वार्ता:मगधीरा

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प्रशस्त तेल्गु अभिनेता श्रि चिरन जीवि का बेटा राम चरन इस फिल्म का मुख्य नयक है और काजल अगर्वाल इसका मुख्य अभिनेत्रि है जब कि श्रि रघुमुन्द्रि और देव गिल्ल भी इस फिल्म मे मुख्य अभिनेताओ मे से एक है। फिल्म का सान्गीतकार्, येम कीरावाणी है, कला निर्देशक आर,रविन्द्र, छायकार के के सेन्तिल और सम्पादक कोटगिरि वेन्कटेश्वरा रओ है। इस का प्रद्रशन ३१ जुल्य को हुआ और तेल्गु सिनेमा की इतिहास मे सब से उज्वल विजय और कमायी प्राप्त् हुआ। मालायालाम मे इस्को -"धीरा- धि वारियर नाम से और तमिल मे -"मावीरान" के नाम से प्रद्र्शन किया। दुनिया बर मे इस चित्र क कमायी US$ १२ मिल्लिओन था।

कथान[संपादित करें]

यह कहानि फ्लैश्बैक की रूप मे प्रस्त्त्तु किया गाया है। वर्तमान काम (२००९) से शूरु होता है। हर्शा (राम चरन) एक साह्सिक युवक है जो बैक्क से अपनी सहसिक्था दिखाकर पैसा कमाते थे। एक दिन उसका मुलाकात इन्दु (काजल अगर्वाल)से होता है और जब कभी हर्श इन्दु को चुता है तो उसे कुछ अजीब सा मेहसुस होता है जैसे बिज्ल्लि को हाथ लगाय है और इन्दु को चुते ही हर्श को कुछ याद आ जाता है लेकिन कुछ समज नहि पाता। इन्दु हर्शा से प्यार करती है लेकिन अपनी दिल की बात को छुपा थी है। इन्दु कि पिता (शर्थ बाबु) उदयजग्ड सम्राज्य, जो उस्कि पुर्वजो का जयदाद है जिस पर उसका जीजा ने ज़बर्दस्ती से अधिकार पाया है, इसी कारण दोनो के बिच कान्नुनी लडाई हो रहा है। जीजा जी का बेटा, रघुवीर (देव गिल्ल) का नज़र इन्दु पर है और उसे पाने का मोह उट्ता है। रघुवीर इन्दु को पाने केलिये अपनी दुश्मनी को बुलकर, उदयजग्ड वपास लौटाते है। इन्दु और उसके पिता को रघुवीर कि जाल के बारे मे पता नहि। रघुवीर जब कभी इन्दु की पास आने की कोशिश करता है तो उसे इसा प्रतीत हुअ कि कोई ऐसा शक्ति हमेशा इन्दु की रक्शा करती है और वोह शक्ति रघुवीर को डराता भी है। भयबीत रघुवीर "अगोरा" के पास मदद लेने जाता है, और उसे अपनी अतीत के बारे मे पता जलता है। उसी समय दुसरी ओर इन्दु हर्शा की प्यार को मान लेती है। रघुवीर को यह पता जलता है कि इन्दु उस से प्यार नहि करता, और वो हर्श को डुन्ड कर उसे मार डालना चाह्ता था। इसलिये रघुवीर, इन्दु और हर्शा को अलग करने केलिए इन्दु के पिता को मार डालता है ताकि इन्दु को ऐस प्रतीत हो जाये कि ह्रर्शा ही उसे मर डाला है। हर्शा अपने आप को बेकसूर स्थापित करने निकल थे है। तबी उसे अपनी अतीत के बारे मे पता चलता है। ४०० वर्श पहले, उदयगड सम्राज्य का महाराजा इन्दु के पिता था, और इन्दु उसकि पुत्रि युवा रानी मित्रा देवि था, और युवा रानी का अगरक्शक काल भेरव था जो इस ज्न्म मे हर्शा था। रगुवीर उदयगड सेना पति, रण देव बिल्ला था। युवारानी, काल भेरव से बहुत प्यार करती थी। मित्रा को पाने केलिये रण देव, उदयग्ड की शत्रु रज्य की राजा शेर खन (श्रि हरि रघुमुन्द्रि) से हथ मिला कर उदयग्ड पर अचानक हम्ला करते है। काम भेरव की वीर्ता को देख कर और रण देव की जाम को पह्चानते हुये शेर खन भेरव से दोस्ती करना चाह्ता है, लेकिन रण देव यह होने नहि देता। युद मे रण देव मित्रा को मारते है, इसलिये भेरव रण देव को मार डालता है। वर्तमन समय मे, हर्शा अपने दोस्त सालमोन (श्रि हरि रघुमुन्द्रि) की मदद से इन्दु को सारी सच्चाई बताता है और कैसे रघुवीर को हरा के यह दोनो अपने प्यार हासील्ल करते है कहानि।