वार्ता:हिंदी की विभिन्न बोलियाँ और उनका साहित्य

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और सब बोलियाँ भी संस्कृत से उपजीं हैं[संपादित करें]

मैथिली हिन्दी का कोई रुप नही है। यह सीधे सँस्कृत भाषा से उपजा है। अत: इस शीर्षक के अन्तर्गत इसका विवरण नही होना चाहिए।

मेरे विचार से हिन्दी की 'बोली' वह है जो हिन्दी से बहुत कुछ मिलती है। बाकी और सब लोग बताएँ।

अनुनाद सिंह १३:४७, ७ मार्च २००८ (UTC)


अनुनाद जी जहाँ तक मिलने-जुलने का सवाल है, तो उसके मानक क्या हैं, क्या मिलना चाहिये? अगर उस हिसाब से देखेंगे तो हिन्दी बहुत सी भाषाओं से मिलती-जुलती है। --विजय ठाकुर १५:०९, ७ मार्च २००८ (UTC)


विजय जी, 'मिलने-जुलने के मानक' को गणितीय रूप मे या किसी 'इन्डेक्स' के द्वारा व्यक्त करना अत्यन्त कठिन है (पर असम्भव नहीं)। बोली और भाषा का प्रश्न (विवाद) बहुत पुराना है। किसी ने ठीक ही कहा है कि "भाषा उस बोली को कहते हैं जिसके पास अपनी थलसेना और जलसेना होती है"। इसलिये भाषा और बोली की विभाजक रेखा खींचना बहुत कठिन काम है। जिनको भाषाएँ कहा जाता है उनमें भी बहुत समानता होती है। पंजाबी, गुजराती, नेपाली और बांग्ला भी हिन्दी से बहुत मिलती हैं। किन्तु सामान्यतः उन्हें हिन्दी की बोली नहीं कहा जाता। भाषा, स्थान के परिवर्तन के साथ क्रमशः बदलतीजाती है (और समय के साथ भी) । जिसको हम भोजपुरी कहते हैं वह सिवान में अलग है, गोरखपुर में अलग और बनारस में अलग !

बडी बिडम्बना है कि कुत्ते और भेडिये को अलग-अलग जानवर कहा जाता है जबकि उनमें बहुत समानता है। चीन का 'मनुष्य' और अफ्रीका के 'मनुष्य' में बहुत भिन्नता होते हुए भी दोनो को मनुष्य ही कहा जाता है।

अनुनाद सिंह ०५:३२, ८ मार्च २००८ (UTC)

অভিযোগ[संपादित करें]

যদি সঠিক অনুসন্ধান করা যায় তবে হিন্দি ভাষাভাষি 25 কোটিও পাওয়া যাবে না|ভোজপুরি,মৈথিলি ইত্যাদি সতন্ত্র ভাষাকে জোর করে নিজের উপভাষা হিসেবে চালিয়েছে|মৈথিলি হিন্দির চেয়ে বাংলার সাথে বেশি সাদৃশ্যপূর্ণ|ভোজপুরি সতন্ত্র ভাষা Raisul01908 (वार्ता) 16:35, 8 जुलाई 2020 (UTC)उत्तर दें[उत्तर दें]