रेगोलिथ
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क्षुद्रग्रह 433 इरोस की सतह पर रेगोलिथ (आवरण प्रस्तर) की मोटी परत। |
रेगोलिथ या आवरण प्रस्तर ठोस चट्टान को ढकने वाली ढीली, असंगठित और विषम मलबे की एक विस्तृत परत होती है। इसमें धूल, टूटी हुई चट्टानों के टुकड़े और अन्य संबंधित सामग्रियां शामिल होती हैं। यह पृथ्वी, चंद्रमा, मंगल, विभिन्न क्षुद्रग्रहों और अन्य स्थलीय ग्रहों तथा उपग्रहों की सतह पर बहुतायत में पाई जाती है।[1][2]
व्युत्पत्ति
[संपादित करें]'रेगोलिथ' शब्द दो प्राचीन यूनानी शब्दों के मेल से बना है: 'रेगोस' जिसका अर्थ है 'कंबल' या 'आवरण' और 'लिथोस' जिसका अर्थ है 'चट्टान' या 'प्रस्तर'। अमेरिकी भूवैज्ञानिक जॉर्ज पर्किन्स मेरिल ने पहली बार 1897 में इस शब्द को परिभाषित करते हुए कहा था कि चट्टानों के अपक्षय या पौधों के विकास से उत्पन्न ढीली सामग्रियों के इस पूरे आवरण को रेगोलिथ कहा जाना चाहिए।[3]
पृथ्वी पर रेगोलिथ
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पृथ्वी के रेगोलिथ को निम्नलिखित मुख्य भागों और घटकों में विभाजित किया जा सकता है:[4]
1. मिट्टी: रेगोलिथ का सबसे ऊपरी भाग जिसमें कार्बनिक पदार्थ प्रचुर मात्रा में होते हैं और जो जीवन का आधार है।
2. परिवर्तित आवरण: इसमें नदियों द्वारा बहाकर लाई गई जलोढ़ मिट्टी, हवा द्वारा उड़ाई गई धूल, और हिमनदों द्वारा छोड़ा गया मलबा शामिल है।
3. सैप्रोलिथ: रासायनिक रूप से अपक्षयित और टूटी हुई अंतर्निहित चट्टानें।
4. ड्यूरीक्रस्ट: लवणों, सिलिकेट और लोहे के ऑक्साइड के जमाव से कठोर हुई परतें जो क्षरण का विरोध करती हैं।
पृथ्वी पर जीवन के लिए रेगोलिथ अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि अधिकांश पौधे ठोस चट्टानों पर नहीं उग सकते और विभिन्न जीव मलबे के बिना अपने बिल या आश्रय नहीं बना सकते हैं।[5] यह भूजल के पुनर्भरण का भी मुख्य माध्यम है। इसके अलावा, सड़कों और इमारतों के निर्माण के समय सिविल इंजीनियरों के लिए रेगोलिथ के यांत्रिक गुणों को समझना आवश्यक होता है।[6]
चंद्रमा पर रेगोलिथ
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चंद्रमा की लगभग पूरी सतह रेगोलिथ से ढकी हुई है। केवल बहुत खड़ी खाइयों और क्रेटर की दीवारों पर ही ठोस मूल चट्टानें दिखाई देती हैं। चंद्रमा पर रेगोलिथ का निर्माण पिछले 4.6 अरब वर्षों में बड़े और छोटे उल्कापिंडों तथा सूक्ष्म उल्कापिंडों की निरंतर बमबारी के कारण हुआ है।[7]
अत्यधिक गति से टकराने वाले इन उल्कापिंडों की ऊष्मा से धूल के कण पिघलकर आपस में जुड़ जाते हैं और कांच जैसी नुकीली संरचनाएं बनाते हैं। मारिया क्षेत्रों में इसकी मोटाई 4 से 5 मीटर और पुराने पर्वतीय क्षेत्रों में इसकी मोटाई 10 से 15 मीटर तक होती है।[8] 30 माइक्रोमीटर से कम व्यास वाले इसके सबसे महीन हिस्से को 'चंद्र धूल' कहा जाता है।
मंगल पर रेगोलिथ
[संपादित करें]मंगल ग्रह रेत और धूल के विशाल मैदानों से ढका हुआ है। वहां का वायुमंडल बहुत विरल है, लेकिन तेज हवाएं अक्सर पूरे ग्रह पर बड़े धूल भरे तूफान पैदा करती हैं।[9] मंगल की धूल इतनी महीन है कि यह हवा में तैरती रहती है, जिससे वहां का आकाश लाल रंग का दिखाई देता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि मंगल के भूमध्यरेखीय क्षेत्रों के रेगोलिथ के भीतर बड़ी मात्रा में पानी और कार्बन डाइऑक्साइड बर्फ के रूप में जमे हुए हैं, जिसकी पुष्टि नासा के फिनिक्स मिशन ने भी की थी।[10]
क्षुद्रग्रहों पर रेगोलिथ
[संपादित करें]अंतरिक्ष अभियानों से पता चला है कि छोटे क्षुद्रग्रहों पर भी टकरावों के कारण रेगोलिथ की परत बन जाती है। नासा के 'नियर शूमेकर' मिशन ने क्षुद्रग्रह 433 इरोस पर मलबे के बड़े आवरण की पुष्टि की थी।[11] इसके बाद जापान के 'हायबुसा' मिशन ने ईतोकावा और 'हायबुसा 2' ने रियूगु क्षुद्रग्रह से रेगोलिथ के कण सफलतापूर्वक एकत्र किए।[12][13] वर्ष 2023 में नासा के ओसिरिस-रेक्स मिशन ने बेन्नू क्षुद्रग्रह की सतह से कार्बन और पानी से समृद्ध रेगोलिथ के ऐतिहासिक नमूने पृथ्वी पर वापस लाकर इस क्षेत्र में नई खोजों का मार्ग प्रशस्त किया है।[14]
टाइटन पर बर्फ-रेगोलिथ
[संपादित करें]शनि के सबसे बड़े उपग्रह टाइटन पर मीथेन नदियों द्वारा कटे हुए पानी के बर्फ के टुकड़ों और वायुमंडल से गिरने वाले कार्बनिक पदार्थों से बने विशाल रेत के टीले पाए जाते हैं। चूंकि टाइटन की सतह का तापमान अत्यधिक कम है, इसलिए वहां जमी हुई बर्फ सामान्य चट्टानों की तरह व्यवहार करती है। भूवैज्ञानिक इस महीन रेगोलिथ को 'बर्फ-रेगोलिथ' कहते हैं, जो पृथ्वी के रेगोलिथ की तरह ही वायु और तरल प्रक्रियाओं द्वारा आकार लेता है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के 'हाइगेन्स प्रोब' ने भी टाइटन की सतह पर इसकी पुष्टि की थी।[15]
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ एन्साइक्लोपीडिया ब्रिटानिका: रेगोलिथ की परिभाषा और इसके भूवैज्ञानिक गुण
- ↑ "ऑक्सफोर्ड लेक्सिको डिक्शनरी: रेगोलिथ शब्द का व्यापक अर्थ". मूल से से 28 अप्रैल 2021 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 14 जून 2026.
- ↑ Merrill, G. P. (1897). Rocks, rock-weathering and soils. MacMillan Company.
- ↑ Taylor, G.; Eggleton, R.A. (2001). Regolith geology and geomorphology. John Wiley & Sons.
- ↑ Scott, Keith M.; Pain, Colin (2009). Regolith Science. CSIRO Publishing.
- ↑ Ollier, Cliff; Pain, Colin (1996). Regolith, soils and landforms. John Wiley.
- ↑ लूनर सोर्सबुक: चंद्रमा के रेगोलिथ और पर्यावरण के लिए एक उपयोगकर्ता गाइड
- ↑ McKay, David S.; Heiken, Grant (1991). "The Lunar Regolith". Lunar Sourcebook. Cambridge University Press.
- ↑ नासा मंगल अन्वेषण कार्यक्रम: लाल ग्रह की सतह और वातावरण का विवरण
- ↑ "नासा फिनिक्स मार्स मिशन: मंगल ग्रह पर बर्फ और रेगोलिथ के साक्ष्य". मूल से से 4 सितंबर 2019 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 14 जून 2026.
- ↑ साइंस जर्नल: नियर शूमेकर द्वारा क्षुद्रग्रह 433 इरोस पर जटिल रेगोलिथ की इमेजिंग
- ↑ जाक्सा: हायबुसा मिशन और क्षुद्रग्रह कणों का विश्लेषण[मृत कड़ियाँ]
- ↑ नेचर एस्ट्रोनॉमी: सी-टाइप क्षुद्रग्रह रियूगु से लौटे हायबुसा 2 नमूनों का विश्लेषण
- ↑ नासा प्रेस रिलीज: ओसिरिस-रेक्स द्वारा बेन्नू क्षुद्रग्रह से लाए गए रेगोलिथ सैंपल[मृत कड़ियाँ]
- ↑ ईएसए: कैसिनी-हाइगेन्स मिशन द्वारा टाइटन की सतह और बर्फ-रेगोलिथ का अध्ययन