रोम की प्राचीन कलायें
रोम की प्राचीन कलायें के अन्तर्गत वास्तुकला, चित्रकला, मूर्तिकला शामिल थे। इसके अतिरिक्त, धातु-कार्य, गहनों की नक्काशी, हाथीदंत की नक्काशी, और कांच की आकर्षक वस्तुएं रोमन कला के अन्तर्गत ही आती थीं।[1]
पारंपरिक दृष्टिकोण
[संपादित करें]प्राचीन रोमन कला ग्रीक कला ज्यादा प्रभावित थी, लेकिन इसे केवल नकल कहना उचित नहीं होगा। रोमन कलाकारों ने प्राचीन ग्रीक के नमूनों को अपनाते हुए अपनी अनूठी रचनात्मकता और स्थानीय प्रभावों को जोड़ा। उनकी कला में इंडो-इटालियन और मिस्र के दृश्य संस्कृतिक कलाओं का भी प्रभाव देखने मिलता है। प्लिनी जैसे इतिहासकारों ने माना कि मूर्तिकला, चित्रांकन और अन्य कला की दृष्टि से ग्रीक काल अधिक उन्नत था।[2] हालांकि, प्राचीन रोमन कला ने शैलीगत उदारता और व्यावहारिक, उपयोगिता के कारण अपनी अलग पहचान बनाई। ग्रीक कलाकारों में ने पॉलीग्नोटोस और अपोलोडोरोस जैसे कलाकार छाया चित्रकला के लिए प्रसिद्ध थे। जबकि ज़्यूक्सिस और पारहासियस ने यथार्थवादी चित्रकला की परंपरा को आगे बढ़ाया। इसके अलावा रोमन कलाकारों को "लघु कला" और सजावटी कला की विस्तृत परंपरा विरासत में मिली, जो विलासिता के स्तर पर विकसित हुई। हालांकि, बड़ी संख्या में धार्मिक और धर्मनिरपेक्ष टेराकोटा मूर्तियां भी बनाई जाती थीं। इन कलात्मक कृतियों में रोमन कला की विविधता को दर्शाया गया जिसका परिणाम रोम के संग्रहालयों आज भी देखने मिलते हैं।
संदर्भ
[संपादित करें]- ↑ टॉयनबी, जे॰ एम॰ सी॰ (1971). "प्राचीन रोमन कलाएं". शास्त्रीय समीक्षा (The Classical Review.). 21 (3): 439–442. डीओआई:10.1017/S0009840X00221331. जेस्टोर 708631. एस2सीआईडी 163488573.
- ↑ सिबिल एबर्ट-शिफेरर, स्थिर जीवन का इतिहास, हैरी एन॰ अब्राम्स, न्यूयॉर्क, 1998, पृष्ठ 15, ISBN 0-8109-4190-2