लातिन गिरजाघर
लातिन चर्च (लातिन: Ecclesia Latina) कैथोलिक गिरजाघर के अंतर्गत आने वाला सबसे बड़ा स्वायत्त चर्च है। लातिन गिरजाघर का नेतृत्व रोम के बिशप के रूप में सीधे पोप किया करते हैं।
लातिन गिरजाघर का प्रभाव पश्चिमी संस्कृति पर पड़ा इसलिए प्रायः इसे पश्चिमी चर्च भी कहा जाता है। पोप पारंपरिक और आधिकारिक खिताबों में से एक है जो पश्चिम में कुलपति के संदर्भ में उपयोग में लाया जाता है।[1]
सन 1054 में रोम और कुस्तुंतुनिया के बीच पूर्व-पश्चिम विभाजन हुआ था। उस विभाजन से पहले तक लातिनी चर्च और पूर्वी ऑर्थोडॉक्स चर्च पूरी तरह से एक-दूसरे से जुड़े हुए थे। इस बंटवारे से थोड़ा पहले से ही पश्चिमी ईसाइयों को पूर्वी ईसाइयों से अलग बताने के लिए उन्हें लातिनी कहा जाने लगा।
शब्दावली
[संपादित करें]लातिन गिरजाघर को 'रोमन चर्च', 'लातिन कैथोलिक चर्च' और 'रोमन कैथोलिक चर्च' भी कहा जाता है।[2][3][4][5]
नाम
[संपादित करें]पश्चिम में कैथोलिक चर्च के ऐतिहासिक भाग को लैटिन चर्च या लातिन गिरजाघर कहा जाता है। यह पूर्वी कैथोलिक चर्च से अलग है।
इतिहास
[संपादित करें]लातिनी चर्च अथवा गिरजाघर (यानी होली सी/पोप का मुख्य केंद्र), कुस्तुंतुनिया (कॉन्स्टेंटिनोपल), अलेक्जेंड्रिया, अंताकिया (एंटीऑक) और यरुशलम आरंभिक ईसाई धर्म के पाँच प्रमुख केंद्र (पेन्टार्की) हैं। लातिनी गिरजाघर उन्हीं में से एक है।
संदर्भ
[संपादित करें]- ↑ Mancini, Marco (2017-08-11). "Patriarca d'Occidente? No grazie, disse Benedetto XVI" [Patriarch of the West? No thanks, said Benedict XVI]. ACI Stampa (इतालवी भाषा में). Vatican City. अभिगमन तिथि: 2023-11-28.
- ↑ Turner, Paul (2007). When other Christians become Catholic. Liturgical Press. p. 141. ISBN 978-0-8146-6216-8.
When other Christians become Catholic: the individual becomes Eastern Catholic, not Roman Catholic
- ↑ Faris, John D. (2002). "The Latin Church Sui Iuris". Jurist. 62: 280.
- ↑ Ashni, A. L.; Santhosh, R. (December 2019). "Catholic Church, Fishers and Negotiating Development: A Study on the Vizhinjam Port Project". Review of Development and Change (अंग्रेज़ी भाषा में). 24 (2): 187–204. डीओआई:10.1177/0972266119883165. आईएसएसएन 0972-2661. एस2सीआईडी 213671195.
- ↑ Turner, Paul (2007). When other Christians become Catholic. Liturgical Press. p. 141. ISBN 978-0-8146-6216-8.
When other Christians become Catholic: the individual becomes Eastern Catholic, not Roman Catholic