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वायुगतिकीय केन्द्र

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वायुगतिकी में, एक तरल पदार्थ के माध्यम से चलने वाले वायुपत्रक पर कार्य करने वाले बलाघूर्ण या मोमेंट् को वायुपत्रक के किसी बिन्दु पर लागू किए गए परिणामी उत्थापन तथा परिणामी कर्षण द्वारा गिना जा सकता है, तथा उस बिन्दु के चारों ओर एक विभिन्न परिणामि पिचिंग मोमेंट जिसका परिमाण इस विकल्प के साथ भिन्न होता है कि उत्थापन को कहाँ लागू किया जाना है। वायुगतिकीय केन्द्र वह बिन्दु है जिस पर वायुपत्र के लिए पिचिंग मोमेंट् गुणांक लिफ्ट गुणांक (यानी हमले के कोण) के साथ भिन्न नहीं होता है, जिससे विश्लेषण सरल हो जाता है।[1]

जहाँ विमान का उत्थापन गुणांक है

उत्थापन तथा कर्षण बलों को एक ही बिन्दु पर, दबाव के केन्द्र पर लागू किया जा सकता है। यद्यपि, दबाव के केन्द्र का स्थान आक्रमण के कोण में परिवर्तन के साथ महत्वपूर्ण रूप से चलता है तथा इस प्रकार वायुगतिकीय विश्लेषण के लिए अव्यावहारिक है। इसके बदले वायुगतिकीय केन्द्र का उपयोग किया जाता है तथा इसके परिणामस्वरूप इस बिन्दु पर कार्य करने वाले आक्रमण के कोण में परिवर्तन के कारण वृद्धिशील उत्थापन तथा कर्षण दिए गए वस्तु पर कार्य करने वाली वायुगतिकी बलों का वर्णन करने के लिए पर्याप्त है।

  1. Benson, Tom (2006). "Aerodynamic Center (ac)". The Beginner's Guide to Aeronautics. NASA Glenn Research Center. अभिगमन तिथि: 2006-04-01.