वर्जना

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वर्जना या टाबू किसी ऐसे व्यवहार या कार्य कर लगे प्रतिबंध को कहते हैं जिसे साधारण व्यक्ति के लिये या तो अधिक पवित्र या फिर शापित समझा जाये। इन कार्यों के बारे में मान्यता होती है कि इन्हें करना व्यक्ति को अलौकिक दंड का पात्र बनाता है। इस तरह की रोक प्राय: हर समुदाय में उपस्थित है। सामाजिक विज्ञान में वर्जना शब्द का प्रयोग कुछ हद तक उन मानव गतिविधियों या प्रथाओं का निषेध है जिन्हें नैतिक अथवा धार्मिक मान्यताओं के आधार पर पवित्र अथवा निषिद्ध माना जाता है। "वर्जना भंग" को आमतौर पर किसी भी संस्कृति में आपत्तिजनक माना जाता है।[1]

टाबू शब्द की उत्पत्ति[संपादित करें]

टोंगाई भाषा में "टापू" (tapu) शब्द है, जिसका अर्थ प्रशांत महासागर के सामाजों में धार्मिक व सामाजिक मान्यता में वर्जित चीज़ों से सम्बन्धित है। यह शब्द अब विश्व की लगभग सभी भाषाओं में प्रवेश कर चुका है।

उदाहरण[संपादित करें]

कुछ व्यवहार क़रीब-क़रीब सभी समाजों में टाबू माने जाते हैं। मसलन बहन व भाई का विवाह करना या मानव-माँस खाना लगभग सभी मनुष्य समाजों में वर्जित हैं।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Merriam-Webster's Online Dictionary, 11th Edition. "Taboo."