वार्ता:अन्तर्राष्ट्रीय इकाई प्रणाली

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

यह पृष्ठ अन्तर्राष्ट्रीय इकाई प्रणाली लेख के सुधार पर चर्चा करने के लिए वार्ता पन्ना है। यदि आप अपने संदेश पर जल्दी सबका ध्यान चाहते हैं, तो यहाँ संदेश लिखने के बाद चौपाल पर भी सूचना छोड़ दें।

लेखन संबंधी नीतियाँ

लेख को सुधारने के लिए सुझाव[संपादित करें]

आशीषजी ने एक गूढ़ विषय पर तकनीकी लेख बनाया है, इसके लिए इनको बधाई। लेख को बेहतर बनाने के लिए मेरे सुझाव नीचे हैं-

  1. लेख के आरम्भ में प्रस्तावना शीर्षक देने की आवश्यकता नहीं है, यह स्वतः ज्ञात होता है कि अनुक्रमणिका के पहले का भाग भूमिका है।
  2. प्रस्तावना/ भूमिका में लेख का सार होना चाहिये। विस्तृत जानकारी मुख्य लेख में ही होनी चाहिए। ये वाक्य "इसमें SI इकाइयों पर आधारित, व्युत्पन्न इकाइयों के बीच अन्तर्संबंध का आरेख चित्र भी सम्मिलित है। मूल इकाइयों की परिभाषाए भी इस स्थल पर मिलेंगी।" भूमिका में नहीं, लेख के बीच में कहीं होने चाहिएँ।
  3. अंतर्राष्ट्रीय समझौतों से बदलाव होते हैं, यह भूमिका में दो बार लिखा गया है।
  4. अन्य जानकारी जो भूमिका में जोड़ी जा सकती है- इस प्रणाली में सात मूल इकाइयाँ (इकाइयों के नाम) और अन्य कई व्युत्पन्न इकाइयाँ हैं। कुछ वैज्ञानिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में एस आई प्रणाली के साथ अन्य इकाइयाँ भी प्रयोग में लाई जाती हैं। एस आई उपसर्गों के माध्यम से बहुत छोटी और बहुत बड़ी मात्राओं को व्यक्त करने में सरलता होती है।
  5. मेरा सुझाव है कि रोमन SI की जगह नागरी एस आई का प्रयोग किया जाए पूरे लेख में। इसी तरह BIPM, CGPM जैसे संक्षेप शब्दों को भी नागरी में लिखा जाए (पहली बार जहाँ इनका वर्णन हो, वहाँ साथ में रोमन लिपि में भी लिखा जाए)।
  6. इकाइयों का कार्यान्वयन किस तरह से उनकी परिभाषा से भिन्न है, यह कुछ समझ में नहीं आ रहा। इसको उदाहरण के साथ समझाया जाए तो बेहतर रहेगा। साथ ही यह भाग लेख के प्रारम्भ में कुछ अटपटा लग रहा है। इसे इकाइयाँ भाग के बाद रखा जाना चाहिए मेरे विचार में।
  7. इतिहास में कुछ विकिकड़ियाँ अंग्रेजी विकिपीडिया से जुड़ी हैं, जो उचित नहीं है। बेहतर होगा कि हिन्दी विकिपीडिया पर इनके लेख बनाकर उन्हें जोड़ा जाए।
  8. इम्पीरियम प्रणाली और अमरीकी प्रणाली का नाम तो आया है, पर ये क्या हैं यह लेख में कहीं नहीं है।
  9. इकाई अंतरण के कारक भी उदाहरण के साथ समझाए जाएँ तो बात बने।
  10. इतिहास में भारत में इस प्रणाली का प्रयोग कब शुरु हुआ इस बारे में भी कुछ जानकारी होनी चाहिए। जहाँ तक मेरा ख्याल है 1960 के दशक में जब इस प्रणाली को भारत में अपनाया गया तो साथ ही पैसा-आना-रुपया प्रणाली को हटाकर नया पैसा-रुपया प्रणाली भी अपनाई गई।
  11. इसके अलावा वर्तनी और व्याकरण की कुछ छुटपुट गलतियाँ हैं, जिन्हें मैं ठीक करने का प्रयास करूंगा। (जैसे पूर्ण विराम के पहले रिक्त स्थान नहीं होना चाहिए।)

ये सुधार होने पर लेख निश्चित रूप से निर्वाचित होने की स्थिति में होगा। -- दाढ़ीकेश १७:४०, २० जून २००८ (UTC)

सुधार:- परिणाम और कारण[संपादित करें]

मैंने इस लेख हेतु राय आज पढ़ी, जिसे पढ़कर कई सुधार किये भी। वे सुधार और जो असहमति है, वह इस प्रकार है:

  1. लेख, खास कर जो लम्बे लेख होते हैं, उनका प्रस्तावना भाग, यदि बार बार सम्पादित करना हो, (जब तक लेख किसी उचित कगार पर ना पहुंचे, कि बार बार बदलाव करने हों)तो पूरा लेख सम्पादन के लिये खुलता है, ना कि किसी अनुभाग के सम्पादन जैसे, कि जब केवल वही अनुभाग खुलता है। तो पूरे लेख के खुलने पर, जब हमें सम्पादन करना हो तो, उसमें काफ़ी देर लगती है,।
    1. वहीं, यदि आप उसकी भूमिका को भी कोई शीर्षक दे दें; तो वह भी एक अनुभाग के समान ही छोटा सा खुलेगा, काफ़ी कम समय सम्पादन में लगेगा। हां बाद में, जब आप आवश्यक समझें, कि अब लेख किसी अच्छे स्तर पर पहुंच गया है, और अब बारम्बार सम्पादन आवश्यक नहीं (कम से कम भूमिका का) तब उस शीर्षक को हटा सकते हैं।
    2. यह सुझाव मैंने इस समस्या के साथ पूर्णिमा जी को भी बताया था। उन्हें ठीक भी लगा। बशर्ते कि बाद में हटाने वाला अंक भी पूरा हो।
  2. भूमिका का वह अंश असल में सन्दरभ का अंश था, जो कि ref से बाहर आ गया था.उसे ठीक कर दिया है.
  3. अन्तर्राष्ट्रीय समझौते वाला दोबारा अंश काट दिया है.
  4. यह वाक्य सम्मिलित कर दिया गया है.
  5. रोमन के स्थान पर देवनागरी का प्रयोग अति सुन्दर लगेगा, इसमें कोई शक नहीं है, परन्तु
    1. मैंने इसे कर के देखा, एक तो यह अतीव लम्बा होगा, जिसका रिपिटीशन अटपटा व कठिन लगेगा, क्योंकि हम किसी भी लिखित शब्द को पूर्ण ना पढकर, केवल आरम्भिक और अन्त का भाग देखकर बाकी अन्दाजा़ लगाकर (वाक्य के सन्दर्भ से) शब्द रचना अपने दिमाग में कर लेते हैं. (यह एक वैज्ञानिक तथ्य है). और यदि शब्द ना सुना हुआ हो, जैसे कि रोमन को हिन्दी में लिखा हुआ, तो खटकेगा ही, पढ़ने में बधा करेगा, और उसका बार बार आना, इस दिक्कत को बढ़ायेगा. बाकी आप इस कारण के प्रकाश में कुछ लोग जैसी सम्मिलित राय बनायें, वैसा कर दूं. (उपरोक्त तथ्य को चाहें तो वेरिफ़ाई कर लें, जिस बारे में मेरे पास एक मेल भी है, यदि मिली तो अवश्य दिखाऊंगा)
  6. इकाइयों का कार्यान्वयन, अंग्रेज़ी लेख में भी इस ही स्थान पर है अतएव .....
    1. इसकी अंग्रेज़ी लेख की परिभाषा का अनुवाद करके कृपया मेरी औ अंततः विकि की मदद करें. मुझसे यही अनुवाद बना.
  7. अंग्रेज़ी की कड़ियां बनाने का कारण था, कि कुछ लेख, जिनपर पूर्ण लख बनाना उस समय उचित नहीं लगा (समय कम होने/अमहत्वपूर्ण लगने, इत्यादि के कारण), और कड़ी लाल छोड़ना सही नहीं लगा. तो बेहतर लगा कि पाठकों को पूरी जानकारी अंग्रेज़ी लेख से ही फ़िल्हाल मिले.
  8. अमरीकी परंपरागत इकाइयाँ और इम्पीरियल इकाइयाँ इन दोनों पर ही लेख बनने बाकी हैं. ये लेख अभ नाःईम बनाये हैं, क्योंकि:
    1. यह ले अत्यधिक लम्बे बनेंगे, और २-४ वाक्यों का कामचलाऊ लेख मैंने इनके लिये बनाना उचित नहीं समझा.
    2. मैं {{मापन प्रणालियाँ}} के सभी लेख बनाऊंगा, तो हिन्दू इकाई प्रणाली व उसके अन्य सहायक लेख इतने अधिकस संख्या में और विस्तृत बनाये, (सोचा कि कम से कम हिन्दू/भारत के लेख तो अच्छे बनें), कि बाकी सहायक ले विलम्बित हो गये. इन दोनों का ही उस सांचे में उल्लेख है.
  9. अंतरण कारक के उदाहरण डालने का प्रयास करता हूं.
  10. भारत में इसको १ अप्रैल १९५७ में लागू किया गया था. यह भी सम्मिलित किया गया है, भूमिका में.
  11. व्याकरण /वर्तनी की गलतियां, तो मैंभी देखूंगा.

मैंने उपरोक्त बतायी सारी गलतियों और सुधारों का ब्यौरा दिया है(प्रयास किया है). कुछ बातें अंग्रेज़ी लेखों से देखी और सीखीं(चाहे नकल ही की हों) हैं. तो उस ही प्रकार हैं, उन्हें मानक मान कर, हां भाषा का ध्यान रखा है. और अंत में फ़िर ध्न्यवाद इस साबुन के लिये, जिससे धोकर यह लेख, चमक जायेगा.

--आशीष भटनागरसंदेश १५:४८, ३० जून २००८ (UTC)