लॉर्ड कॉर्नवालिस

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लॉर्ड कॉर्नवालिस फोर्ट विलियम प्रेसिडेंसी के गवर्नर जनरल रहे थे। वह बंगाल का गवर्नर जनरल था। इन्होंने 1793 ईस्वी में बंगाल में स्थायी बन्दोबस्त के रूप में एक नई राजस्व पद्धति की शुरूआत की। इसके समय में जिले के सभी अधिकार कलेक्टर को दिया गया और इसे ही भारतीय सिविल सेवा का जनक माना जाता है। इसने कंपनी के कर्मचारियों के व्यक्तिगत व्यापार पर प्रतिबन्ध लगा दिया। इन्होंने भारतीय न्यायाधीश युक्त जिला अदालतों को समाप्त कर उसके स्थान पर चार भर्मण करने वाली अदालतें ,जिनमे तीन बंगाल के लिये ओर एक बिहार के लिए नियुक्त की गई। 1793 में प्रसिद्ध कॉर्नवालिस कोड का निर्माण करवाया,जो शक्तियो के पृथकीकरण सिद्धान्तों पर आधरित थी। जिले में पुलिस थाना की स्थापना कर एक दरोगा को इसका इंचार्ज बनाया।

कार्नवालिस 1786 से 1793 तक बंगाल के गवर्नर जनरल रहे । अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने बहुत महत्वपूर्ण कार्य किए[संपादित करें]

  • उन्होंने 1793 में बिहार और बंगाल में स्थाई बंदोबस्त लागू करवाया
  • भारत में सिविल सेवा आरंभ करने का श्रेय इनको जाता है
  • टीपू सुल्तान की पराजय और श्रीरंगपट्टनम की संधि

मृत्यु-

जुलाई 1805 में कार्नवालिस दोबारा गवर्नर जनरल बनकर भारत आए । लेकिन 5 अक्टूबर 1805 को बुखार आ जाने की वजह से , इनकी गाज़ीपुर (उत्तर प्रदेश) में मृत्यु हो गई ।गाजीपुर में ही इनका मकबरा बना हुआ है ,जो कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की निगरानी में है।