वार्ता:रोमियो और जूलियट

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रोमियो और जुलियट

                    एक दुखान्त नाटक है जो विल्लिअम शकेस्पियर ने अपने शुरुवाति विकास मे लिखा है, जो दो प्रेमियो के मरन के बाद उनके परिवारो को मिला देता है। यह शेक्स्पियर के ज़माने के सबसे लोक्प्रिय नाटको मे से एक था और हाम्लत के साथ साथ इस समय का भी बहुत ही बहुधा नाटक है। आज के जमाने के प्रेमियो को भी उनके नाम के साथ जोडा जाता है। 
                   रोमियो और जुलियट एक ऐसी परम्परा है जिसे परावस्तु के साथ जोडा जाता है। इसकी रूप रेखा एक इतालिअन कहानी से ली गयी है, जिसका अनुवाद एक कविता के रूप मे है जो अर्थुर ब्रूक्स् के द्वारा "द त्रगिकल हिस्तोरी ओफ रोमिय्स आन्द जुलिएत" मे १५६२ मे किया गया था और उसके बाद गद्य मे "पालेस ओफ प्लेज़र" के प्रकार मे विल्लिअम पैन्तर् के द्वारा १५६७ मे लिखा गया था। शेकेस्पियर ने दोनो मे से उदाहरण लिए है लेकिन अपने रूप रंग को बधाने के लिये दो नए पात्रो का विकास भी किया है जो मरक्युशयो और पारिस के रूप मे है। यह माना जाता है कि ये नाटक १५९१-१५९५ के बीच मे लिखा गया था और सबसे पहले ८ पृष्ठ मे प्रकाषित  किया गया था। इसका विशय बहुत कमज़ोर माना गया था, लेकिन उसके बाद के सन्स्कर्णो मे यह शेकेस्पियर के नाटक से मिलने जुलने लगा।
                   शेकेस्पियर के काव्यात्मक नाटकीय सनरचना के प्रयोग, विशेशत: जैसे काँमेडी और त्रासिदि के बीच मे तनाव को बधाने के लिये नाटकीय पात्रो के प्रसार करने के लिये आदि, उनकी नाटकीय प्रवीनता को और प्रशन्सक बनाता है।
                   रोमियो और जुलियट को कई बार अनुकूल बनाया गया है जैसे कि रंग मन्च, सिनेमा, संगीत, संगीतिका आदि। अंग्रेज़ी जिर्नोदधार के समय इसको विल्लिअम देवनन्त ने फिर से दोहराया था। देविद गार्रिक के १८ सन व्रितान्त ने इसके घटना को सुधारा था, जोर्ज बेन्दा के संगीतिय ने भी बहुत से क्रिय को हटाटे हुये इसे एक खुशनुमा अन्त दे दिया। १९ सन के प्रदर्शनो मे से एक चार्लोत कुश्मेन का था जिसमे विशय ऐसे ही रखते हुए, यथार्तवाद को ज़्यादा महत्त्व दिया था।  जोह्न गैल्गुद के १९३५ का व्रितान्त भी शेकेस्पियर के विशय से मिलता जुलता था, लेकिन उन्होने एलिज़िबिथियन पेहनावे और रंग मन्च का उप्योग करते हुए नाटक को और बढावा दिया। २० और २१ सन मे इस नाटक को भिन्न प्रकार के व्रितान्तो के साथ जोदा गया है जैसे की जोर्ज क्युकर कि १९३६ उत्पाध, फ्रान्को ज़ेफिरेलि कि १९८६ कि व्रितान्त, बाज़ लुह्र्मान्न कि MTV प्रेरित रोमियो + जुलियट और २०१३ कि व्रितान्त जो कार्लो करेई द्वारा है।

पात्र:

वेरोना का प्रबल घर: राजकुमार एस्केलस् जो वेरोना का प्रबल राजकुमार है। काउन्त पेरिस, राजकुमार एस्कलस का रिश्तेदार है जो जुलिएत को बियाना चाहता है। मर्क्युश्यो राजकुमार एस्केलस का एक और रिश्तेदार है और रोमियो का दोस्त।

केप्युलेत् का घर: केप्युलेत, केप्युलेत के घर का कुल पिता है। भद्रामहिला केप्युलेत, केप्युलेत के घर कि मात्र सन्ता है। जुलिएत, केप्युलेत की १३ वर्श कि पुत्री है और नाटक कि स्त्री नायक है। ताइबोल्त, जुलिएत का रिश्तेदार है, और केप्युलेत कि पत्नी का भतीजा। परिचारिका जुलिएत की वेयन्तिक साथी है। रोज़लीन, केप्युलेत की भतीजी है और नाटक के शुरूवात मे रोमियो का प्यार। पीटर, साम्सन और ग्रेगोरी केप्युलेत के घर के सेवक है।

मोन्तेग्यु का घर: मोन्तेग्यु, मोन्तेग्यु के घर का कुल पिता है। भद्रमहिला मोन्तेग्यु, मोन्तेग्यु के घर की मात्र सन्ता है। रोमियो, मोन्तेग्यु का पुत्र है और इस नाटक का पुरुश नायक है। बेनवोलिओ, रोमियो का रिश्तेदार है और दोस्त भी। अबराम और बालथज़ार मोन्तेग्यु घर के सेवक है।

दूसरे: फ्रायर लोरेन्स, एक फ्रन्सिसकन फ्रायर है और रोमियो के विश्वास पात्र भी। फ्रायर जोन को फ्रायर लोरेन्स के पात्र के साथ रोमियो तक भेजा जाता है।


रोमियो और जुलियट कि त्रासिदि:

                      वेरोना मे निर्धारित, यह नाटक केप्युलेत और मोन्तेग्यु के सेवको के लडाई से शुरु होता है, जो अपने मालिको जैसे ही एक दूसरे से नफरत करते है। राजकुमार एस्कलेस बीच मे आते हुए कहते है कि ज़्यादा दरारे दालने से मौत की सज़ा मिल सकती है। बाद मे, काउन्त पेरिस केप्युलेत की बेटी जुलिएत के साथ रिश्ते का प्रस्थाव लेकर आते है, लेकिन केप्युलेत इस बात को तालते हुए उन्हे दो वर्श तक रुकने का समय देते हुए उन्हे केप्युलेत बाँल मे पधारने का निमन्त्रन देते है। भद्रमहिला केप्युलेत और उसकी परिचारिका जुलिएत को पेरिस के प्रस्थाव को स्वीकारने के लिये मनाते है।
                       इसी दौरान, बेन्वोलिओ अपने रिश्तेदार रोमियो से उसकी हाल्हि उदासि के बारे मे बात करता है। तभी बातो के दौरान बेन्वोलिओ को पता चलता है की रोमियो का हाल केप्युलेत की भतीजी रोज़लीन के द्वारा आसिन्तिक के वजह से हुआ है। मर्क्युश्यो और बेन्वोलिओ के दबाव मे आने से रोमियो, केप्युलेत के जन्समूह मे रोज़लीन से मिलने कि इच्छा मे जाता है। लेकिन वहा जाकर वह जुलियट से मिलता है और उसे उससे प्यार हो जाता है। जुलियट का रिश्तेदार ताइबाल्त इस बात से बहुत गुस्सा हो जाता है कि रोमियो सबसे छिपाते हुए उनके घर मे प्रवेश कर जाता है, लेकिन वह कुछ भी नही कर पाता क्योकि केप्युलेत अपने घर मे खून खराबा देखना नही चाहते। बाँल के बाद रोमियो सबसे छिपाते हुए केप्युलेत के फुलोगान मे प्रवेश कर जाता है और चुपके से जुलियट के उसके प्रति प्रेम कि बातो को सुन लेता है, यह जानते हुए भी के मोन्तेग्यु वाले उनके रिश्ते को कभी नही सराहेंगे। रोमियो फिर सामने आ जाता है और दोनो के बीच मे बात-चीत के बाद यह फैसला होता है कि वह एक दूसरे  से शादी के बन्धन मे बन्ध जाएंगे। फ्रायर लोरेन्स की मदद से, जिन्हे लगता है की दोनो के शादी के बाद दोनो परिवारो मे सुख शान्ति हो सकती है, तो उन्होने अगले ही दिन शादी करवा दी।  
                        इसी दौरान, ताइबाल्त कि रोमियो की तरफ छुप्ते छूपाते हुए बाँल मे आने कि नाराज़गी से वह द्वंद युध करना चाहता था। रोमियो, जो अब ताइबाल्त को अपना रिश्तेदार मानता है, इस युध से इन्कार कर देता है। मर्क्युश्यो, ताइबाल्त कि ध्रश्तता से  नाराज़ होकर रोमियो के तरफ से युध को कुबूल् कर लेत है। मर्क्युश्यो को चोत पहुचति है, उनकी युध के वजह से जब रोमियो आकर इस युध को रोकना चह्ता है। बडे ही दुख और अप्राध बोध के साथ रोमियो ताइबाल्त का सामना करता है और उसे मार देता है। राजकुमार, अपने रिश्तेदार को युध मे खोने के बाद, रोमियो को देश निकाले की सज़ा देता है और कहता है कि अगर वह वेरोना मे वापस दिखाई दिया तो उसे मार दाला जाएगा। रोमियो गुप्त हो के जुलियट के कक्ष मे रहता है जहा पर वह दोनो अपनी शादी को पूरा करते है। केप्युलेत को लगता है कि जुलियट इस बात से बहुत दुखी है तो वह पेरिस के रिश्ते के प्रस्थाव को स्वीकार कर लेते है और उसे धमकी देते हुए कहते है की अगर उसने इस शादी से इन्कार कर दिया तो वह उसे पहचान्ने से इन्कार कर देंगे। जुलियट अपनी माँ से प्रार्थना करते हुए कहती है की इस शादी को ताल दिया जाए, लेकिन उसकी माँ मना कर देती है। 
                        उसके बाद, जुलियट फ्रायर लोरेन्स से मदद मांगने जाती है, जो उसे एक दवा देते है और कहते है की दवाई जुलियट को दो दिन बेहोशी के नीन्द मे रखेगी। फ्रायर उससे प्रतिज्ञा करते है की किसी को रोमियो तक यह सन्देशा पहुन्चाने भेजेंगे और उसके जगते ही वह भी इस मे शामिल हो पाएगा। शादी के एक रात पहले वह यह दवाई ले लेती है और सबको लगता है कि वह मर गई है जिसकी वजह से उसे परिवार के तहखाने मे रखा जाता है।
                        वह सन्देशवाहक रोमियो के पास नही पहुँच पाया और रोमियो को अपने सेवक बाल्थज़र से यह खबर मिली कि जुलियट का देहान्त हो गया है। शोकार्थ, रोमियो तेज़ाब खरिदकर केप्युलेत के तहखाने मे जाता है। वह वहा पेरिस से मिलता है जो जुलियट के देहान्त से अत्यन्त दु:खी होता है। पेरिस, रोमियो को एक सत्यनाशी समझ बैठता है और दोनो के बीच मे लडाई होती है, जिसमे रोमियो पेरिस का वध कर देता है। रोमियो को लगता है कि जुलियट सच मे अब ज़िन्दा नही रही है, उसी कारण वह तेज़ाब पी लेता है। जुलियट के होश मे आते ही वह देखती है की रोमियो का देहान्त हो गया है, और उसी शण वह कटार का उपयोग करते हुए अपने आप को मार देती है। दोनो परिवार और राजकुमार मिलते है और तीनो को मरा हुआ पाते है। फ्रायर लोरेन्स दोनो के परिवारो को उनकी कहानी के बारे मे बताते है। दोनो परिवारो के बीच मे सुलह हो जाती है और वह अपनी लडाई का अन्त कर देते है। नाटक का अन्त राजकुमार के प्रेम गीत से होता है।