारिता में पर्यावरण डाइजेस्ट ने एक नई परम्परा क़ायम कर अपना विशिष्ट स्थान बनाया है। पत्रिका ने क्षेत्रीय होते हुए भी राष्ट्रीय स्तर को छुआ है। मेरे विचार से इसे विश्वसनीय स्त्रोत के माध्यम से जानकारियों को संकलित करके प्रचार सामाग्री हटा दिया जाना चाहिए। मेरे विचार से इसे रखा जाये.. --माला चौबेवार्ता 06:09, 8 मार्च 2018 (UTC)

नमस्ते माला जी, कैसे हैं आप? लंबे काल के बाद आज महिला दिन पर आपसे भेट हुई। शुभकामनाएं एवं सादर प्रणाम। मैं भी पत्रकारिता के व्यवसाय से ही जुड़ा हुआ हूँ। मेरी भाषा गुजराती है अतः हिन्दी पत्रकारिता के इतिहास, वर्तमान से अधिक परिचित नहीं हूं किन्तु पत्रकारिता से तो भलीभांति परिचित हूँ। मेरे शहर में ही हर महीने अनेकों पत्रिकाएँ निकलती हैं जो सभी उल्लेखनीय नहीं है। पत्रिका का आरएनआई क्रमांक होना उल्लेखनीयता का मापदण्ड नहीं है क्योंकि सभी पत्रिका के लिए आईएनआई क्रमांक प्राप्त करना एक अनिवार्य प्रक्रिया होती है। फैलाव उल्लेखनीयता का प्रतीक हो सकता है। फैलाव भी कुछ विस्तार तक सीमित नहीं होना चाहिए। जिस पत्रिका की स्वयं की वेबसाइट भी नहीं है तो अवश्य उल्लेखनीयता संदिग्ध है। आजकल तो छोटे छोटे अखबारों, पत्रिकाओं की भी वेबसाइट होती है। वैसे समाचारपत्र के लिए वेबसाइट आवश्यक हो सकती है परंतु पत्रिका के लिए न भी हो। यदि ये उल्लेखनीय महत्व रखती है तो तृतीय पक्ष संदर्भ (जो विश्वसनीय हो) अवश्य ही होंगे। कृपया संदर्भ के साथ उल्लेखनीयता स्थापित करें अन्यथा हटाया जाना चाहिए।--आर्यावर्त (वार्ता) 10:19, 8 मार्च 2018 (UTC)
@आर्यावर्त: जी, अच्छी हूँ, आप कैसे हैं? मैं मानती हूँ कि "पत्रिका का आरएनआई क्रमांक होना उल्लेखनीयता का मापदण्ड नहीं है, लेकिन यह भी सत्य है, कि बिना आरएनआई के पत्रिका का निकलना भी न्यायोचित और संभव नहीं होता। खैर यह एक अलग विषय है, किन्तु किसी पत्रिका का विषय प्रधान होते हुये पच्चीस बरसों का सफर किसी हनुमान कूद से कम नहीं होता। वह भी उस भाषा में जहां पर्यावरण पर केन्द्रित पत्रिकाओं का अकाल हो। यह पत्रिका मुद्रित रूप में है, न कि अंतर्जाल पर। पर्यावरण पर भारत की पहली राष्ट्रीय हिंदी मासिक है यह इसलिए इस पत्रिका की सामाग्री ब्लॉग्स्पॉट पर संग्रहीत हो अथवा अन्यत्र क्या फर्क पड़ता है। वैसे कुछ लिंक है, जिसे लेख की उल्लेखनीयता के संदर्भ में प्रयुक्त किया जा सकता है जैसे- पत्रिका का उल्लेख इंडिया वाटर पोर्टल (हिन्दी), भारत कोश एवं मीडिया हूँ मै (पुस्तक) में होना उल्लेखनीय माना जा सकता है। इसलिए इस विषय पर कुछ और लोगों की राय ले लें। धन्यवाद।--माला चौबेवार्ता 10:02, 13 मार्च 2018 (UTC)