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लेवियाथन (हॉब्स की पुस्तक)

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लेवियाथन
लेवियाथन पुस्तक का मूल मुख्य पृष्ठ (फ्रंटिस्पीस)
1651 में प्रकाशित 'लेवियाथन' का मूल मुख्य पृष्ठ, जिसे अब्राहम बोस ने डिजाइन किया था।
लेखकथॉमस हॉब्स
भाषाअंग्रेज़ी (बाद में लैटिन में अनुवादित)
विषयराजनीतिक दर्शन, सामाजिक समझौता सिद्धांत
शैलीदार्शनिक ग्रंथ
प्रकाशित1651

लेवियाथन, जिसका पूरा नाम लेवियाथन और द मैटर, फॉर्म एंड पावर ऑफ ए कॉमनवेल्थ एक्लेसियास्टिकल एंड सिविल है, प्रसिद्ध अंग्रेजी दार्शनिक थॉमस हॉब्स द्वारा लिखित एक अत्यंत प्रभावशाली पुस्तक है। इसे 1651 में प्रकाशित किया गया था।[1] इसका नाम बाइबिल में वर्णित एक विशाल समुद्री राक्षस 'लेवियाथन' के नाम पर रखा गया है, जो इस पुस्तक में एक अत्यंत शक्तिशाली राज्य (कॉमनवेल्थ) का प्रतीक है। यह पुस्तक पश्चिमी राजनीतिक दर्शन के सबसे महत्वपूर्ण और आधारभूत ग्रंथों में से एक मानी जाती है, जिसने आधुनिक 'सामाजिक समझौता सिद्धांत' की नींव रखी।

इस पुस्तक की रचना अंग्रेज़ी गृहयुद्ध (1642–1651) की उथल-पुथल और भारी रक्तपात की पृष्ठभूमि में हुई थी। हॉब्स ने इस पुस्तक में तर्क दिया है कि किसी भी समाज को गृहयुद्ध और सामाजिक पतन से बचाने के लिए एक निरंकुश संप्रभु या एक अत्यंत मजबूत केंद्रीय सत्ता की आवश्यकता होती है। हॉब्स ने एक ऐसी 'प्राकृतिक अवस्था' की कल्पना की है, जहाँ कोई सरकार, कानून या स्थापित सत्ता नहीं है। उनके अनुसार, इस अवस्था में मनुष्य का जीवन "एकाकी, दीन, घृणित, पाशविक और अल्पकालिक" होता है।[2] यह एक ऐसी भयावह अवस्था है जहाँ हर व्यक्ति का हर दूसरे व्यक्ति के साथ लगातार युद्ध चलता रहता है।

इस निरंतर भय और हिंसा की स्थिति से बचने के लिए, हॉब्स 'सामाजिक समझौते' का विचार प्रस्तुत करते हैं। उनका मानना है कि लोग अपनी सुरक्षा, शांति और जीवन के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए स्वेच्छा से अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता को एक संप्रभु शक्ति (जिसे वे 'लेवियाथन' कहते हैं) को सौंप देते हैं।[3] यह संप्रभु एक अकेला व्यक्ति (राजा) या एक सभा हो सकती है, लेकिन इसके पास समाज में शांति बनाए रखने और कानून लागू करने के लिए असीमित, अविभाज्य और सर्वोच्च शक्तियाँ होनी चाहिए। हॉब्स का स्पष्ट रूप से मानना था कि एक कठोर और निरंकुश सरकार भी अराजकता और गृहयुद्ध की स्थिति से कहीं अधिक बेहतर होती है।

यद्यपि प्रकाशन के समय 'लेवियाथन' को इसके धर्मनिरपेक्ष विचारों और चर्च की सत्ता को राज्य के अधीन करने के तर्कों के कारण भारी आलोचना का सामना करना पड़ा था, लेकिन आधुनिक राजनीतिक चिंतन में इसका योगदान अद्वितीय है। इसने बाद के विचारकों जैसे जॉन लॉक और ज्यां-जाक रूसो को गहराई से प्रभावित किया, जिन्होंने हॉब्स के सामाजिक समझौते के सिद्धांत को आगे बढ़ाते हुए अपने-अपने राजनीतिक दर्शन विकसित किए।

सन्दर्भ

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  1. "Leviathan". Encyclopedia Britannica.
  2. "Hobbes's Moral and Political Philosophy". Stanford Encyclopedia of Philosophy.
  3. "Leviathan by Thomas Hobbes". The British Library.

बाहरी कड़ियाँ

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