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हमारा टेलिग्राम चैनल ज्वाइन करें समाचार breadcrumb फीचर क्यों गिरती है बिजली, क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? By मुकुंद सिंह Updated: Fri, Jun 24, 2016, 10:16 [IST]

पटना( मुकुंद सिंह)। अधिकतर मानसून आने के बाद या बरसात के मौसम बिजली गिरने और कड़कने की घटना सामने आती है। वही इसे लोगों द्वारा आकाशीय घटना या प्राकृतिक आपदा मानते हुए चुप-चाप रहा जाता है । लेकिन क्या आप जानते हैं कि आसमान से बिजली क्यों कड़कती है।


Positive India: एलईडी डिस्ट्रीब्यूशन से दूर होगा देश का अंधेरा


what is Lightning or how to safe Lightning or Akashiya bijli

कमाल का बल्ब जो सिर्फ रौशनी नहीं बल्कि ठीक करेगा आपका मूड भी तो हम आपको बताते चलें कि आसमान में अपोजिट एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते और घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाए हुए टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है जो धरती पर गिरती है। आसमान में किसी तरह का कंडक्टर न होने से बिजली पृथ्वी पर कंडक्टर की तलाश में पहुंच जाती है, जिससे नुकसान पहुंचता है।

'जल्दी मम्मी-पापा बनना चाहते हैं तो अंधेरे में बनाइये रिलेशन'


धरती पर पहुंचने के बाद बिजली को कंडक्टर की जरूरत पड़ती है। आकाशीय बिजली जब लोहे के खंभों के अगल- बगल से गुजरती है तो वह कंडक्टर का काम करता है। उस समय कोई व्यक्ति यदि उसके संपर्क में आता है तो उसकी जान तक जा सकती है।

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डैमेज हो जाते हैं टिशूज, बॉडी पर पड़ता है इफेक्ट

आसमानी बिजली का असर ह्यूमन बॉडी पर कई गुना होता है। डीप बर्न होने से टिशूज डैमेज हो जाते हैं। उनको आसानी से ठीक नहीं किया जा सकता है। बिजली का असर नर्वस सिस्टम पर पड़ता है। हार्ट अटैक होने से मौत हो जाती है। इसके असर से शारीरिक अपंगता का खतरा होता है।

जानिए कैसे बचे बिजली से..

बिजली मैकेनिक से कहकर घर में तडि़त आघात (यह एक प्रकार का एंटीना होता है, जो बिजली के दौरान अर्रि्थग का काम करता है।) लगवाना चाहिए। आंधी आते ही टीवी, रेडियो, कंप्यूटर सभी का मोडेम और पॉवर प्लग निकाल दें। इलेक्ट्रिक अप्लाएंसेस को ऑफ कर देना चाहिए। इस दौरान मोबाइल यूज करने से बचें। नंगे पैर फर्श या जमीन पर कभी खड़े ना रहें। बिजली उपकरणों से दूर रहें। बिजली पैदा करने वाली चीजों से दूरी बनाकर रखें रेडिएटर, फोन, धातु के पाइप, स्टोव इत्यादि। पेड़ के नीचे या खुले मैदान में जाने से बचें। खुले मैदान में होने पर किसी बिल्डिंग में छिपने की कोशिश करें। गीले कपड़ों की वजह से व्रजपात का असर कम हो जाता है। आकाशीय बिजली का तापमान सूर्य की ऊपरी सतह से भी ज्यादा होता है। बिजली मिली सेंकड से कम समय के लिए ठहरती है। यदि बिजली किसी व्यक्ति पर गिरती है तो सबसे ज्यादा असर उसके सिर, कंधे और गले पर होता है। बिजली गिरने की सबसे अधिक संभावना दोपहर के वक्त होती है। बिजली का असर महिलाओं से ज्यादा पुरुषों पर होता है। कई भ्रांतियां हैं..

गोबर पर गिरने गोबर सोना बन जाता है। मकान पर गिरने से छत की सरिया अष्टधातु की हो जाती है। पीपल, पाकड़, बरगद, तरकुल जैसे पेड़ों पर बिजली ज्यादा गिरती है किसी चीज पर बिजली गिरने के बाद वहां दोबारा नहीं गिरती रबर, टायर या फोम इससे बचाव कर सकते हैं।


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पटना( मुकुंद सिंह)। अधिकतर मानसून आने के बाद या बरसात के मौसम बिजली गिरने और कड़कने की घटना सामने आती है। वही इसे लोगों द्वारा आकाशीय घटना या प्राकृतिक आपदा मानते हुए चुप-चाप रहा जाता है । लेकिन क्या आप जानते हैं कि आसमान से बिजली क्यों कड़कती है।


Positive India: एलईडी डिस्ट्रीब्यूशन से दूर होगा देश का अंधेरा


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कमाल का बल्ब जो सिर्फ रौशनी नहीं बल्कि ठीक करेगा आपका मूड भी तो हम आपको बताते चलें कि आसमान में अपोजिट एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते और घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाए हुए टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है जो धरती पर गिरती है। आसमान में किसी तरह का कंडक्टर न होने से बिजली पृथ्वी पर कंडक्टर की तलाश में पहुंच जाती है, जिससे नुकसान पहुंचता है।

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धरती पर पहुंचने के बाद बिजली को कंडक्टर की जरूरत पड़ती है। आकाशीय बिजली जब लोहे के खंभों के अगल- बगल से गुजरती है तो वह कंडक्टर का काम करता है। उस समय कोई व्यक्ति यदि उसके संपर्क में आता है तो उसकी जान तक जा सकती है।

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आसमानी बिजली का असर ह्यूमन बॉडी पर कई गुना होता है। डीप बर्न होने से टिशूज डैमेज हो जाते हैं। उनको आसानी से ठीक नहीं किया जा सकता है। बिजली का असर नर्वस सिस्टम पर पड़ता है। हार्ट अटैक होने से मौत हो जाती है। इसके असर से शारीरिक अपंगता का खतरा होता है।

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गोबर पर गिरने गोबर सोना बन जाता है। मकान पर गिरने से छत की सरिया अष्टधातु की हो जाती है। पीपल, पाकड़, बरगद, तरकुल जैसे पेड़ों पर बिजली ज्यादा गिरती है किसी चीज पर बिजली गिरने के बाद वहां दोबारा नहीं गिरती रबर, टायर या फोम इससे बचाव कर सकते हैं।