रुड़की विश्वविद्यालय

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रूड़की विश्वविधालय

स्थापित1847
प्रकार:सार्वजनिक
अवस्थिति:रूड़की, भारत

रूड़की विश्वविधालय भारत का पहला अभियांत्रिकी विश्वविधालय था जिसे 1847 में शुरु किया गया था। 21 सितंबर 2001 को इसका नाम बदल कर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आई आई टी रूड़की) कर दिया गया है।

इतिहास[संपादित करें]

रुड़की कॉलेज की स्थापना 1847 में लॉर्ड डलहौजी द्वारा, भारत के सबसे पहले इंजीनियरिंग कॉलेज के रूप में हुई थी। लेकिन इस कॉलेज मे इंजीनियरिंग की पढा़ई का कार्य 1845 में ही शुरु कर दिया गया था और इसका कारण, उस समय शुरु हुए लोक निर्माण कार्य में सहायता देने के लिए स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित करना था।[1] 1854 में कॉलेज का नाम बदल कर गंगा नहर के प्रभारी मुख्य इंजीनियर और 1843-53 के बीच रहे भारत के लेफ्टिनेंट गवर्नर सर जेम्स थॉमसन के नाम पर थॉमसन सिविल इंजीनियरिंग कॉलेज कर दिया गया। सन 1948 में संयुक्त प्रांत (उत्तर प्रदेश) ने अधिनियम संख्या IX के द्वारा कॉलेज के प्रदर्शन और स्वतंत्रता के बाद के भारत निर्माण के कार्य में इसकी क्षमता को ध्यान में रखते हुए को इसे विश्वविद्यालय का दर्जा प्रदान किया। स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू, ने 1949 नवंबर में चार्टर प्रस्तुत कर कॉलेज का रुतबा बढ़ाकर इसे स्वतंत्र भारत का पहला अभियांत्रिकी विश्वविद्यालय घोषित किया।

21 सितम्बर 2001 को संसद में एक विधेयक पारित करके इस विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित किया गया था और इसे रुड़की विश्वविद्यालय से बदलकर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-रुड़की कर दिया गया।

पाठ्यक्रम और प्रवेश[संपादित करें]

आई.आई.टी. रूड़की, अभियांत्रिकी और वास्तुकला के 10 विषयों में स्नातक उपाधि पाठ्यक्रम उपलब्ध कराता है, इनके साथ ही यह इंजीनियरिंग, अनुप्रयोगिक विज्ञान और वास्तुकला और योजना से संबंधित 55 स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम भी उपलब्ध कराता है। संस्थान के सभी विभागों और अनुसंधान केन्द्रों में शोध कार्य की सुविधा है।

आई.आई.टी., बी.टेक. और बी.आर्क. पाठ्यक्रमों में आईआईटी-संयुक्त प्रवेश परीक्षा में प्रतिभागी के प्रदर्शन के आधार पर प्रवेश देता है, जिसे पूरे भारत में विभिन्न केन्द्रों पर प्रति वर्ष आयोजित किया जाता है। रुड़की विश्वविद्यालय ने ब्रिटिश शासन के समय जब इंजीनियरिंग शिक्षा राष्ट्रमंडल के केवल कुछ चुनिंदा देशों में ही शुरु की गई थी, के दौरान इस विश्वविद्यालय ने भारत में इंजीनियरिंग पूल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। गंगा नहर के विकास और रखरखाव में इंजीनियरिंग कार्य में सहायता के उद्देशय से शुरु हुआ यह संस्थान आज अभियांत्रिकी शिक्षा के क्षेत्र में देश का एक अग्रणी संस्थान है।

सन्दर्भ[संपादित करें]