राव बीका

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राव बीका (1438-1504 ई.)

बीका मारवाड़ के शासक राव जोधा का पुत्र था। अपने पिता द्वारा उपहास किए जाने पर वह 1465 ई. में जांगल प्रदेश आ गया। ऐसी मान्यता है कि करणी माता की कृपा ने उन्हें एक नया राज्य स्थापित करने में मदद की। पांडू सिंह जी गोदारा जाट को धोखे से तड़ प्रथा के नाम पर राज छीना। एक अन्य मान्यता के अनुसार राव बीका और सरदार नेर सिंह जाट ने मिलकर जांगल प्रदेश को महाराजा पांडू गोदारा से(राजस्थान में बीकानेर के आस पास का क्षेत्र जांगल प्रदेश कहलाता है।) जीता था, इन बीका और नेरसिंह जाट के नाम पर यह बीकानेर कहलाया।

भाटी, चौहान, खिनिया, कयामखानी आदि स्थानीय ताकतों की बिखराव का फायदा उठाकर उसने कई गाँवों पर अधिकार कर लिया। उसने पूंगल के राव शेखा की पुत्री रंगकँवर से विवाह कर अपनी स्थिति सुदृढ़ कर ली। 1488 में उसने बीकानेर की स्थापना की और इसे राठौड़ सत्ता का दूसरा केंद्र बनाया। उन्होंने देशनोक में करणी माता का मूल मंदिर बनवाया।

सन् 1489 की 15 मई को राव बीका ने बीकानेर में अपनी राजधानी स्थापित की। राजधानी स्थापन करने के पश्चात राव बीका अधिक समय तक राज्य नही कर सके। 17 जून 1504 में राव बीका जी का स्वर्गवास हो गया। राव बीका की शादी में जो पंडित थे मेघासर के मेघ जी उपाध्याय थे,


सन्दर्भ:- माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर(राजस्थान)