वाक्पति मुंज

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मुंज
अमोघवर्ष, श्री-वल्लभ, पृथ्वी-वल्लभ, परम भट्टारक महराजाधिराज परमेश्वर
मालवा का राजा
शासनावधि972 ई - 990 के दशक तक
पूर्ववर्तीसीयक
उत्तरवर्तीसिन्धुराज
निधन994-998 ई
दक्कन, पश्चिमी चालुक्य
जीवनसंगीकुसुमावती (राजवल्लभ की 'भोजचन्द्रिका' के अनुसार) [1]
शासनावधि नाम
वाक्पति
राजवंशपरमार

वाक्पति मुंज (973 से 995 ई.) परमार राजा थे जो सीयक द्वितीय के दत्तक पुत्र थे और जिन्होंने राष्ट्रकूटों के पश्चात मालवा राज्य स्थापित किया। उनके प्राचीनतम ज्ञात पूर्वज उपेन्द्र कृष्णराज थे। उसे 'वाक्पति द्वितीय' भी कहते हैं।

वाक्पति मुंज सीयक का दत्तक पुत्र एवं उत्तराधिकारी था। उसने कलचुरी शासक युवराज द्वितीय तथा चालुक्य राजा तैलप द्वितीय को युद्व में परास्त किया। तैलप को मुंज ने कोई ६ बार युद्ध में परास्त किया था। सातवीं बार युद्ध में बन्दी बनाकर उसकी हत्या कर दी गयी। इस घटना का उल्लेख अभिलेखों एवं 'आइना-ए-अकबरी' में मिलता है।

वाक्पति मुंज का काल परमारों के लिए गौरव का काल था। मुंज ने 'श्री वल्लभ', 'पृथ्वी वल्लभ', 'अमोघवर्ष' आदि उपाधियां धारण की थीं। 'कौथेम' दानपात्र से विदित होता है कि वाक्पति मुंज ने हूणों को भी पराजित किया था। वह एक सफल विजेता होने के साथ ही कवियों एवं विद्धानों का आश्रयदाता भी था। उसके राजदरबार में 'यशोरूपावलोक' के रचयिता धनिक, 'नवसाहसांकचरित' के लेखक पद्मगुप्त, 'दशरूपक' के लेखक धनंजय आदि रहते थे।

वाक्पति मुंज के बाद उसका छोटा भाई सिन्धु परमार वंश का शासक हुआ। उसने 'कुमार नारायण' एवं 'साहसांक' की उपाधि धारण की। वाक्पति मुंज ने धार में अपने नाम से 'मुंज सागर' नामक तालाब का निर्माण कराया था।

मुंज तालाब' (माण्डू, धार)

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Krishna Narain Seth 1978, पृ॰ 146.