वसीम रिजवी

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वसीम रिजवी उत्तर प्रदेश सेंट्रल शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष हैं।

वसीम रिजवी का अब तक का सफर[संपादित करें]

वसीम रिजवी एक सामान्य परिवार से संबंध रखते हैं। उनके पिता रेलवे के कर्मचारी थे लेकिन जब रिजवी क्लास 6 की पढ़ाई कर रहे थे तो उनके वालिद का इंतकाल हो गया। इसके बाद रिजवी और उनके भाई-बहनों की जिम्मेदारी उनकी वालदा पर आ गई। रिजवी अपने भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। उन्होंने 12वीं तक की शिक्षा हासिल की और आगे की पढ़ाई के लिए नैनीताल के एक कॉलेज में प्रवेश लिया। लेकिन, पारिवारिक परिस्थितियां खराब होने के कारण उन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ी।

इसके बाद वो सऊदी अरब चले गए और एक होटल में काम करने लगे। बाद में उन्हें जापान जाने का मौका मिला और वहां उन्होंने एक फैक्ट्री में काम किया। इसके बाद उनको अमेरिका में काम करने का मौका मिला जहां उन्होंने एक स्टोर में काम किया। लेकिन, पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उन्हें भारत लौटना पड़ा और यहां उन्होंने ट्रेडिंग का काम करना शुरू कर दिया।

जब उनके सामाजिक संबंध अच्छे होने लगे तो उन्होंने नगर निगम का चुनाव लड़ने का फैसला किया। यहीं से उनके राजनीतिक करियर की शुरूआत हुई। इसके बाद वो वक्फ बोर्ड के सदस्य बने और उसके बाद चेयरमैन के पद तक पहुंचे। वो पिछले दस सालों से बोर्ड में है और लगातार बयानों के कारण चर्चा में रहते हैं।[1]

विवादों में[संपादित करें]

अपने बयानों के चलते रिजवी कई बार विवादों में घिरे हैं और उन पर इस्लाम विरोधी होने का आरोप भी लगा है। इस्लामी इमामों के द्वारा उन्हें इस्लाम से खारिज़ भी कर दीया गया है।[2] हालांकि रिजवी अभी भी अपने आप को मुसलमान मानते हैं।

वसीम रिजवी के कुछ विवादित बयान[संपादित करें]

१. देश की नौ विवादित मस्जिदों को हिन्दुओं को सौंप दें मुसलमान[3]

२. हिन्दुस्तान की धरती पर कलंक की तरह है बाबरी ढांचा[4]

३. रिजवी ने कहा कि चांद तारे वाला हरा झंडा इस्लाम का धार्मिक झंडा नहीं है। ये पाकिस्तान की राजनैतिक पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग से मिलता जुलता है। इस झंडे को फहराने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। रिजवी ने यहां तक कह दिया कि पैगम्बर मोहम्मद साहब अपने कारवां में सफेद या काले रंग का झंडा प्रयोग करते थे।[5]

४. इस्लामी मदरसों को बंद कर देना चाहिए क्योंकि ये आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं। ये भारतीय मुसलमानों के लिए अच्छे नहीं हैं। ये मुसलमान नौजवानों के दिमाग में ज़हर घोलते हैं। बहुत मदरसों में आतंकी ट्रेनिंग दी जाती है। यहां आधुनिक शिक्षा नहीं दी जाती। मजहवी कट्टरता सिखाई जाती है।[6]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "कौन हैं वसीम रिजवी, जिन्होंने बार-बार की अयोध्या में राम मंदिर बनाने की वकालत". अमर उजाला.
  2. "इस्लाम से खारिज किए गए शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी". News18.
  3. "वसीम रिजवी ने 9 विवादित मस्जिदों को हिंदुओं को सौंपने की मांग की". Aajtak.intoday.in.
  4. "वसीम रिजवी बोले, हिंदुस्तान की जमीन पर कलंक की तरह है बाबरी ढांचा". aajtak.intoday.in.
  5. "इस्लामिक झंडे पर किया था कमेंट, वसीम रिजवी को मिली जान से मारने की धमकी". जनसत्ता.
  6. https://www.thelallantop.com/bherant/wasim-rizvi-chairman-of-shia-waqf-board-has-written-a-letter-to-prime-minister-narendra-modi-that-madarsas-in-uttar-pradesh-are-producing-terrorists-so-need-to-eradicate-madarsas/amp/%7Cpublisher=कौन हैं शिया वक्फ़ बोर्ड के चेयरमैन, जिन्हें दाऊद ने बम से उड़ाने की धमकी दी है|publisher=thelallantop}}