रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016

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रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016
Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016
An Act to establish the Real Estate Regulatory Authority for regulation and promotion of the real estate sector and to ensure sale of plot, apartment of building, as the case may be, or sale of real estate project, in an efficient and transparent manner and to protect the interest of consumers in the real estate sector and to establish an adjudicating mechanism for speedy dispute redressal and also to establish the Appellate Tribunal to hear appeals from the decisions, directions or orders of the Real Estate Regulatory Authority and the adjudicating officer and for matters connected therewith or incidental thereto.
शीर्षक No. 16 of 2016
द्वारा अधिनियमित भारतीय संसद
पारित करने की तिथि 15 March 2016
पारित करने की तिथि 10 March 2016
अनुमति-तिथि 25 March 2016
हस्ताक्षर-तिथि 25 March 2016
शुरूआत-तिथि 01 May 2016 (69 of 92 sections notified)
विधायी इतिहास
विधेयक (प्रस्तावित कानून) Real Estate (Regulation and Development) Bill, 2016
विधेयक का उद्धरण XLVI-C of 2013
बिल प्रकाशन की तारीख 14 August 2013
द्वारा पेश Dr. Girija Vyas, Minister of Housing and Urban Poverty Alleviation
समिति की रिपोर्ट

Standing Committee Report

Select Committee Report
Status: प्रचलित

रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 (The Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016) भारतीय संसद का एक अधिनियम है जो घरेलू खरीददारों की रक्षा करने के साथ-साथ स्थावर सम्पदा (रियल एस्टेट) में पूँजी निवेश को बढ़ावा देने में मदद करता है। यह अधिनियम राज्यसभा में १० मार्च २०१६ को तथा लोकसभा में १५ मार्च २०१६ को पारित हुआ था। इसकी ९२ में से ६९ धाराओं को लागू करते हुए इस अधिनियम को ०१ मई २०१६ से लागू कर दिया गया।[1]

इस अधिनियम के मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं –

  • राज्य स्तर पर ‘रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण’ (RERA) के गठन का प्रावधान।
  • त्वरित न्यायाधिकरणों द्वारा विवादों का 60 दिन के भीतर समाधान।
  • 500 वर्ग मीटर या 8 अपार्टमेंट तक की निर्माण योजनाओं को छोड़कर सभी निर्माण योजनाओं को रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण में पंजीकरण कराना अनिवार्य है।
  • ग्राहकों से ली गई 70 प्रतिशत धनराशि को अलग बैंक में रखने एवं उसका केवल निर्माण कार्य में प्रयोग का प्रावधान।
  • परियोजना संबंधी जानकारी जैसे-प्रोजेक्ट का ले-आउट, स्वीकृति, ठेकेदार एवं प्रोजेक्ट की मियाद का विवरण खरीददार को अनिवार्यतः देने का प्रावधान।
  • पूर्वसूचित समय-सीमा में निर्माण कार्य पूरा न करने पर बिल्डर द्वारा उपभोक्ता को ब्याज के भुगतान का प्रावधान। यह उसी दर पर होगा जिस दर पर वह भुगतान में हुई चूक के लिए उपभोक्ता से ब्याज वसूलता।
  • रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण के आदेश की अवहेलना की स्थिति में बिल्डर के लिए 3 वर्ष की सजा व जुर्माने का प्रावधान एवं रियल एस्टेट एजेंट और उपभोक्ता के लिए 1 वर्ष की सजा का प्रावधान।

इतिहास[संपादित करें]

स्थावर सम्पदा क्षेत्र के लिए कानून का प्रस्ताव पहली बार जनवरी, 2009 में राज्यों एवं संघ क्षेत्रों के आवास मंत्रियों की राष्ट्रीय बैठक में पारित किया गया था। आवासीय और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय ने इस संबंध में आठ वर्षों के लंबे प्रयासों के बाद 01 मई, 2016 को प्रभावी होने वाले इस अधिनियम में अधिनियम के कुल 92 अनुच्छेदों के 69 को अधिसूचित किया।

01 मई, 2016 को अधिनियम के प्रारंभ होने की अधिसूचना के अनुसार, इस अधिनियम के अंतर्गत नियमों को केन्द्र और राज्य सरकारों के द्वारा अधिनियम की धारा 84 के अंतर्गत 31 अक्टूबर, 2016 तक अधिकतम छह माह की अवधि के भीतर नियम तैयार करने होंगे। विधायिकाओं से रहित केन्द्र शासित प्रदेशों के लिए आवासीय और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय जबकि दिल्ली के लिए शहरी विकास मंत्रालय नियम बनाएगा।

०१ मई २०१७ से यह अधिनियम लागू हो गया।

सन्दर्भ[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]