वानप्रस्थ आश्रम

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हिन्दू धर्म में जीवन के ४ प्रमुख भाग (आश्रम) किये गए हैं- ब्रम्हचर्य, ग्रृहस्थ, वानप्रस्थ और सन्यास। अर्थात तीसरे भाग वानप्रस्थ का अर्थ वन प्रस्थान करने वाले से है। मनुष्य की आयु १०० वर्ष मानकर प्रत्येक आश्रम २५ वर्षों का होता है। इस आश्रम में व्यक्ति के लिये गृहस्थ का त्याग कर समाज एवं देश के लिये योगदान देने की अपेक्षा की जाती है।