वार्ता:पुलस्त्य

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कृपया इस लेख पर लगाये गये टैग का अर्थ समझायें[संपादित करें]

गौरव सूद जी ने इस लेख पर जो टैग लगाया है उसका क्या मतलब है? कृपया समझायें।--अनुनाद सिंह (वार्ता) 13:45, 10 जनवरी 2016 (UTC)

@अनुनाद सिंह: जी, मैं आपको इस टैग का अर्थ बताऊंगा। इस से पहले कृपया मेरे एक प्रश्न का उत्तर दीजिए। इस लेख में इस तरह के वाक्य प्रयोग किए गए हैं: "पुलस्त्य या पुलस्ति ब्रह्मा जी के दस मानस पुत्रों में से एक थे"। क्या ये बात सत्यापनीय है? हम कैसे जाँच सकते हैं कि ब्रह्मा और पुलस्त्य का अस्तित्व वास्तविकता में है या केवल हिन्दू धर्म ग्रंथों में? --गौरव सूद (वार्ता) 15:23, 10 जनवरी 2016 (UTC)
@अनुनाद सिंह: जी, कृपया संदेशों में मुझे टैग कीजिए। मुझे पता नहीं चलता है कि आपने मेरे लिए सन्देश छोड़ा है। --गौरव सूद (वार्ता) 15:28, 10 जनवरी 2016 (UTC)
@Gauravsood0289: जी, उपरोक्त कथन न स्थापनीय है, न स्थापनीय होने की आवशयकता है, न स्थापनीय होने का दावा किया गया है। एक बच्चा भी पढ़ेगा तो उसको यह समझने में कोई शंका नहीं होगी कि यह बात हिन्दू शास्त्रों और मिथकों के आधार पर कही गयी होगी। अब आप बताइये कि आप यहाँ क्या चाहते थे? जो टैग आपने लगाया है उस टैग का मतलब आप क्या समझते हैं?
@अनुनाद सिंह: जी, 1) तथ्यों और धार्मिक मान्यताओं में अंतर होता है। "पुलस्त्य ब्रह्मा के पुत्र थे", ये एक धार्मिक मान्यता है। "हिन्दू धर्म के अनुसार पुलस्त्य ब्रह्मा के पुत्र थे", ये एक तथ्य है। दोनों में बहुत बड़ा अंतर हैं। कृपया विकिपीडिया पर तथ्य ही डालिए, धार्मिक मान्यताएँ नहीं।
2) किसी बच्चे को समझने में शंका होगी या नहीं, ये आपकी निजी राय है। विकिपीडिया पर इसके आधार पर लेख नहीं बन सकते।
3) इस लेख पर लगे टैग का मतलब है कि a) लेख पूरी तरह धार्मिक मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों पर आधारित है। चूंकि इन ग्रंथों में लिखी हर बात सच होने का कोई प्रमाण नहीं है, इसलिए इन पर आँखें बंद करके विश्वास नहीं किया जा सकता। b) बहुत लोगों ने इन ग्रंथों का critical analysis किया है। अगर इन धार्मिक ग्रंथों से कोई बात ली जाती है, तो इन criticisms को भी सामने रखा जाए ताकि सभी दृष्टिकोण स्पष्ट हो जाएँ। --गौरव सूद (वार्ता) 11:04, 11 जनवरी 2016 (UTC)
@Gauravsood0289: गौरव सूद जी, बहुत अच्छी तरह आपने धार्मिक मान्यता और 'तथ्य' का सोदाहरण अन्तर समझाया है। वाह! वाह! अगर आपका टैग लगाने का यही कारण होता तो 'हिन्दू धर्म के अनुसार' - बस इतना आप भी जोड़ सकते थे। आपने नहीं जोड़ा और एक नया टैग खोजकर ले आये। निश्चित रूप से कारण कुछ और है। अगर आप समझते हैं कि टैग का जो मतलब आपने ऊपर लिखा है, वही है, यह टैग तो सभी लेखों पर लगाना पड़ेगा। आप जरा बताइये कि विकि का कौन सा लेख है जिसे आँख मूँदकर विश्वास किया जा सकता है। किसी ने किसी भी लेख के बारे में ऐसी गारंटी दी हो तो बतायें। यह भी बतायें कि आपने इस टैग की जहाँ से नकल की है वहाँ पर जो चर्चा हुई है, उसे आपने समझा है? क्या वह ऐसे ही लेखों के लिये है?
किसी बच्चे को शंका क्यों होगी, जरा बताइये? यह मेरी निजी राय क्यों है? उस आठ-दस वाक्यों वाले लेख में इतनी सामग्री अवश्य है कि किसी को समझ में आ जाय कि यह एक पौराणिक पात्र के बारे में बात की गयी है। यदि पौराणिक पात्रों को असली समझने का डर होता तो अनिवार्यतः ऐसे सभी लेखों में एक टैग लगाया जाता- 'इस लेख में लिखी बातों को सही न समझ लें, ये पौराणिक मान्यताएँ हैं'। लेकिन ऐसा नहीं किया गया है। लोगों के साधारण विवेक पर विकि को पूरा भरोसा है।
एक अन्तिम बात यह भी बताइये कि 'बहुत से लोगों ने इन ग्रन्थों का क्रिटिकल एनालिसिस किया है'- से आपका क्या अभिप्राय है? किसी एकाध एनालिसिस का उदाहरण दे सकते हैं? वह एनालिसिस पुलस्ति की ऐतिहासिकता के विषय में है, किसी ग्रन्थ की ऐतिहासिकता के विषय में है या कुछ और? यहाँ महाभारत का सन्दर्भ दिया गया है। आपके टैग में लिखे 'विश्वसनीय प्राथमिक एवं द्वितीयज स्रोत' में यह क्यों सही नहीं बैठता?
@अनुनाद सिंह: जी, अगर यह स्पष्ट कर दिया जाता है कि ये लेख एक पौराणिक पात्र के बारे में है जिसके वास्तविकता में होने या न होने का दावा विकिपीडिया नहीं करती है, तो मुझे लेख से कोई आपत्ति नहीं है। --गौरव सूद (वार्ता) 12:31, 11 जनवरी 2016 (UTC)
@Gauravsood0289: गौरव सूद जी, आप शायद चर्चा को अलग दिशा में ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। मूल बात आप के द्वारा लगाये गये टैग के सम्बन्ध में है। उसकी आवश्यकता, अनावश्यकता, गलत उपयोग, सही/गलत समझ के बारे में है। यह बतायें कि पौराणिक पात्रों से सम्बन्धित अन्य भाषा के लेखों में क्या कुछ अलग से लिखा गया है कि 'यह लेख एक पौराणिक पात्र के बारे में है।' ? कृपया मेरी पूर्वलिखित सभी जिज्ञासाओं का भी जबाब दें।--अनुनाद सिंह (वार्ता) 12:46, 11 जनवरी 2016 (UTC)
@अनुनाद सिंह: जी, 1) मुझे इस से उपयुक्त कोई टैग नहीं मिला, इसलिए मैंने ये लगाया। मैं इसे हटा देता हूँ।
2) मेरी मुख्य आपत्ति धार्मिक मान्यताओं को तथ्य की तरह प्रस्तूत करने से है। उदाहरण के लिए ये लेख बता रहा है कि विष्णु पुराण मानव जाति को कैसे प्राप्त हुआ। आप ही बताइए कि क्या यहाँ धार्मिक मान्यताओं को तथ्य की तरह प्रस्तूत नहीं किया जा रहा है? --गौरव सूद (वार्ता) 13:03, 11 जनवरी 2016 (UTC)
3) @अनुनाद सिंह: जी, मैं इस लेख की कुछ पंक्तियों को टैग कर देता हूँ। चर्चा उस पर केंद्रित करते हैं। --गौरव सूद (वार्ता) 13:16, 11 जनवरी 2016 (UTC)
@अनुनाद सिंह: जी, आप रोमिला थापर की ये पुस्तक दिखिए (आप किसी और इतिहासकार की पुस्तक भी चुन सकते हैं)। देखिए कि इसमें रामायण और महाभारत के बारे में किस लहजे में लिखा है। यह औपचारिक लहजा है। पुलस्त्य के विकिपीडिया लेख का लहजा ज्ञानकोशीय कम, और धार्मिक वेबसाइट की तरह ज्यादा लगता है। --गौरव सूद (वार्ता) 13:53, 11 जनवरी 2016 (UTC)
@Gauravsood0289: गौरब सूद जी, रोमिला थापर को बीच में मत लाइये। यह लेख 'इतिहास' नहीं है। आप भी जानते हैं। यहाँ आप के लगाये टैग की बात हो रही है। आपने कहा कि आप टैग हटा रहे हैं, वह अच्छा निर्णय है। उसे हटाकर यदि कुछ दूसरा टैग लगाना चाहते हैं तो शौक से लगाइये। लेकिन सही टैग लगाइये। और आवश्यक हो तो ही लगाइये। बस लगाने के लिये मत लगाइये।
(और इस तरह कहीं नहीं भेजा जाता कि 'ये पूरी किताब पढ़ लीजिये!!! कोई पन्ना हो, कोई लाइन हो तो उसे बताना चाहिये।) आपने इस टैग के मूल टैग की चर्चा को पढ़ा क्या?--अनुनाद सिंह (वार्ता) 14:03, 11 जनवरी 2016 (UTC)
@अनुनाद सिंह: जी, 1) आप उस किताब में "CTRL+F" करके "ramayana" खोज के कोई भी पंक्ति देख लीजिए। और उसका लहजा देख लीजिए।
2)इतिहासकार भी इसे इतिहास नहीं मानते। वो इसे इतिहास में लिखा fiction मानते हैं। इसीलिए उनके लिखने का लहजा अलग होता है। विकिपीडिया पर इसे इतिहास की तरह प्रस्तूत किया जा रहा है।
3) इस पात्र के अंग्रेज़ी लेख में भी मुझे बहुत समस्याएँ लग रही हैं। मैं पहले अंग्रेज़ी विकिपीडिया पर बात कर लेता हूँ, फिर यहाँ वापिस आऊंगा। --गौरव सूद (वार्ता) 14:28, 11 जनवरी 2016 (UTC)
कृपया टैग लगाने के लिये टैग न लगायें। यहाँ पर्याप्त सन्दर्भ दिये गये हैं। बहुत ही स्पष्ट है कि 'पुलस्ति' एक पौराणिक पात्र हैं। कई जगह महाभारत और विष्णुपुराण का भी उल्लेख आया है।--अनुनाद सिंह (वार्ता) 15:10, 14 जनवरी 2016 (UTC)
@अनुनाद सिंह: जी, मुझे लेख की सामग्री पर कोई आपत्ति नहीं है, केवल लहजे से आपत्ति है। मैं लेख में स्पष्ट कर देता हूँ कि ये केवल एक पौराणिक पात्र हैं, उस से ज्यादा कुछ नही। --गौरव सूद (वार्ता) 15:26, 14 जनवरी 2016 (UTC)
@अनुनाद सिंह: जी, आप एक बार WP:ASSERT देख लीजिए। फिर आपको समझ आ जाएगा कि मैं इस लेख के बारे में शिकायत क्यों कर रहा हूँ। --गौरव सूद (वार्ता) 15:32, 14 जनवरी 2016 (UTC)
@Gauravsood0289: गौरव सूद जी, आप कृपया ये पढ़ लीजिये, वो पढ़ लीजिये वाला लहजा बन्द कीजिये। ये सिद्ध हो चुका है (कम से कम चार बार) कि आप खुद अन्दर की बात पढ़ते नहीं और बस शीर्षक पढ़कर लोगों को वहाँ भेज देते हैं। इस लेख के लहजे में कोई कमी नहीं है। आपने जहाँ भेजा था उसका इससे कोई सम्बन्ध नहीं है।--अनुनाद सिंह (वार्ता) 04:13, 15 जनवरी 2016 (UTC)
@अनुनाद सिंह: जी, WP:ASSERT में साफ-साफ लिखा है: Assert facts, not opinions। इसमें उदाहरण भी दिए गए हैं कि opinions को किस तरह से लिखा जाना चाहिए। इस लेख में हिन्दू opinions को facts की तरह प्रस्तूत किया गया था, इसलिए मैंने आपको वहाँ भेजा था। आप अगर व्यक्तिगत टिप्पणियां न करें तो बेहतर होगा। --गौरव सूद (वार्ता) 11:49, 15 जनवरी 2016 (UTC)
@अनुनाद सिंह: जी, मैं इस लेख का लहजा ठीक करने की कोशिश कर रहा हूँ। अगर आपको मेरे सम्पादनों में कोई समस्या लगे, तो बताइएगा। --गौरव सूद (वार्ता) 11:53, 15 जनवरी 2016 (UTC)
@Gauravsood0289: गौरव जी, आपने केवल Assert facts, not opinions को पढ़ लिया, उसके आगे कुछ नहीं देखा। कृपया पहले देखिये/पढ़िये और तब भेजिये। यही मैं बार-बार निवेदन कर रहा हूँ। ये मत मानकर चलिये कि आपने एमाअईटी का नाम ले लिया है इसलिये पूरी किताब का रिफरेंस देने और 'कन्ट्रोल एफ' दबाकर खोजने का सुझाव लोग आँख मूंदकर मान लेंगे। क्या बता सकते हैं कि Assert facts, not opinions के अन्तर्गत कौन से दो वाक्य या कोई एक उदाहरण इस लेख पर सटीक बैठता है। --अनुनाद सिंह (वार्ता) 12:44, 15 जनवरी 2016 (UTC)
@अनुनाद सिंह: जी, नोट: मैंने इस लेख में कुछ सुधार किए हैं। चूंकि अनुनाद जी को इस लेख का पुराना अवतरण ज्यादा पसंद है, इसलिए मैं इस पुराने अवतरण में मौजूद समस्याएँ बता रहा हूँ। मुझे वर्तमान अवतरण में कम समस्याएँ लगती हैं।
नीचे दी गई दो पंक्तियाँ WP:ASSERT से ली गई हैं। इनको एक बार ध्यान से पढ़ लीजिए। मैं आपको समझाने की कोशिश करूँगा कि ये इस लेख पर कैसे लागु होती हैं:
1) When a statement is a fact (e.g. information that is accepted as true and about which there is no serious dispute), it should be asserted using Wikipedia's own voice without in-text attribution. Thus we write: "Mars is a planet" or "Plato was a philosopher"
2) When a statement is an opinion (e.g. a matter which is subject to serious dispute or commonly considered to be subjective), it should be attributed in the text to the person or group who holds the opinion. Thus we might write: "John Doe's baseball skills have been praised by baseball insiders such as Al Kaline and Joe Torre.[1]". We do not write: "John Doe is the best baseball player".
पुलस्त्य लेख की ये पंक्ति देखिए: "ये ऋषि उन लोगों में से एक हैं जिनके माध्यम से कुछ पुराण आदि मानवजाति को प्राप्त हुए। इन्होंने ब्रह्मा जी से विष्णु पुराण सुना था और उसे पराशर ऋषि को सुनाया, और इस तरह ये पुराण मानव जाति को प्राप्त हुआ।" विष्णु पुराण मानवों को ब्रह्मा से प्राप्त हुआ, ये हिन्दुओं का opinion है, तथ्य नहीं (क्योंकि it is subject to serious dispute. आप कैसे साबित करेंगे कि विष्णु पुराण और इसमें वर्णित देवी-देवताओं को इंसानों ने नहीं बनाया)। इसलिए इसे विकिपीडिया की voice में assert नहीं किया जा सकता। It should be attributed in the text to the person or group who holds the opinion. --गौरव सूद (वार्ता) 13:40, 15 जनवरी 2016 (UTC)
@Gauravsood0289: गौरव जी, यहाँ सबसे पहले पढ़िये, 'ऐण्ड देयर इज नो सेरिअस डिस्प्यूट' -- जहाँ तक पुलस्ति का प्रशन है कोई गम्भीर विवाद नहीं है। क्या आपको किसी विवाद की जानकारी है ऊपर लिखी बातों को किसी ने चुनौती दी हो; उनसे अलग मिथक (कथा) होने की बात कही हो। पुलस्ति के बारे में जो लिखा है उसके लगभग शत प्रतिशत हिन्दू मानते हैं, इसलिये वह एक मिथकीय तथ्य है। उसमें कोई विवाद नहीं है। इसके ऊपर, यहाँ पहले ही महाभारत का सन्दर्भ दिया हुआ है/था। एक नहीं दो-दो सन्दर्भ दिये हुए थे। अन्त में बता दूँ कि पुलस्ति के बारे में जो लिखा है वह किसी सम्पादक का 'मत/ओपिनिअन' नहीं है। और यह भी ध्यान रखिये, पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि यहाँ किसी ऐतिहासिक व्यक्ति के बारे में बात नहीं हो रही है। यहाँ एक पौराणिक पात्र के बारे में बात हो रही है। आपने जो ऊपर लिंक दिया है, और उसमें जो उदाहरण है, वह ऐतिहासिक व्यक्ति के बारे में है या किसी जीवित व्यक्ति के बारे में। अब आप ही बताइये आप जहाँ भेजे थे, और मेरा इतना सारा समय नष्ट किया, वह उदाहरण कैसे प्रासंगिक है?--अनुनाद सिंह (वार्ता) 14:38, 15 जनवरी 2016 (UTC)
@Gauravsood0289: गौरव जी, उदाहरण से अधिक प्रत्यक्ष कोई चीज नहीं है। अगर मैं कहूँ कि अंग्रेजी विकि पर ग्रीक मिथकीय पात्रों पर लेखों में अधिकांश जगह (मैने रैण्डम ५ लेख देखे) केवल 'ग्रीक माइथोलोजिक कैरेक्टर' लिख दिया है और उसके बाद पूरा मिथक कहते चले गये हैं, तो आप क्या कहेंगे? यह मत कहियेगा कि अंग्रेजी वाले गलती करेंगे तो हिन्दी वाले भी करेंगे क्या?--अनुनाद सिंह (वार्ता) 14:55, 15 जनवरी 2016 (UTC)
@अनुनाद सिंह: जी, मुझे इन लेखों के नाम बताइए। अगर इनमें मिथकों को तथ्यों की तरह प्रस्तूत किया जा रहा है, तो मैं अंग्रेज़ी विकिपीडिया पर इनके बारे में बात करूँगा। --गौरव सूद (वार्ता) 15:38, 15 जनवरी 2016 (UTC)
@Gauravsood0289: गौरव जी, आप ये मामला लेकर सत्यम मिश्र जी के पास पहुँचे थे, वहाँ भी सन्तूष्ट नहीं हैं और उलटे उनको समझाने में लगे हैं कि अनुनाद सिंह मान नहीं रहे हैं। वाह ! क्या वैज्ञानिकता है! मैं पूछता हूँ कि 'आप क्यों नहीं मान रहे है? भाई आप मान जायेंगे तो भी आपकी एमअईटी वाली छबि मेरे मस्तिष्क पर सदा बनी रहेगी। पहले बिना पढ़े टैग लगाया, उस पर आपको पूछा गया कि आपने उसकी चर्चा उस टैग के बारे में पढ़ा है या नहीं- तब जाकर उस टैग को हटाया। फिर नये टैग ढ़ूढ़ने लगे।
अब आइये असली बात पर। निम्नलिखित लेखों को पढ़िये- [ https://en.wikipedia.org/wiki/Aepytus], [1], [2], [3], [4], [5] ....।--अनुनाद सिंह (वार्ता) 08:57, 16 जनवरी 2016 (UTC)
@अनुनाद सिंह: जी, चर्चा का विषय पुलस्त्य है, आपके मस्तिष्क में मेरी छवि नहीं। मैं आप से एक बार फिर निवेदन कर रहा हूँ कि ऐसी बातें न कीजिए। --गौरव सूद (वार्ता) 11:02, 16 जनवरी 2016 (UTC)
@अनुनाद सिंह: जी, आपने "मिथकीय तथ्य" term प्रयोग की है। क्या इसे आपके इलावा भी कोई प्रयोग करता है?
2) अन्य धर्मों के लोग हिन्दू-देवी देवताओं के अस्तित्व और हिन्दू ग्रंथों की factual accuracy पर संदेह करते हैं, और atheist सभी धर्मों के देवी-देवताओं और धार्मिक ग्रंथों पर। इसलिए आपका कहना कि कोई विवाद नहीं है, गलत है। --गौरव सूद (वार्ता) 08:11, 16 जनवरी 2016 (UTC)
@Gauravsood0289: गौरव जी, फिर आप वहीं घुमा रहे हैं। दूसरे धर्मों के लोग अन्य धर्मों के मिथकों पर सन्देह करते हैं और नास्तिक सभी पर सन्देह करते हैं, यह बात तो कब की समाप्त हो चुकी है। यह बात ऐतिहासिकता की है। यहाँ ऐतिहासिकता का तो कोई दावा ही नहीं है। बहुत पहले स्पष्ट किया जा चुका है। यहाँ 'विवाद' से मतलब खुद मिथकों में विवाद, अलग-अलग कथायें होने से है। जैसे कोई कहे कि पुलस्ति ब्रह्मा के मानस पुत्र थे, कोई कहे वे शंकर के मानस पुत्र थे, कोई कहे वे हनुमान के अवतार थे, आदि आदि।- इस तरह के विवाद होते तो उन सभी अलग-अलग कथाओं और उनके स्रोतों का उल्लेख अवश्य किया जाना चाहिये । 'कर्म' शब्द को लीजिये। वहाँ कोई कह सकता है कि कर्म-सर्म को मैं नहीं मानता सब बकवास है। ऐसा मानने वाले हैं तो अपनी बला से। 'कर्म' पर लेख अवश्य लिखा जायेगा। हाँ, वहाँ 'कर्म' की कई परिभाषायें या संकल्पनाये हैं। हिन्दुओं में ही अलग-अलग चिन्तकों (दार्शनिकों) के अलग-अलग मत हैं। उसके ऊपर जैन, बौद्ध आदि के मत भी अलग हैं। इसलिये जब कर्म पर लेख लिखा जायेगा तो वहाँ या तो अलग से कर्म(जैन धर्म), कर्म (बौद्ध धर्म), कर्म (हिन्दू धर्म) बनाया जा सकता है या एक ही लेख में सभी विचारों/दर्शनों का उल्लेख किया जाना चाहिये। हो सके तो उनके विचारों में अन्तर के लिये सारणी बनायी जा सकती है (यदि अन्तर नगण्य न हों)। इसको विवाद कहा जाता है। इन लेखों में यह वाक्य जोड़ने की बिलकुल आवश्यकता नहीं है कि कुछ लोग 'कर्म' के सिद्धान्त को नहीं मानते। (आज की तारीख में यह 'कॉमन सेंस' है ; 'अन्डर्स्टुड' है। अरस्तू को भी सब लोग दार्शनिक नहीं मानते। किन्तु कहीं नहीं लिखा है कि 'कुछ लोग अरस्तू को दार्शनिक नहीं मानते'।) --अनुनाद सिंह (वार्ता) 08:57, 16 जनवरी 2016 (UTC)

हर बड़ी में नमक नहीं डाला जाता[संपादित करें]

@Gauravsood0289: गौरव सूद जी, आपके सम्पादन से लेख खराब हो गया है। दस वाक्यों वाले इस लेख में पन्द्रह बार मिथक, हिन्दू ग्रन्थों के अनुसार, पौराणिक, महाभारत, विष्णुपुराण, तुलसीदास आया है। इसी सन्दर्भ में कहते हैं कि 'हर बड़ी में नमक नहीं डाला जाता'। पहले ही वाक्य में मिथक शब्द आ जाने से ८०% काम वैसे ही बन गया था। (मैने ऊपर भी यही कहा है।) कुछ सन्दर्भ पहले से थे ही। इसमें अलग से बार-बार नमक क्यों डाल रहे हैं? ज्यादा नमक अधिक हानिकर है!!!! --अनुनाद सिंह (वार्ता) 12:56, 15 जनवरी 2016 (UTC)

@अनुनाद सिंह: जी, मैं नहीं कह रहा कि आप हर जगह "हिन्दू मिथक के अनुसार" phrase प्रयोग करें। आप इस तरह के phrases प्रयोग कर सकते हैं: "महाभारत के अनुसार", "रामायण के अध्याय में लिखा है कि", आदि। --गौरव सूद (वार्ता) 13:50, 15 जनवरी 2016 (UTC)

@Gauravsood0289: गौरव सूद जी, कहने में और करने में बहुत अन्तर है। इतना निवेदन करने के बाद, आप दो लेख नहीं लिख सकते, और शैली सिखा रहे हैं। क्रमविकास वाले लेख का पहला वाक्य इतना जल्दी भूल गये? पाँच-दस लेख लिखिये, और वह भी अच्छे वैज्ञानिक विषय पर। हमे अपने आप समझ आ जायेगा कि आप जो कह रहे हैं उसमें दम है। --अनुनाद सिंह (वार्ता) 14:46, 15 जनवरी 2016 (UTC)

@अनुनाद सिंह: जी, चर्चा पुलस्त्य लेख पर हो रही है, कृपया उसी के बारे में बात कीजिए। मैं किस विषय पर काम करूँ और किस पर नहीं, उसका फैसला मैं खुद करूँगा। --गौरव सूद (वार्ता) 15:10, 15 जनवरी 2016 (UTC)
@Gauravsood0289: गौरव सूद जी, आप क्रोधित हो गये। मेरे कहने का मतलब यह था कि आपकी बतायी शैली के अनुकरण का कोई कारण नहीं है। प्रेमचन्द की 'बड़े भाई साहब' कहानी तो आपने पढ़ी होगी। बडे भाई साहब हर बार परीक्षा में फेल हो जाते थे या खींचखांचकर पास होते थे। छोटा भाई पढ़ने में बहुत तेज था। किन्तु उसको शिक्षा देते रहते थे कि ऐसे पढ़ना चाहिये, वैसे....।--अनुनाद सिंह (वार्ता) 15:21, 15 जनवरी 2016 (UTC)
@अनुनाद सिंह: जी, बड़े भाई वाली आपकी कहानी एक ad hominem attack है। ऐसे attacks आप विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/देवनागरी की वैज्ञानिकता पर भी कर रहे थे, पर मैंने आपको कुछ नहीं कहा। ये debate का अच्छा तरीका नहीं है। कृपया ऐसा न कीजिए। --गौरव सूद (वार्ता) 15:34, 15 जनवरी 2016 (UTC)
@Gauravsood0289: गौरव सूद जी, आप भी तो विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/देवनागरी की वैज्ञानिकता पर चर्चा में गलत जगह पर भेज रहे थे और इस चर्चा में भी आप (टैग को बिना समझे) हमको ही पढ़ने के लिये बार-बार भेज रहे थे। और सबसे हिट तो यह कि शैली सीखने के लिये किसी इतिहासकार की पूरी किताब को पढ़ने के लिये भेज दिया। कृपया इस पर भी प्रकाश डालें कि इस तरह घुमाना ठीक है या नहीं?--अनुनाद सिंह (वार्ता) 13:18, 16 जनवरी 2016 (UTC)
@अनुनाद सिंह: जी, मैं इसका जवाब अपने बारे में अन्य संपादकों की राय जानने के बाद दूँगा। --गौरव सूद (वार्ता) 13:36, 16 जनवरी 2016 (UTC)

अंग्रेज़ी विकिपीडिया पर मिथक सम्बन्धी लेखों का लहजा[संपादित करें]

@अनुनाद सिंह: जी, Greek mythology की बात अलग है। इस पर अब कोई विश्वास नहीं करता है। लोग इसे हैरी पॉटर की कहानियों की तरह पढ़ते हैं। इस पर विकिपीडिया लेख पढ़ते समय कोई नहीं समझेगा कि विकिपीडिया उसके सच होने का दावा कर रही है। पर यदि हिन्दू मिथक का लेख यह स्पष्ट नहीं करता, तो पाठक समझ सकता है कि विकिपीडिया उसके सच होने का दावा कर रही है। इसलिए हमें Christian mythology पर बने लेखों से तुलना करनी चाहिए। इसलिए Noah पर लेख देखिए। इसमें मिथक को "Biblical account" नामक एक अलग अनुभाग में डाला गया है। इस से स्पष्ट हो जाता है कि जो भी लिखा है वो "biblical account" है, कोई तथ्य नहीं। मैं अगली टिप्पणी दूसरे सदस्यों की राय जानने के बाद ही करूँगा। --गौरव सूद (वार्ता) 11:03, 16 जनवरी 2016 (UTC)

@Gauravsood0289: गौरव जी, 'विश्वास करते हैं' का क्या मतलब है- ये पहले समझाइये। अभी तक आप यह कह रहे थे कि मिथ को मिथ की तरह लिखा जाना चाहिये, इतिहास की तरह नहीं। अब अचानक १८० डिग्री का टर्न क्यों? कहाँ प्रमाण है कि ग्रीक मिथकों पर लोग विश्वास नहीं करते और क्रिश्चियन मिथकों पर लोग विश्वास करते हैं। सत्यम् जी जब चाहे इस चर्चा में भाग लें। किन्तु आप जवाब दीजिये। आपका यह वर्गीकरण तो 'गुड टेरर' और 'बैड टेरर' जैसा है।--अनुनाद सिंह (वार्ता) 11:38, 16 जनवरी 2016 (UTC)
@अनुनाद सिंह: जी, अगर आप मेरे कथन को अपने हिसाब से interpret करें, तो मैं कुछ नहीं कर सकता। मैं बाकि सदस्यों से जानना चाहूँगा कि वे मेरे कथन से क्या समझते हैं। --गौरव सूद (वार्ता) 12:02, 16 जनवरी 2016 (UTC)
@Gauravsood0289: गौरव जी, कहाँ लिखा है कि ग्रीक मिथकों की शैली अलग रहेगी और हिन्दू मिथकों की अलग? कोई लिंक हो तो दीजिये। पूरी किताब की लिंक भी चलेगी। बौद्ध, जैन, इस्लामी मिथकों के लिखे जाने के बारे में आपकी क्या राय है? --अनुनाद सिंह (वार्ता) 12:45, 16 जनवरी 2016 (UTC)
@अनुनाद सिंह: जी, बौद्ध, जैन, इस्लामी धर्म सम्बन्धी लेखों में भी तथ्य और मिथक के बीच अंतर स्पष्ट करना जरुरी है। --गौरव सूद (वार्ता) 12:50, 16 जनवरी 2016 (UTC)
@Gauravsood0289: गौरव जी, लेकिन इसका (ग्रीक और गैर-ग्रीक में अन्तर करने का) कुछ 'वैज्ञानिक कारण' बताइये ना। या, कहीं विकि पर लिखा हो तो वहाँ भेजिये। --अनुनाद सिंह (वार्ता) 13:08, 16 जनवरी 2016 (UTC)
@अनुनाद सिंह: 1) जहाँ confusion की सम्भावना ज्यादा होती है, वहाँ स्पष्ट करना भी ज्यादा जरुरी होता है। चूँकि ग्रीक धर्म के अब शायद ही कोई अनुयायी हैं (वो एक dead religion है), इसलिए confusion की सम्भावना कम है। मैं तो ग्रीक धर्म सम्बन्धी लेखों में भी सब स्पष्ट करने का समर्थन करता हूँ।
2) मैं कह रहा था कि जब अंग्रेज़ी विकिपीडिया (जिसके अधिकतम संपादक पश्चिमी देशों के ईसाई हैं) ईसाई धर्म के बारे में स्पष्ट कर देती है कि क्या मिथक है और क्या नहीं, तो हमें ऐसा करने में क्या समस्या है। --गौरव सूद (वार्ता) 13:31, 16 जनवरी 2016 (UTC)
@Gauravsood0289: गौरव जी, यह तो मुझे बहुत 'अवैज्ञानिक' तर्क लग रहा है। ग्रीक धर्म के अनुयायी कम हैं तब तो संकट और भी गहरा है। ग्रीक धर्म के अनुयायी बहुत कम हैं तो इसको अधिक स्पष्ट करने की जरूरत है, नहीं तो गैर-अनुयायी तो पूरा भ्रमित हो जायेंगे। हिन्दू मिथकों के लिखते समय यदि एक वाक्य में दो बार स्रोत का उल्लेख करना जरीरी है, तो इसमें पाँच बार तो होना ही चाहिये।--अनुनाद सिंह (वार्ता) 13:56, 16 जनवरी 2016 (UTC)
@सत्यम् मिश्र: जी, इसके बारे में आपकी क्या राय है? --गौरव सूद (वार्ता) 11:23, 16 जनवरी 2016 (UTC)

दूसरे सदस्यों की राय जाननी चाहिए[संपादित करें]

@अनुनाद सिंह: जी, हम दोनों अपने तर्क दे चुके हैं। मुझे नहीं लगता कि हम दोनों में से कोई भी दूसरे की बात मानेगा। मैं इस वार्ता के बारे में दूसरे सदस्यों की राय जानना चाहता हूँ। इसलिए सत्यम जी के सुझाव के अनुसार मैंने चौपाल पर एक सन्देश छोड़ा है। मैं अगली टिप्पणी दूसरे सदस्यों की राय जानने के बाद ही करूँगा। --गौरव सूद (वार्ता) 11:04, 16 जनवरी 2016 (UTC)