रॉयल फ्रैंकिश एनल्स
| लेखक | विभिन्न कैरोलिंगियन दरबारी विद्वान |
|---|---|
| भाषा | लैटिन |
| विषय | इतिहास, क्रॉनिकल, कैरोलिंगियन राजवंश |
| शैली | एनल्स (वर्षवृत्तांत) |
| प्रकाशन स्थान | फ्रैंकिश साम्राज्य |
| मीडिया प्रकार | चर्मपत्र |
रॉयल फ्रैंकिश एनल्स (अंग्रेज़ी: Royal Frankish Annals, लातिन: Annales regni Francorum) 8वीं और 9वीं शताब्दी के दौरान लैटिन भाषा में लिखे गए वर्षवृत्तांतों का एक अत्यंत महत्वपूर्ण संग्रह है। यह क्रॉनिकल 741 ईस्वी (चार्ल्स मार्टेल की मृत्यु) से लेकर 829 ईस्वी (लुई द पायस के शासनकाल) तक फ्रैंकिश साम्राज्य के इतिहास का वर्णन करता है। यह शार्लेमेन और प्रारंभिक 'कैरोलिंगियन साम्राज्य' के राजनीतिक और सैन्य इतिहास को समझने के लिए आधुनिक इतिहासकारों के पास मौजूद सबसे प्रमुख प्राथमिक स्रोत है।[1][2]
लेखक और संकलन
[संपादित करें]'रॉयल फ्रैंकिश एनल्स' किसी एक लेखक की रचना नहीं है। इतिहासकारों का मानना है कि इसे कैरोलिंगियन राजदरबार से जुड़े विभिन्न पादरियों और विद्वानों द्वारा समय-समय पर संकलित किया गया था। चूँकि इसे सीधे शाही संरक्षण में लिखा गया था, इसलिए इसके लेखकों की पहचान को जानबूझकर गुमनाम रखा गया।
कालांतर में, इन एनल्स का एक संशोधित संस्करण भी तैयार किया गया था, जिसे इसकी उन्नत लैटिन शैली के कारण अक्सर शार्लेमेन के प्रसिद्ध दरबारी विद्वान और जीवनी लेखक आइनहार्ड से जोड़ा जाता है। हालाँकि, आधुनिक विद्वान अब इस बात पर एकमत हैं कि आइनहार्ड इसके एकमात्र लेखक या संशोधक नहीं थे।[3][4]
यह ग्रंथ कालानुक्रमिक रूप में लिखा गया है, जहाँ प्रत्येक वर्ष के लिए एक प्रविष्टि दी गई है। इसकी विषय-वस्तु मुख्य रूप से निम्नलिखित घटनाओं पर केंद्रित है:
- सैन्य अभियान: शार्लेमेन द्वारा सैक्सन, अवार, और लोम्बार्ड्स के खिलाफ लड़े गए सफल युद्धों का विस्तृत विवरण।
- राजनयिक संबंध: बाइजेंटाइन साम्राज्य, पोप, और अब्बासिद खलीफा हारून अल-रशीद के साथ फ्रैंकिश साम्राज्य के कूटनीतिक पत्राचार और उपहारों का आदान-प्रदान।
- धार्मिक आयोजन: चर्च की परिषदों, मठों की स्थापना और कैरोलिंगियन पुनर्जागरण के दौरान धार्मिक सुधार।[5]

राज्य प्रोपगैंडा और पूर्वाग्रह
[संपादित करें]यद्यपि यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्रोत है, लेकिन आधुनिक इतिहासकार 'रॉयल फ्रैंकिश एनल्स' को तटस्थ इतिहास नहीं मानते हैं। इसे विशुद्ध रूप से कैरोलिंगियन राज्य प्रोपगैंडा के रूप में देखा जाता है।
- हार को छिपाना: इस क्रॉनिकल का मुख्य उद्देश्य शार्लेमेन और उसके वंशजों को अजेय और ईश्वर द्वारा चुने गए शासकों के रूप में प्रस्तुत करना था। इसलिए, इसमें फ्रैंकिश सेनाओं की हार या संकटों को अक्सर पूरी तरह से हटा दिया गया है या उन्हें बहुत ही मामूली रूप में दिखाया गया है (जैसे 778 ईस्वी में स्पेन में 'रोन्सेवॉक्स दर्रे' पर फ्रैंकिश सेना की विनाशकारी हार का एनल्स के मूल संस्करण में कोई उल्लेख नहीं है)।
- वैधता: यह ग्रंथ मेरोविंगियन राजवंश को हटाकर कैरोलिंगियन राजवंश की स्थापना को पूरी तरह से वैध और न्यायसंगत ठहराता है।[6]
अपनी तमाम खामियों और पूर्वाग्रहों के बावजूद, 'रॉयल फ्रैंकिश एनल्स' 8वीं और 9वीं सदी के यूरोप का अध्ययन करने के लिए एक अपरिहार्य दस्तावेज़ है। यह उस युग की भाषा, राजनीतिक विचारधारा और शाही प्रशासन के काम करने के तरीके की एक अनूठी झलक प्रस्तुत करता है।[7][8]
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ Scholz, Bernhard Walter; Rogers, Barbara (1970). Carolingian Chronicles: Royal Frankish Annals and Nithard's Histories. University of Michigan Press. pp. 2-8. ISBN 978-0472061860.
- ↑ Charlemagne: Translated Sources
- ↑ McKitterick, Rosamond (2008). Charlemagne: The Formation of a European Identity. Cambridge University Press. pp. 34–38. ISBN 978-0521886727.
- ↑ Annales regni Francorum inde ab a. 741 usque ad a. 829 qui dicuntur Annales Laurissenses maiores et Einhardi
- ↑ Nelson, Janet L. (2019). King and Emperor: A New Life of Charlemagne. Allen Lane. pp. 112-118. ISBN 978-0713992434.
- ↑ Story, Joanna (2005). Charlemagne: Empire and Society. Manchester University Press. pp. 65-72. ISBN 978-0719070891.
- ↑ Collins, Roger (2010). Early Medieval Europe, 300-1000. Palgrave Macmillan. pp. 280–285. ISBN 978-0230006737.
- ↑ "The Origin of the Royal Frankish Annalist's Information about the Serbs in Dalmatia"