वार्ता:आसफ़ुद्दौला

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छवि दीर्घा[संपादित करें]

सुझाया गया है कि छवि दीर्घा में ४ + ४ तस्वीरें रखी जाएँ और एक कहीं और सरका दी जाए। प्रथम इमामबाड़े का चित्र वास्तु शीर्षक के दाएँ ओर डाला जा सकता है। कोई और सुझाव हों तो यहाँ लिखें, कोई भी सदस्य ये बदलाव कर सकता है और सुझाव भी दे सकता है। «आलोक» (, ) ⌛ ०४:२०, २४ सितंबर २००९ (UTC)

हां, ये सुझाव मैंने ही दिया था। चित्र दीर्घा सामान्यतया चार चित्रों को एक लाइन में लगाने हेतु बनायी गयी होती है (डीफॉल्ट में)। तब यदि हम चित्र चार के गुणकों में ही लगा पायें तो बेहतर होता है। यहां इस लेख में नौंवां चित्र अलग थलग लगा है, और वास्तु शूर्षक में कोई चित्र भी नहीं है। तो बेहतर होगा कि इमामबाड़े का चित्र हटा कर दीर्घा में मात्र ८ चित्र छोड़ें, व उस चित्र को वास्तु शीर्षक में लगाया जाये। किंतु ये सब मैं आलोक जी की वार्ता पर पहले ही बता चुका हूं। मेरे विचार से यदि वो इस चर्चा को यहां लगाना चाहते हैं, तो मेरा वार्ता अंश भी लगाया जा सकता था। बजाय इसके कि मैं पुरी बात दोबारा यहां दोहराऊं।--आशीष भटनागर  वार्ता  ०४:२७, २४ सितंबर २००९ (UTC)
मेरा वार्ता अंश
जी हाँ बिल्कुल। मैंने आपकी वार्ता की कड़ी लगाई थी पर शायद परंपरा कटचिप्पी करने की है तो आगे वैसा ही करूँगा।
«आलोक» (, ) ⌛ ०४:३४, २४ सितंबर २००९ (UTC)
ऐसी कोई परंपरा नहीं है, ये तो बस प्रक्रिया सरल करने का तरीका मात्र है। इसके लिए कोई नियम लिखित नहीं है, बस सरलता ही कुंजी और उद्देश्य है।--आशीष भटनागर  वार्ता  ०४:४१, २४ सितंबर २००९ (UTC)
बहरहाल यह बदलाव कर दिया है। खुशी की बात है कि लेख वार्ता पन्नों का अच्छा इस्तेमाल हो रहा है। «आलोक» (, ) ⌛ ०४:४५, २४ सितंबर २००९ (UTC)