रेतीला तूफान

रेतीला तूफ़ान एक मौसम संबंधी घटना है, जो मुख्यतः शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में होती है।[1] इस दौरान ढीली रेत और मिट्टी तेज़ हवाओं के साथ उड़ जाती है। इसका प्रमुख कारण लवणीकरण की प्रक्रिया है, जिसमें हवा की गति बढ़ने पर रेत के कण सतह से उछलते हैं और टकराकर छोटे धूलकण हवा में निलंबित हो जाते हैं। तेज हवाओं में रेत और धूल तीन प्रक्रियाओं—निलंबन,, लवणीकरण, और विसर्पण—के माध्यम से गति करती हैं।
कारण
[संपादित करें]भौतिक प्रभाव के रूप में, रेतीला तूफ़ान अक्सर मोटी धूल की दीवार के रूप में दिखाई देता है, जिसकी ऊँचाई लगभग 1.6 किलोमीटर तक हो सकती है। ये तुफान मरूस्थलीय भागों में कई नाम से प्रसिद्ध है। सहारा रेगिस्तान के तूफ़ानों को सिमूम कहा जाता है, जबकि सूडान के खार्तूम क्षेत्र में हबूब प्रसिद्ध है। सहारा रेगिस्तान विश्व का सबसे बड़ा धूल-आपूर्तिकर्ता है, विशेष कर शुष्क क्षेत्र से उठी तूफान अटलांटिक महासागर से होते हुए यूरोप तक पहुँचती जाती है।
2008 के एक अध्ययन में पाया गया कि रेत के कणों का घर्षण से एक स्थिर विद्युत धारा उत्पन्न होती है। इस प्रक्रिया में रेत के कण ज़मीन के सापेक्ष ऋणात्मक आवेग धारण कर लेते हैं, जिससे अन्य कण हलके होकर हवा में उड़ते हैं।[2]
भौतिक और पर्यावरणीय प्रभाव
[संपादित करें]ये तूफ़ान स्थानीय और वैश्विक जलवायु तथा पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करते हैं। सहारा से उठी धूल भूमध्यसागर के वायुमंडल में पहुँचकर यूरोप तक जा सकती है। इस प्रकार, रेत और धूल के तूफ़ान न केवल स्थानीय जीवन और कृषि को प्रभावित करते हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी जलवायु, वायुमंडलीय प्रक्रियाएँ और पारिस्थितिकी तंत्र पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालते हैं।
यह भी देखें
[संपादित करें]संदर्भ
[संपादित करें]- ↑ "Airborne Dust:हवा में मौजूद धूल: मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण और समाज के लिए खतरा". डब्ल्यूएमओ – बुलेटिन: Vol 64 (2) – 2015. 2022. मूल से से दिसंबर 18, 2023 को पुरालेखित।.
- ↑ "यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के विद्युत रेत निष्कर्ष" Jan. 6, 2008". Eurekalert.org. 2008-01-07. 2016-05-20 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 2016-12-04.