रूपसिह चंदेल

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रूपसिह चंदेल (जन्म : १२ मार्च १९५१) हिन्दी लेखक हैं। १२ मार्च १९५१ को कानपुर के गाँव नौगवां (गौतम) में जन्मे वरिष्ठ कथाकार रूपसिंह चन्देल कानपुर विश्वविद्यालय से एम.ए. (हिन्दी), पी-एच.डी. हैं।

अब तक उनकी ७२ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।

  • १६ उपन्यास जिसमें से 'रमला बहू', 'पाथरटीला', 'नटसार', 'शहर गवाह है','गलियारे', 'गुलाम बादशाह','कानपुर टु कालापानी' और 'बस्ती बरहानपुर'- अधिक चर्चित रहे हैं,
  • १७ कहानी संग्रह,
  • ३ किशोर उपन्यास,
  • १० बाल कहानी संग्रह,
  • ४ संस्मरण पुस्तकें
  • ५ आलोचना पुस्तकें
  • २ लघु-कहानी संग्रह,
  • यात्रा संस्मरण, आलोचना, अपराध विज्ञान,
  • ४ संपादित पुस्तकें

इनके अतिरिक्त बहुचर्चित पुस्तक 'दॉस्तोएव्स्की के प्रेम' (जीवनी) संवाद प्रकाशन, मेरठ से प्रकाशित से प्रकाशित हुई है। उन्होंने रूसी लेखक लियो तोल्स्तोय Leo Tolstoy के अंतिम उपन्यास 'हाजी मुराद'और तोलस्तोय पर ३० संस्मरणों का अनुवाद 'तोलस्तोय का अंतरंग संसार' शीर्षक से और हेनरी त्रोयत लिखित तोलस्तोय की जीवनी 'तोलस्तोय' (६५६ पृ.) का अनुवाद किया। सभी अनूदित पुस्तकें संवाद प्रकाशन,मेरठ से प्रकाशित। सम्प्रति : स्वतंत्र लेखन, दो चिट्ठे- रचना समय और वातायन।

विशेष- १.रूपसिंह चन्देल:व्यक्तित्व, विचार एवं कृतित्व -सम्पादक-माधव नागदा

२.रूपसिंह चन्देल का साहित्यिक मूल्यांकन-सम्पादक- डॉ.माधव सक्सेना 'अरविंद'.

३. रूपसिंह चन्देल के उपन्यास:एक दृष्टि - सम्पा.शशि काण्डपाल

४.रूपसिंह चन्देल की कहानियों में जन-चेतना और मानवीय संवेदना - सम्पा. डॉ.पंकज साहा

५. २५ छात्रों द्वारा पी-एच.डी. और एम.फिल.

पुस्तकों के अनुवाद : (१) १० उपन्यासों के मराठी भाषा में अनुवाद। उपन्यास--'रमला बहू', 'पाथर टीला', 'नटसार', 'गुलाम बादशाह' 'गलियारे', 'खुदीराम बोस', 'करतारसिंह सराभा', 'दग़ैल', 'कानपुर टु कालापानी', और 'बस्ती बरहानपुर' (सभी उपन्यासों के अनुवाद डॉ.सुशीला दुबे)। मराठी प्रकाशक -अथर्व प्रकाशन,कोल्हापुर, महाराष्ट्र।

(२) 'खुदीराम बोस', 'कानपुर टु कालापानी' और 'करतारसिंह सराभा' उपन्यासों के कन्नड़ भाषा में अनुवाद। प्रकाशक- Kuvempu Bhasha Bharti Pradhikaran,Banglore ।

३. किशोर उपन्यास 'क्रान्तिदूत अजीमुल्ला खां' का अनुवाद पंजाबी और असमिया भाषाओं में। पंजाबी अनुवाद -श्री बलबीर मधोपुरी। प्रकाशक - 'प्रकाशन विभाग',भारत सरकार।

४. कहानियां मराठी,कन्नड़,पंजाबी, गुजराती और अंग्रेज़ी भाषा में अनूदित।

पुरस्कार/सम्मान - हिन्दी अकादमी दिल्ली (1990,2000),उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान (1994) और आचार्य निरंजननाथ सम्मान (2013).