वान डी ग्राफ़ जेनरेटर

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
वान डी ग्राफ जनित्र (बाह्री दृष्य)
वान डी ग्राफ जनित्र का योजनामूलक चित्र
एक प्रयोगशाला में स्थित फान डी ग्राफ मशीन

वान डी ग्राफ़ जेनरेटर (अंग्रेज़ी:Van der Graaf Generator) एक वैज्ञानिक उपकरण है। वान डी ग्राफ[1] जेनरेटर उच्च विभवान्तर (जैसे, १० लाख वोल्ट) पैदा करने में प्रयोग होता है। इसका विकास सन 1931 में वैज्ञानिक फान डी ग्राफ (Van de Graff) ने किया था।

संरचना[संपादित करें]

वान डी ग्राफ जनित्र में एक विशाल गोलीय धात्वक चालक होता है, जिसकी त्रिज्या 2 से 3मीटर होती है, जो पृथ्वी की सतह से लगभग 15 मी ऊँचे विद्युतरोधी स्तंभों पर टिका होता है। इसमें दो घिरनियाँ होती है। ऊपर वाली घिरनी गोलीय चालक के केंद्र पर स्थित होती है तथा नीचे वाली घिरनी को एक मोटर की सहायता से तेजी से घुमाया जाता है। दोनों घिरनियो के ऊपर कुचालक पदार्थ का पट्टा लगा होता है। इस जनित्र में दो कार्बन ब्रुश होते हैं। नीचे वाले कार्बन ब्रुश को फुहार कार्बन ब्रुश व ऊपर वाले कार्बन ब्रुश को संग्राहक कार्बन ब्रुश कहते हैं। नीचे वाले कार्बन ब्रुश का सम्बन्ध उच्च विभव वाले स्रोत से होता है। ऊपर वाले कार्बन ब्रुश का सम्बन्ध गोलीय चालक से होता है। इस सम्पूर्ण उपकरण को एक लोहे की टंकी में बंद कर दिया जाता है ताकि आवेश का क्षरण न हो।

क्रियाविधि[संपादित करें]

जब नीचे वाली घिरनी को एक मोटर की सहायता से तेजी से घुमाया जाता है, तो घिरनियों पर लिपटा पट्टा घूमने लगता है, जिससे ऊपर वाली घिरनी भी घूमने लगती है। नीचे वाला कार्बन ब्रुश उच्च विभव वाले स्रोत से धनावेश लेकर पट्टे को देता जाता है। ये धनावेश ऊपर वाले कार्बन ब्रुश द्वारा ग्रहण कर लिया जाता है, परन्तु ऊपर वाले कार्बन ब्रुश का सम्बन्ध गोलीय चालक से होता है। अतः यह सम्पूर्ण आवेश चालक के बाहरी पृष्ठ एक समान रूप से फैल जाता है। यह क्रिया लगातार चलती रहती है और चालक गोले का विभव लगातार बढ़ता जाता है। कुछ समय पश्चात् चालक गोले का विभव 8*10^6 वोल्ट हो जाता है। इसके बाद और अधिक आवेश देने पर आवेश का वायु में क्षरण होने लगता है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

इसका उपयोग आवेशित् साँचा:जैसे प्रो0 आयन अल्फा कण इत्यादि को त्वरित करने में किया जाता हैं

इन्हें भी देखें[संपादित करें]