वार्ता:भगत सिंह

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Bhagat singh[संपादित करें]

भगतसिंह भारत देश का ऐसा क्रिन्तिकारी जवान था। जिसे मानो खुद भारत माता दे दर्शन दिया हो,और वो कह रही हो कि मैं गुलाम हु मुझे आजादी दिलाओ, Sonu kumar maharaj (वार्ता) 05:39, 1 दिसम्बर 2018 (UTC)

जलियावाला बाग़ हत्याकांड और भगत सिंह(bhagat singh) का प्रण[संपादित करें]

13 अप्रैल 1919 यह वह दिन था जब जलियांवाला बाग हत्याकांड हुआ था और इस दिन को भारत के इतिहास में काले अक्षरों में लिख दिया गया। क्योंकि इस दिन एक बहुत ही बड़ा नरसंहार अंग्रेजो की तरफ से भारतीयों का हुआ था। और यही वह दिन भी माना जाता है जब भारतीयों में देश को आजादी दिलाने के लिए कई आंदोलनों की शुरुआत हुई थी। उस समय जनरल डायर ने जलियांवाला बाग में जारी हो चुके आंदोलन को रोकने के लिए सेना को आदेश दिया था कि गोलियां चला दी जाए। और जब गोलियां चली तो रिकॉर्ड के अनुसार कहा जाता है कि 400 से अधिक लोगों की जान चली गई थी और 2000 से अधिक लोग घायल हो चुके थे। परंतु आधिकारिक तौर पर यह पुष्टि हुई थी कि उस नरसंहार में 1000 से ज्यादा आदमी मारा गया था और 2000 से अधिक घायल हो गए थे। दरअसल जनरल डायर ने गोलियां चलवाई थी तो सब आदमियों में और औरतों में भी गोलियां लगने लगी थी उसमें कई बच्चे भी थे पर उन्हें भी मारा गया था। जलियांवाला बाग में एक कुआं भी है वहां कहा जाता है की गोलियां चलता देख कई लोग उस कुए में जा गिरे थे और कुए के अंदर भी गोलियां मारी गई थी। आज भी उस कुएं में से कई रक्त के निशान और शरीर कुछ अवशेष भी कभी-कभी निकल आते हैं जो की हड्डियां हैं।


जब भगत सिंह(bhagat singh) को यह पता चला कि जलियांवाला बाग में गोलियां चलाई गई है और कई आदमियों को मार दिया गया है तो शहीद भगत सिंह पैदल ही अपने गांव से जलियांवाला बाग की ओर चले गए थे। जो तकरीबन 30 से 40 किलोमीटर उनके गांव से दूर था पर वह जोश जोश में वहां पर पैदल ही निकल गए। जब उन्होंने जाकर देखा कि अंग्रेजी सरकार ने इतने आदमियों का कत्लेआम कर दिया है तब उन्होंने पढ़ लिया कि वह अंग्रेजों को इस देश से भगा कर ही रहेंगे चाहे इसके लिए उन्हें कितने भी लोगों को मारना क्यों ना पड़े। और जलियावालाबाग से उन्होंने मिट्टी को खोदा जिसमें खून था और वे बोतल में भरकर उसे घर ले आए। वह कई समय तक अपने घर बैठे रहे उनकी बहन ने हमसे पूछा कि वह बोल क्यों नहीं रहे हैं तो उन्होंने कहा कि यह देखो इसमें मेरे भाइयों का खून है और मैं अब स्कूल की शपथ लेता हूं कि मैं इस देश को आजाद करा कर रहूंगा।http://www.historypedia.in/shaheed-bhagat-singh-bhagat-singh-history-biography-in-hindi/ http://www.historypedia.in/