विकास महाराज

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विकास महाराज का १९८३ में एक कायक्रम में सरोद वादन करते हुए

विकास महाराज हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत में सरोद प्रसिद्ध वादक हैं। ये स्व>पंडित किशन महाराज के भतीजे और स्व.पंडित ननकू महाराज के पुत्र हैं।

आपकी उम्र महज़ 9 साल की थी जब आपने अपनी पहली सरोद वादन की मंच प्रस्तुति दी, जो की भारतीय शास्त्रीय संगीत के इतिहास में एक और शानदार अध्याय जुड़ने की शुरुआत थी | आपने अपने पिता तबला ऋषि पंडित नन्हकू महाराज एवं मामा पद्मविभूषण पंडित किशन महाराज से तबले की लयकारियाँ तथा पंडित राजेश चंद्र मोइत्रा से सरोद कि शिक्षा प्राप्त की | पंडित विकास महाराज का जन्म 1957 में बनारस घराने के प्रसिद्ध महाराज परिवार में हुआ, जो 500 वर्ष के महान वंश परम्परा में विरासत की 14 वें पीढ़ी के रूप में आपके कन्धों पर सुशोभित हैं |[1]

वर्तमान में भारत के सबसे बड़े आबादी वाले राज्य, उत्तर प्रदेश के एकमात्र अंतर्राष्ट्रीय सरोद वादक के रूप में आपने न्यूज़ीलैण्ड के संसद भवन एवं नॉर्वे स्थित नोबेल हाउस में सरोद वादन के साथ ही साथ जर्मन संसद चिन्ह से सम्मानित होने वाले प्रथम भारतीय सरोद वादक के रूप में भारत का सम्मान बढ़ाया है | आपने भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित भारत महोत्सव के अंतर्गत स्विट्ज़रलैंड के ज़्यूरिख एवं जेनेवा, स्वीडन के स्टॉकहोम एवं न्यूज़ीलैण्ड के ऑकलैंड एवं वेलिंग्टन शहर में अपने सरोद वादन की प्रस्तुतियाँ दी | I.C.C.R. भारत सरकार द्वारा आयोजित प्रवासी कार्यक्रम के तहत न्यूज़ीलैण्ड एवं बांग्लादेश में अपना सफल सरोद वादन प्रस्तुत किया एवं संगीत नाटक अकादेमी के उत्तर प्रदेश पर्व के अंतर्गत भारत के कई राज्यों पश्चिम बंगाल, ओडिसा, केरल एवं आसाम में अपने सरोद वादन से श्रोताओं के बीच भारतीय संस्कृति एवं शास्त्रीय संगीत को साझा किया | पंडित विकास महाराज ने कई फिल्मो में संगीत निर्देशन दिया है जिनमे "नागोशी" (ऑस्कर पुरस्कार के लिए नामित), "होलीवाटर प्रोजेक्ट", "गरम मसाला", "मेकिंग ट्रैक्स" एवं EPIC CHANNEL के लिए "बनारस": शास्त्रीय संगीत घराना मुख्य हैं | 1982 में जर्मनी के 5 वें राष्ट्रपति श्री कार्ल कर्स्टन के विशेष निमंत्रण पर म्यूनिख, जर्मनी में अंतर्राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन संगोष्ठी के दौरान सरोद वादन कर, भारत की प्राचीन संस्कृति एवं संगीत का प्रतिनिधित्व किया | आपने विश्वविख्यात अंतर्राष्ट्रीय संगीतकारों के साथ 6000 से ज्यादा मंच प्रस्तुतियाँ दी हैं | आप बनारस घराने के एकमात्र सरोद वादक हुए जिनके 15 से ज्यादा एल०पी०, 150 से ज्यादा सी०डी० एवं 40 से भी अधिक डी० वी० डी० अंतर्राष्ट्रीय बाजार में उपलब्ध हुए | भारत रत्न पंडित रवि शंकर द्वारा अग्रेषित पुस्तक "The Dawn of Indian Music in the West" में पंडित विकास महाराज को भारतीय संगीत को पश्चिम देशों में प्रचारित करने वाले प्रमुख संगीतकारों में सम्मिलित किया गया है | यूरोपियन देशो में संगीत के पवित्र ग्रन्थ के रूप में पूज्यनीय H.H. Sir Joachim-Ernst Berendt की पुस्तक “The World Is Sound: Nada Brahma: Music and the Landscape of Consciousness” में आपको विश्व के 20 विश्व विख्यात संगीतकारों में सम्मिलित कर ना केवल संगीत में आपके योगदान को अमर बनाया, बल्कि पश्चिमी देशों में भारतीय संगीत की पहचान को आने वाले सैकड़ों सालों तक जीवंत कर दिया |[2] [3] [4]

पंडित विकास महाराज को सन 2015 में उत्तर प्रदेश के विशिष्ट नागरिक सम्मान यश भारती से सम्मानित कर उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक राजदूत के रूप में नियुक्त किया गया | आपको अन्य सम्मानों जिनमे जर्मन शहर रेम्ससाइड के महापौर द्वारा लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार (2016), कर्मवीर सम्मान-नई दिल्ली (2015), राइट लाइवलीहुड अवार्ड-स्वीडन (नामित) (2015), संतकेशव दास रत्न सम्मान-बिहार सरकार (2012), विद्या-भूषण-उत्तर प्रदेश (2007), गुरु सम्मान-उत्तर प्रदेश (2005), डॉ.सर्वपल्ली राधा कृष्णनन सम्मान-नई दिल्ली (2001), पहरुआ सम्मान-उत्तर प्रदेश (2001), सरोद शिरोमणि-मॉरिशस (1999), भारतीय सांस्कृतिक राजदूत-जर्मनी (1997), सिटी रत्न-ज़ीटीवी समूह-भारत (1997), सरोद मेस्ट्रो-उत्तर प्रदेश (1997), सरस्वती सम्मान-नई दिल्ली (1998), सरोद मेस्ट्रो-जर्मनी (1986) एवं सरोद के जादूगर-झारखण्ड (1981) जैसे अनेकों राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सम्मानों एवं पदकों से सुशोभित किया गया है | आप सन 1986 से 1988 तक उत्तर प्रदेश आई० ए० एस० एसोसिएशन एवं 1988 से 1993 तक संयुक्त राष्ट्र युवा संगठन U .N .Y .O जेनेवा के सम्मानित सदस्य रहे हैं | आप वर्तमान में UNESCO , GEMA , होलीवाटर-न्यूज़ीलैण्ड तथा इंडो-जर्मनी सोसाइटी-जर्मनी के सदस्य के रूप में निरंतर समाज सेवा का कार्य कर रहे हैं |

पंडित विकास महाराज ने समाज एवं संगीत के प्रति अपने कर्तव्यों को दृढ़ करते हुए अनेकों संगीत महोत्सवों एवं सामाजिक संगठनो की नींव डाली, जो आज नई पीढ़ियों को मंच प्रदर्शन एवं समान शिक्षा प्रदान कर रहे हैं, जिनमे, गंगा महोत्सव, संगीत विभाग-काशी विद्यापीठ-वाराणसी, काशी विश्वनाथ संगीत समारोह-वाराणसी, Musicians Against Child Labour - International एवं मानवाधिकार जन निगरानी समिति-वाराणसी आदि प्रमुख हैं | पंडित विकास महाराज ने विश्व के सभी विशिष्ट एवं अतिमहत्वपूर्ण विश्वविद्यालयों में अध्यापन का कार्य कर, भारतीय संस्कृति एवं भारतीय शास्त्रीय संगीत दोनों को उच्चतम स्तर पर प्रसिद्धि प्रदान कर देश को सम्मान दिलाया है, और भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं पाश्चात्य शास्त्रीय संगीत सभ्यताओं के बीच एक ऐसे सांस्कृतिक पुल का निर्माण किया, जिससे दोनों संगीत पद्धतियों को आसानी से समझा जा सके | ऐसे ही कुछ अतिमहत्वपूर्ण विश्वविद्यालय हैं : California State University, University of Washington, University of Auckland, महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ, Berkeley Music College, Santa Barbara University, Bach Music Academy, Cologne Music and Dance University, Cologne Stuttgart Music University, Ochsenhausen State University, Loyola Mary Mount University, San Diego City College, Mozart Academy of Ancient Music, Tropical Institute of Music and International Studies, Gagaku Music Society। आपने अनेकों विश्वविख्यात संगीतकारों के साथ मंच प्रस्तुति की, जिनमे प्रमुख रूप से भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, भारत रत्न पंडित भीमसेन जोशी, पद्मविभूषण पंडित किशन महाराज, पद्मभूषण पंडित सामता प्रसाद मिश्र, बंगाल टाइगर सम्मानित पंडित नन्हकू महाराज, उस्ताद लतीफ़ अहमद, पंडित सपन चौधरी, पंडित लच्छू महाराज, उस्ताद बल्लू खां, उस्ताद फज़ल कुरैशी, पंडित कुमार लाल मिश्रा, किरण देश पांडेय एवं विश्वविख्यात अंतर्राष्ट्रीय संगीतकारों में Herbie Hancock, Peter Gabrielle, John McLaughlin, Paul Horn, John Handy, David Friesen, Art Handle, Umar Hakim, Tom Bailey, Wise Guys, Dom Um Romao, Luis De Matteo, Patrick Bebelaar, Andrew Cyrille, Connie Bauer, Rudy Smith, Lenart Äberg, Bernd Konard, Tom Vendargeld आदि शामिल हैं |


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