लॉर्ड मिंटो, चौथे अर्ल
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गिल्बर्ट जॉन इलियट-मरे-काइनिनमाउंड, मिंटो के चौथे अर्ल | |
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| भारत के वाइसरॉय एवं गवर्नर-जनरल | |
| कार्यकाल 18 नवंबर 1905 – 23 नवंबर 1910 | |
| शासक | एडवर्ड सप्तम्, जॉर्ज पंचम |
| पूर्वाधिकारी | लॉर्ड कर्जन |
| उत्तराधिकारी | लॉर्ड हार्डिंग |
| व्यक्तिगत जानकारी | |
| जन्म | 9 जुलाई 1845 |
| मृत्यु | 1 मार्च 1914 (उम्र 68) |
लॉर्ड मिंटो या गिल्बर्ट जॉन इलियट-मरे-काइनिनमाउंड, मिंटो के चौथे अर्ल ब्रिटिश राज में भारत के गवर्नर जनरल रहे थे। लार्ड मिंटो (1905-1910) को सांप्रदायिक निर्वाचन का जनक के रूप मे जाना जाता है क्योंकि इन्होंने पृथक प्रतिनिधित्व का उपवन्द किया था (उस समय भारत के सचिव मार्ले थे)।[1]
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "Gilbert John Elliot-Murray-Kynynmound, 4th earl of Minto | Indian Viceroy, Governor-General, Diplomat | Britannica". www.britannica.com (अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2026-09-27.
