लोकरंग सांस्कृतिक समिति

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यह एक जनपक्षधर, प्रगतिशील संगठन है जो स्वयं को जनसंस्कृति मंच, प्रगतिशील लेखक संघ और जनवादी लेखक संघ की विचारधारा के करीब पाता है यद्यपि कि यह अपनी गतिविधियों के लिए स्वतंत्र है और जिम्मेदार है। यह दूसरे समान विचारधारा के किसी भी संगठन के प्रति मित्रवत संबंद्ध रख सकता है और अपनी कार्यकारिणी के निर्णय के आधार पर ही कोई संयुक्त पहलकदमी ले सकता है। • यह संगठन किसी भी दलगत राजनैतिक पार्टी के करीब नहीं है। • इसकी विचारधारा को धर्म, भाषा, जाति और क्षेत्रवाद के आधार पर बांटा नहीं जा सकता। लोकरंग सांस्कृतिक समिति, लोक संस्कृतियों के संवर्द्धन, संरक्षण के लिए कार्यरत है। विगत तीन वर्षो से हमने लगभग 150 से अधिक लोककलाकारों को, जो व्यावसायिक नहीं हैं, जो गावों में खेती-किसानी करते, अपने दुखःसुख भुलाने के वास्ते गीत और संगीत में अपनी पीड़ा व्यक्त करते हैं, को मंच प्रदान किया है। लोकरंग सांस्कृतिक समिति कोई व्यावसायिक संगठन नहीं है और न एन0जी0ओ0 है। यह जनता का संगठन है जो जनता के सहयोग से चलाया जाता है। आप भी इसमें शामिल हो सकते हैं बशर्ते कि आप धर्म, भाषा, क्षेत्र, जाति के आधार पर किसी से नफरत, भेद-भाव न बरतते हों। आपका प्रगतिशील विचारधारा में विश्वास हो। लोकरंग सांस्कृतिक समिति भोजपुरी संस्कृति के उच्च आदर्शों से समाज को परिचित कराना चाहती है न कि फूहड़पन से। भोजपुरी गीतों को फूहड़पन की पहचान, मुम्बईया और व्यावसायिक लोगों ने दी है। भोजपुरी गीतों में दर्शन, संवेदना और मानवीय संदेश भरे पड़े हैं। लोकरंग सांस्कृतिक समिति ने अपने मंच पर भोजपुरी के तमाम संवेदनात्मक गीतों को मंच प्रदान किया है। इसका पता है-बी ४, १४० विशालखंड़, गोमतीनगर, लखनऊ २२६०१ और जोगिया जनूबी पट्टी, फाजिलनगर, कुशीनगर, उ०प्र०