राष्ट्रीय पादप जीनोम अनुसंधान केन्द्र, नई दिल्‍ली

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राष्ट्रीय पादप जीनोम अनुसंधान केन्द्र, नई दिल्ली की स्थापना बायोटेक्नोलॉजी विभाग, भारत सरकार द्वारा भारत की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ तथा प्रोफेसर (डॉ॰) जे.सी.बोस की जन्मतिथि के उपलक्ष्य पर की गई। इसकी औपचारिक घोषणा 30 नवम्बर 1997 में की गई।

स्थापना[संपादित करें]

इस केन्द्र की स्थापना स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय स्थित डीबीटी प्रायोजित पादप आण्विक जीवविज्ञान केन्द्र (सीपीएमबी) के तत्वावधान में पादप आण्विक जीवविज्ञान के मौलिक तथा अनुप्रयुक्त पहलुओं के विभिन्न विधाओं पर गहन अनुसंधान के परिणामस्वरूप हुई। तत्पश्चात सीपीएमबी को शुरू करने वाले चार प्रधान अन्वेषकों की अनुसंधान परियोजनाएं केन्द्र के चालु अनुसंधान कार्यक्रमों में शामिल हैं। जीनोमिक अनुसंधान को जारी रखने के लिए चिकपी (साइसरो एरियेटिनम) को केन्द्र के एक प्रमुख फसल के रूप में पहचान करने के साथ-साथ अनुसंधान का फोकस धीरे-धीरे चिकपी जीनोमिक्स की तरफ अग्रसर हो रहा है। इस समय कार्यक्रमों का क्रियान्वयन सीपीएमबी भवन से ही किया जा रहा है और एनसीपीजीआर की अपनी अनुसंधान प्रयोगशालाओं के निर्माण होने तक यही से इन कार्यक्रमों को जारी रखने की आशा की जाती है।

जीनोम[संपादित करें]

जीनोम शब्द का तात्पर्य किसी जीव के जीनों के संपूर्ण समूह से है तथा जीनोमिक्स का तात्पर्य जीनोम के चित्रण, अनुक्रमण एवं विश्लेषण की वैज्ञानिक विधा से है। जीनोमिक अनुसंधान में यह समझना होता है कि जीन्स तथा जीनोम की संरचना कैसी होती है, यह बनते कैसे हैं और यह किस प्रकार कार्य करते हैं ? फसल प्रजातियों के अध्ययन के लिए जीनोमिक्स का अनुप्रयोग अपनी क्रिया के साथ डीएनए अनुक्रमों पर सूचना के संयोजन के लिए नए-नए उपायों की खोज हेतु विशेष अवसर प्रदान करना है। पादप जीनोम की ज्ञान की आवश्यकता पादप में सुधार प्रक्रिया में तेजी लाने, खाद्य सुरक्षा को और अधिक आश्वासन देने, पादप उत्पादों के प्रयोग में वृद्धि करने और पारंपरिक प्रयोगों से भी आगे फसल पादपों की उपयोगिता और मूल्य को बढाने के लिए होती है।

पादपों की आनुवंशिक गठन और उनकी जीनों की क्रिया को समझने से पादप उत्पादन में सुधार के लिए पारंपरिक पध्दतियों को अत्यधिक बढावा मिल पाएगा। राष्ट्रीय पादप जीनोम अनुसंधान केन्द्र (जो औपचारिक रूप से 16 जुलाई 1998 को रजिस्ट्रार ऑफ सोसाइटीज, दिल्ली में पंजीकृत है) ने केवल एक प्रशासनिक ढांचे और 5 सदस्यों वाले सचिवालय स्टाफ के साथ अप्रैल, 1998 में कार्य करना शुरू कर दिया था। केन्द्र ने 19 वैज्ञानिक एवं तकनीकी स्टाफ भी शामिल कर लिया है जिनमें से बायोटेक्नोलॉजी विभाग द्वारा स्थापित पादप आण्विक जीवविज्ञान केन्द्र (सीपीएमबी), जिसे 1.4 1998 के तत्काल प्रभाव से केन्द्र के संघ ज्ञापन के धारा ��खख के अनुरूप एनसीपीजीआर में एकीकृत कर दिया गया है, के 7 वैज्ञानिक हैं। चूंकि केन्द्र का अपना भवन अभी तैयार होना है इसलिए इसने अपनी अनुसंधान गतिविधियां जेएनयू कैम्पस में पादप आण्विक जीवविज्ञान केन्द्र के भवन से शुरू कर दिया है। इस केन्द्र का कैम्प ऑफिस जेएनयू कैम्पस के इंटरनेशनल गेस्ट-हाऊस में स्थित है।

परिसर[संपादित करें]

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली द्वारा अपने कैम्पस में राष्ट्रीय पादप जीनोम अनुसंधान केन्द्र की स्थापना के लिए 15 एकड़ का भूखण्ड आवंटित किया गया है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]