रैबारी

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रबारी, रैबारी राईका, गोपालक एव देसाई के नाम से जानेवाली  यह एक अति प्राचीन क्षत्रिय जाती है। जिसके मूल सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़े हुए हैं खेती और पशुपालन भारतीय लोगो का मुख्य व्यवसाय रहा है।  इस जाती के लोग भी इसी  व्यवसाई से जुड़े हुए लोग है।  रैबारी उत्तर भारत की एक प्रमुख एव प्राचीन जनजाति है।भाट,चारण और वहीवंचाओ के ग्रंथो के आधार पर, मूल पुरुष को 16 लडकीयां हुई और वो 16 लडकीयां का ब्याह 16 क्षत्रीय कुल के पुरुषो साथ कीया गया! जो हिमालयके नियम बहार थे, सोलाह की जो वंसज हुए वो राहबारी और बाद मे राहबारी का अपभ्रंश होने से रेबारी के नाम से पहचानने लगे,बाद मे सोलाह की जो संतति जिनकी शाख(गौत्र) राठोड,परमार,सोँलकी, मकवाणा आदी रखी गयी ज्यो-ज्यो वंश आगे बढा रेबारी जाति अनेक शाखाओँ (गोत्र) मेँ बंट गयी। वर्तमान मेँ 133 गोत्र या शाखा उभर के सामने आयी है जिसे विसोतर के नाम से भी जाना जाता है ।

निवास क्षेत्र[संपादित करें]

मुख्यत:रैबारी जाति भारत के गुजरात , राजस्थान ,हरियाणा ,पंजाब ,मध्यप्रदेश , नेपाल और पाकिस्तान मैं भी  निवास करती है। [1][2] इनको अलग- अलग नामों से जाना जाता है। राजस्थान के पाली, सिरोही ,जालोर जिलों में रैबारी दैवासी के नाम से जाने जाते हैं। उत्तरी राजस्थान जयपुर और जोधपुर संभाग में इन्हें 'राईका' नाम से जाना जाता है हरियाणा और पंजाब में भी इस जनजाति को राईका ही कहा जाता है। गुजरात और मध्य राजस्थान में इन्हें रैबारी,रबारी देसाई गोपालक और हीरावंशी  नाम से भी पुकारा जाता है।   

रैबारी लोगो के प्रमुख त्यौहार  नवरात्री, दिवाली ,होली और जन्माष्ठमी है।  भारत मैं करीब ४ करोड़ से भी ज्यादा की इनकी जनसंख्या है। पशुपालन ही इनका प्रमुख व्यवसाय रहा था।  राजस्थान और  कच्छ प्रदेश मैं बसने वाले रबारी लोग उत्तम कक्षा के  ऊटो  को पालते आए है।  तो गुजरात और उत्तर प्रदेश के रैबारी गाय,भेस,भेल और बकरियां जैसे जानवर भी पालते है। गुजरात, उत्तर प्रदेश और सौराष्ट्र के रबारी लोग खेती भी करते है। मुख्यत्व पशुपालन और खेती इनका व्यवसाय था पर बारिश की अनियमित्ता बढते उद्योग और ज़मीन की कमी की वजह से यह जाती के लोगों ने  अन्य व्यवसायों को अपनाया है। पिछले कुछ सालो मैं शैक्षणिक क्रांति आने की वजह से इस जाती के लोगों के जीवन मैं काफी बदलाव आया है।   सामाजिक, राजकीय और सिविल सर्विसिस मैं यह जाती के लोग काफी आगे बढ़ रहे हैं बहोत सारे  रैबारी लोग विदेशो मैं भी रहते है।              

बस्तियां[संपादित करें]

भोजन[संपादित करें]

वस्त्र[संपादित करें]

समाज[संपादित करें]

रैबारी की अधिकांश जनसंख्या राजस्थान के जालोर एवम् सिरोही -पाली एव बाँसवाड़ा ज़िलों में है।

एव कुछ डूंगरपुर उदयपुर मैं भी निवासरत है

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Flavoni, Francesco D'orazi (1990). Rabari: A Pastoral Community of Kutch. Indira Gandhi National Centre for Arts and Brijbasi Printers. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-8-17107-026-8.
  2. Davidson, Robyn (November 1, 1997). Desert Places, pastoral nomads in India (the Rabari). Penguin. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-0-14-026797-6.