रिचर्ड चैंसलर

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रिचर्ड चैंसलर (Richard Chancellor ; जन्म ?- मृत्यु नवंबर १०, १५५६) महान अंग्रेज नाविक तथा अन्वेषक। इन्होने ही सबसे पहले श्वेत सागर को पार किया और रूस से सम्बन्ध स्थापित किये।

परिचय[संपादित करें]

इनका लालन-पालन सर फिलिप सिडनी के पिता के घर बड़े लाड़-प्यार के साथ हुआ था। महासागर तथा नौविद्या में बचपन से ही उन्हें बड़ी अभिरुचि थी। सन् १५५३ में सर ह्यूग विल्लोबी के नेतृत्व में भारत के मार्ग की जानकारी के लिए जो सामुद्रिक अभियान हुआ था उसमें चैंसलर को प्रधान नाविक होने तथा 'एडवर्ड बोना वेंचर' नामक जहाज का नेतृत्व करने का अवसर प्राप्त हुआ। मार्ग में लोफोटेन द्वीपसमूह के समीप तूफान में फँस जाने के कारण जहाज एक दूसरे से अलग हो गए। चैंसलर वार्डोएहूस (Vardoehuus) नामक पूर्व निर्धारित स्थान पर एक सप्ताह तक अन्य जहाजों की प्रतीक्षा करते रहे। तदनंतर वह श्वेत सागर (White sea) में एकाकी आगे बढ़े और वहाँ लंगर डालकर मास्को की यात्रा की। वहाँ उनका बड़ा आदर सत्कार हुआ और उन्होंने इंग्लैंड की ओर से एक व्यापारिक संधि की जिसके अनुसार अंग्रेजी जहाजों को व्यापार करने की सुविधा प्राप्त हुई। इंग्लैंड लौट कर उन्होंने अपनी रिपोर्ट दी जिसके आधार पर मस्कोवी कंपनी (Muscovy Company) का सृजन हुआ। १५५५ की ग्रीष्म ऋतु में वे अपने पुराने जहाज पर पुन: श्वेत सागर गए और मास्को की दूसरी यात्रा की। जुलाई, १५५६ में स्वेदश लौटते समय ऐबरडीनशिर से कुछ दूर ऐबर्डोर में तूफान में फँस जाने के कारण उनका जहाज नष्ट हो गया और १० नवम्बर १५५६ को उनका देहांत हो गया। उन्होंने रूस के के विषय में एक विवेचनात्मक निबंध भी लिखा।