लोगों की जेल

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राष्ट्रों की जेल (रूसी: Тюрьма наро́дов) एक है मुहावरा है जिसका पहली बार उपयोग व्लादिमीर लेनिन द्वारा 1914 में किया गया था।[1][2][3] उन्होंने इसका उपयोग उस समय की रूस की राष्ट्रीय नीति का वर्णन करते हुए किया था। रूस को जेल कहने की सोच मारकिस डी कस्टीन की ला रुसी एन 1839 नामक पुस्तक पर आधारित है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. К вопросу о национальной политике
  2. "Н. Матюшкин. «В. И. Ленин о дружбе народов», Издательство «Знание», Москва, 1954 г." मूल से 29 दिसंबर 2010 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 8 नवंबर 2021.
  3. Российская империя в 1914—1917 гг.: факты, которые всегда замалчивались: «Гнилая самодержавная Россия, эта извечная тюрьма народов просто обречена на поражение.»