वार्ता:जमानत

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स्क्रीनशॉट[संपादित करें]

कॉपिराइट उल्लंधन का स्क्रीनशॉट: http://postimg.org/image/723agkijb/ --मुज़म्मिल (वार्ता) 16:18, 15 अक्टूबर 2015 (UTC)

शीघ्र हटाने पर चर्चा[संपादित करें]

इस लेख को कॉपीराइट उल्लंघन होने के कारण नहीं हटाया जाना चाहिये क्योंकि...

  1. - वैबसाइट पर कॉपीराइट संबंधित नोटिस नहीं है। ब्लॉगस्पॉट की वरीयताओं में यह सुविधा दी जाती है कि आप अपने ब्लॉग पर कॉपीराइट नोटिस दिखाना चाहते हैं या नहीं। ऐसे में हटाने में 'शीघ्रता' से बचा जा सकता है, तथा लेख में सुधार की संभावना पर चर्चा की जा सकती है।
  2. - उसी ब्लॉग पर साफ वर्णित है कि लेखक सामग्री की सत्यापनीयता की कोई गारंटी नहीं लेते हैं। इसी कारण से यहाँ भी इस सामग्री पर प्रश्नचिन्ह लगाया जा सकता है- सत्यापन योग्य स्रोत उपलब्ध ना होना। अतः स्रोतहीन टैग लगाना आवश्यक है। --मनोज खुराना 06:08, 16 अक्टूबर 2015 (UTC)


मनोज जी, जहाँ तक मैं जानता हूँ, "स्रोतहीन" उन लेखों को कहा जाता है जिनके स्रोत हमें मालूम नहीं। यहाँ तो यह स्थिति नहीं है।

इस लेख के copy-paste-कर्ता से जब मैंने केवल सामन्य प्रश्न पूछे या बिन्ती की तो बौखलाहट में मुझ पर व्यक्तिगत हमला किया गया और धमकी दी गई:

मुजम्मिल जी, मुझे पता है कि आजकल आप महानकारात्मकता से ग्रस्त हैं।(उसका कारण भी है) आपसे मैं निवेदन करूँगा कि हिन्दी विकि पर कुछ योगदान कीजिये। आपने हिन्दी के नाम पर बहुत मजा किया है, कुछ तो हिन्दी को दीजिये। मेरे इस उत्तर से यदि आप सन्तुष्ट न हों तो आपके सुझाव पर भी चर्चा कर लेंगे। किन्तु फिर यह मत रोइयेगा कि मैं आपके पीछे पड़ा रहता हूँ।--अनुनाद सिंह (वार्ता) 13:28, 15 अक्टूबर 2015 (UTC)

इससे पता चलता है कि कई और copyright उल्लंधन और copy-paste के मामले हैं जिनमें यह सदस्य शामिल हैं और इसी कारण मुझे चुप कराने और चर्चा को दूसरी दिशा मे ले जाने के प्रयास किए जा रहे हैं। --मुज़म्मिल (वार्ता) 06:14, 17 अक्टूबर 2015 (UTC)

मुजम्मिल जी, मुझे नहीं पता था कि आप मेरे सुझाव को अन्यथा ले लेंगे। मैं यह भी नहीं चाहता था कि चार लाइन को बचाने के लिये चार पृष्ट की व्याख्या लिखूँ। मैं आपसे कुछ और जानना चाहता हूँ जिससे पता चले कि आप 'झोला छाप वकील' नहीं हैं।
(क) क्या आप बता सकते हैं (मात्रात्मक रूप में) कि मैने उक्त स्रोत को कॉपी करने के बाद कितना बदला है?
(ख) किसी कानूनी दस्तावेज (जैसे, किसी कानूनी शब्द की परिभाषा) को कितना बदला जा सकता है?
(ग) क्या आपको पता है कि कानूनी दस्तावेजों में एक अर्धविराम के हेर-फेर बहुत बड़ा बदलाव (अर्थ का अनर्थ) हो सकता है?
(घ) ऐसे में मेरे द्वारा किये गये बदलाव पर्याप्त क्यों नहीं हैं? (विकिपीडिया कॉपी-पेस्ट की वकालत करता है किन्तु केवल यह जोड़ता है कि 'आवश्यक' परिवर्तन करके पेस्ट किया जाय। मेरी दलील है कि मैने इसमें उतने परिवर्तन किये हैं जितने से अधिक करने पर अर्थ का अनर्थ होने की सम्भावना बहुत प्रबल हो जायेगी।)
मुझे लगता है कि आपने इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि सन्दर्भित सामग्री 'कानूनी परिभाषा' है (हो सकता है कि आपको पता ही न हो) और इसे कॉपीराइट उल्लंघन का 'महान उदाहरण' बता दिया। 'न्यूटन की गति के नियम' अन्तर्जाल पर एक ही शब्दों में कितनी जगह मिलेंगे, क्या वे सब कॉपीराइट उल्लंघन के मामले हैं? भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता (सी आर पी सी) एक सार्वजनिक दस्तावेज है। मैं उसके किसी अंश को ज्यों का त्यों नेट पर लिख दूँ तो क्या उस पर मेरा कॉपीराइट हो जायेगा? क्या उसे कॉपी करना अपराध होगा?--अनुनाद सिंह (वार्ता) 07:13, 17 अक्टूबर 2015 (UTC)

अनुनाद जी, मुझे फिर से बुरा-भला कहने के लिए धन्यवाद। आपके प्रश्नों के उत्तर यहाँ के प्रबँधक दे सकते हैं। मैं आपसे उलझना या आपको और गाली-गलोच का अवसर प्रदान नहीं चाहता। --मुज़म्मिल (वार्ता) 09:24, 17 अक्टूबर 2015 (UTC)

एवमस्तु ! --अनुनाद सिंह (वार्ता) 11:56, 17 अक्टूबर 2015 (UTC)


@Hindustanilanguage और अनुनाद सिंह: - मुज़म्मिल जी, अनुनाद जी आप दोनों ही वरिष्ठ सदस्य हैं, मुझसे पुराने सदस्य हैं। ऊपर की आपकी वार्ता में कौन कौन कहाँ कहाँ कितना कितना सही/गलत है आप स्वयं भी समझ ही रहे होंगे। मुझे नहीं लगता कि मुझे या किसी प्रबंधक को किसी का कोई पक्ष लेने या विरोध करने की आवश्यकता है। बात को व्यक्तियों पर ले जाने का मैं कतई समर्थन नहीं करता इस मामले में आप दोनों से अपनी आपत्ति दर्ज कराना चाहूँगा और दोनों से संयम बरतने की प्रार्थना करूँगा। काम पर बात की जानी चाहिए।

मुज़म्मिल जी, जहाँ तक आपने स्रोतहीन वाली बात लिखी है, उस पर मेरा स्पष्टीकरण यह है कि क्योंकि उक्त लेख/ब्लॉग कोई मनगढ़ंत विचार, रिसर्च या कन्क्लूजन आदि नहीं दे रहा है बल्कि तथ्यपरक बातें लिखी हैं जो कि कानूनी भाषा लग रही है। इससे लगता है कि इस ब्लॉग का भी स्रोत कुछ और है। अतः यहाँ उस कानून का स्रोतरूप में संदर्भ देना चाहिए। इसीलिए इसपर स्रोतहीन टैग लगाने की और सुधार की संभावना पर चर्चा की बात मैंने कही। --मनोज खुराना 12:48, 17 अक्टूबर 2015 (UTC)

@Hindustanilanguage, अनुनाद सिंह, और Manojkhurana: जी,

जहां तक मेरी जानकारी है, कॉपीराइट किसी लेखक या निर्माता को साहित्‍यिक, नाटकीय या कलात्‍मक कार्य के साथ-साथ प्रामाणिक बयानों की पर्याप्त धारणा, कानून की व्याख्या आदि के लिए दिया जाना वाला कानूनी अधिकार होता है और इसकी हूबहू नकल कॉपीराइट उलंघन माना जाता है, किन्तु भाषा और कानून की शैली के साथ-साथ वैज्ञानिक नियम कॉपीराइट के दायरे से बाहर होते है। कानूनी अथवा वैज्ञानिक परिभाषाओं को परिवर्तित करके नहीं लिखा जा सकता। ऐसे में मुझे अनुनाद जी के विचार ज्यादा प्रासंगिक दिखते हैं। बाकी आप सभी मुझसे ज्यादा विचारशील हैं, फिर भी मेरे विचार से इसपर स्रोतहीन टैग लगाया जा सकता है।--माला चौबेवार्ता 07:35, 21 अक्टूबर 2015 (UTC)

माला जी, आपने विचार प्रकट करने के लिए धन्यवाद। --मुज़म्मिल (वार्ता) 07:58, 21 अक्टूबर 2015 (UTC)