वार्ता:भारत में बौद्ध धर्म का पतन

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बौद्ध धर्म के पतन व आतंरिक विरोध के कारण[संपादित करें]

भारत ही बौद्ध धर्म का जन्मदाता है भगवान गौतम बुद्ध क्षत्रिय वंश के राजा थे उनका हम समस्त भारतवासी सम्मान करते हैं परन्तु, वर्तमान मे एवं इस धर्म के उत्थान के समय से ही अन्य धर्म के मानने वालो पर हत्या करना व अत्याचार(इस्लामिक आक्रताओं की तरह)बहुत किया गया जिस वजह से भारत देश मे आज भी इनका पुरजोर विरोध होता है, भगवान बुद्ध ने मूर्ति पूजा का विरोध किया था, व बौद्ध धर्म मे संस्कृत के श्लोक हैं जोकि हिन्दू वैदिक ग्रंथों से ही लिए गए है, हिन्दू धर्म का ही एक अंग है बौद्ध धर्म, सिख धर्म, जैन धर्म, सब का जड़ एक ही है परन्तु अन्य धर्मो का तिरस्कार करना कहाँ बताया है भगवान गौतम बुद्ध ने जबकि आज के अनुयायी हिन्दू धर्म व उनके मुखिया ब्राम्हणों को गालियां देकर हिन्दू धर्म के खिलाफ दुष्प्रचार करते हैं, आज भी बौद्ध धर्म की लगभग सभी रीती रीवाज हिन्दू समाज की तरह ही है, परन्तु हमेशा हिन्दू समाज का विरोध ही इनके मुख्य उदद्देश्य हो चूका है, परन्तु हिन्दू समाज आज भी भगवान बुद्ध का सम्मान करता है और करता है वो इसीलिए की हिन्दू धर्म मे सर्व धर्म संभाव की संज्ञा दी जाती है सभी धर्मों का सम्मान किया जाता है, जबकि इसके विपरीत अन्य धर्म अपनी जनसंख्या को बढाकर भारत पर कब्जे की सोंच रखते हैं पर एकमात्र हिन्दू धर्म ही ऐसा है जिसने बहुसंख्यक होने पर भी सभी धर्मों को सम्मान किया पर बौद्ध धर्म का जन्म भारत मे हुआ और विश्व के जिन जिन देशों मे फैला आज वहां इस्लामिक शाशन है, जो भी धर्म दूसरे अन्य धर्म का विरोध करता है उस धर्म की हमेशा निंदा ही होती है, सनातन धर्म-ही,जैन धर्म(क्षत्रिय), बौद्ध धर्म(क्षत्रिय),सिख धर्म(राजपूत) का जनक है, और यही सर्वमान्य है जिसे झुठलाया नहीं जा सकता. Manish kumar pathak (वार्ता) 03:57, 8 जनवरी 2023 (UTC)उत्तर दें[उत्तर दें]