राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर

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राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) सभी भारतीय नागरिकों का एक रजिस्टर है, इसे 2003-2004 में संशोधित नागरिकता अधिनियम 1955 के अनुसार बनाया गया है। इसे असम राज्य को छोड़कर अभी तक कहीं भी लागू नहीं किया गया है।[1]

असम एक सीमावर्ती राज्य होने के नाते अवैध आव्रजन की अनूठी समस्याएं रहती है। 1951 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर 1951 में राज्य के लिए एनआरसी बनाया गया था।[2] लेकिन बाद में इसका रखरखाव नहीं किया गया। 1983 में अवैध प्रवासी (न्यायाधिकरण द्वारा निर्धारण) अधिनियम को संसद द्वारा पारित किया गया था ताकि असम में अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए एक अलग न्यायाधिकरण प्रक्रिया बनाई जा सके। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 2005 में इसे असंवैधानिक करार दिया, जिसके बाद भारत सरकार ने असम राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर को अद्यतन करने पर सहमति व्यक्त की। एक दशक में अद्यतन प्रक्रिया पर असंतोषजनक प्रगति के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में प्रक्रिया का निर्देशन किया और उसपर निगरानी शुरू की।[1] असम के लिए अंतिम अद्यतित एनआरसी 31 अगस्त 2019 को प्रकाशित हुई, जिसमें 3.3 करोड़ आबादी में से 3.1 करोड़ नाम थे, जिसमें लगभग 20 लाख आवेदक शामिल थे।[3]

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने एनआरसी को पूरे भारत में लागू करने का वादा किया है, लेकिन असम एनआरसी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया। यह माना जाता है कि सूची में कई वैध नागरिक बाहर रह गये थे जबकि अवैध प्रवासी शामिल हो गये थे।[4]

बाहरी कड़ियां[संपादित करें]

NRC Bill क्या है ?[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. गुप्ता, चुनाव संबंधी बयानबाजी से परे 2019.
  2. रोयचौधरी, अनिल (21 फरवरी 1981), "राष्ट्रीय नागरिक पंजी, 1951", आर्थिक और राजनीतिक साप्ताहिक, 16 (8): 267–268, JSTOR 4369558
  3. NRC की अंतिम सूची: असम के नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर पर अपना नाम कैसे और कहाँ से जाँचना है Archived 18 दिसम्बर 2019 at the वेबैक मशीन., इंडिया टूड़े, 31 अगस्त 2019.
  4. असम में एनआरसी पर भाजपा की चिंता, लेकिन भारत में चाहता है रजिस्टर Archived 8 जनवरी 2020 at the वेबैक मशीन., द डिप्लोमेट, 30 अगस्त 2019.