वार्ता:सिकंदर

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लेखन संबंधी नीतियाँ

http://www.historypedia.in/sikandar-in-hindi-alexander-the-great/== सिकंदर और पुरु का आमना सामना ==

हाथियों के प्रचंड रूप को देख कर के सिकंदर(sikandar) की सेना मैं भगदड़ मचने लगती है। सिकंदर अपनी हार होती देख खुद ही युद्ध भूमि मैं उतर पड़ता है और मुकाबला करने लगता है। वह पुरु के भाई पर जो की हाथी के ऊपर बैठा हुआ था उसपर हमला करता है पर पुरु का भाई उसपर भाले से हमला करता है इसी बीच सिकंद रकि तलवार उसके हाथ से छूट जाती है। और अचानक उसके सामने पुरु खड़ा हो जाता है। सिकंदर कुछ ही पल का मेहमान था की एक दम पुरु अपनी तलवार को हटा लेता है। इसी बीच सिकंदर के अंगरक्षक उसे अपनी ढाल पर हवा मैं उठा ले जाते हैं।


पुरु ने सिकंदर(sikandar) को इसलिए नहीं मारा था क्यूंकि किसी निहत्ते पर वार करना छत्रिय धर्म के विरुद्ध होता है। इससे हमें य भी मालुम होता है की पुरु छत्रिय धर्म का पालन करने वाला योद्धा था। युद्ध मैं सिकंदर की सेना को बहुत भारी मात्रा मैं नुक्सान हो रहा था। उसके कई सैनिक मारे गए थे और कई सैनिक घायल हो गए थे। पर सिकंदर ने अपनी सेना से कहा की हम विश्व विजेता बनने निकले हैं हम लड़ेंगे इससे उसकी सेना समझ गयी कि वह अपनी सेना के बारे मैं बिलकुल भी नहीं सोच रहा है। जिससे उसकी सेना मैं बगावत की स्तिथि उत्पन हो गयी।


इस बगावत की स्तिथि को सिकंदर समझ गया और उसे समझ मैं आ गया की उसने अगर युद्ध की हट नहीं छोड़ी तो उसकी सेना ही उसे मार देगी। उसने युद्ध विराम की घोसड़ा करते हुए पुरु के पास संधि करने का सन्देश भेज दिया। पुरु भी जानता था की सिकंदर मदद के लिए एक सेना और आने वाली है और आगे युद्ध करने का मतलब और नुक्सान झेलना होगा। और वह संधि के लिए मान जाता है।