रुद्रप्रयाग का आदमखोर तेंदुआ

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
जिम कॉर्बेट १९२५ में रुद्रप्रयाग के आदमखोर तेंदुए को मारने के बाद

रुद्रप्रयाग का आदमखोर तेंदुआ भारत के उत्तरांचल राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में हुआ था। प्रसिद्ध शिकारी एवं लेखक जिम कॉर्बेट द्वारा मार दिये जाने से पूर्व वह १२५ से ज्यादा लोगों को मार चुका था। मारे गए पुशओं की तो कोई गिनती ही न थी।

तेंदुए ने अपना पहला शिकार जिले के गाँव बेंजी के एक व्यक्ति को बनाया था। इसका आतंक इतना ज्यादा था कि लोग शाम होते ही घरों से निकलना बन्द कर देते थे। आठ सालों तक किसी की हिम्मत न होती थी केदारनाथ से बद्रीनाथ के बीच की सड़क पर रात को अकेला चल सके क्योंकि यह तेंदुए के क्षेत्र में पड़ता था। रात को बहुत कम लोग कोई विशेष काम होने पर ही घर से निकलते थे। तेंदुआ खाने के लिए इतना उतावला था कि वह दरवाजे तोड़ देता था, खिड़कियों से कूद जाता था, घरों और झोपड़ियों की दीवारों पर चढ़ जाता था। इसके बारे में स्थानीय लोग बताते हैं कि इसकी गति इतनी तेज थी कि सुबह किसी गाँव/क्षेत्र में दिखाई देता था और शाम को किसी और। आमतौर पर उत्तरांचल में बाघ पाए जाते हैं, अनुमान लगाया जाता है कि यह तेंदुआ किसी अन्य स्थान से आया होगा।

लोगों ने तेंदुए को मारने की काफी कोशिश की। तेंदुए के धोखे में कई दूसरे बाघ मारे गए लेकिन सफलता न मिली। १९२५ में ब्रिटिश पार्लियामेण्ट ने आयरिश मूल के प्रसिद्ध भारतीय शिकारी जिम कॉर्बेट की मदद लेने का अनुरोध किया। जिम कॉर्बेट ने काफी दिनों तक जाल बिछाने के बाद तेंदुए को रुद्रप्रयाग शहर में गुलाबरे नामक स्थान पर मार गिराया। मारे जाने से पहले उस दिन तेंदुए ने वहीं गुफा में रहने वाले एक साधु को मारा था। शहर में उस स्थान पर जहाँ तेंदुआ मारा गया था एक स्मारक बना है तथा साइन बोर्ड लगा है। वह स्थान वर्तमान में सेना के नियंत्रण में है।

कॉर्बेट के नोट्स से पता चलता है कि यह तेंदुआ दाँत खोने से पीड़ित था। कॉर्बेट एवं अन्य शिकारियों द्वारा मारे गए विभिन्न आदमखोरों के बारे में किए गए एक हालिया अध्ययन में ऐसा देखा गया कि पशु बीमार होने पर या फिर अपने सामान्य शिकार का शिकार कर पाने में अक्षम होने पर आदमखोर बन जाते थे, जिनका शिकार करना और मारना जंगली जानवरों की अपेक्षा आसान था।

मीडिया में[संपादित करें]

उपरोक्त तेंदुए पर सन २००५ में The Man-Eating Leopard of Rudraprayag नामक अंग्रेजी टीवी फिल्म भी बनी।[1]

उपरोक्त तेंदुए पर एक गढ़वाली लेखक विशालमणि जी द्वारा एक किताब भी लिखी गई जिसमें लोकगीतों के रुप में तेंदुए की कहानी है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  • जिम कॉर्बेट (जो कि एक लेखक भी थे), ने तेंदुए पर The Man-Eating Leopard of Rudraprayag नामक किताब लिखी है जो कि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रैस द्वारा प्रकाशित है (ISBN 0-19-562256-1)।

यह भी देखें[संपादित करें]