रावण हत्था

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रावणस्त्रोन

रावण हत्था एक भारतीय वाद्य यंत्र है। इसकी उत्पत्ति श्रीलंका की हेला सभ्यता से हुई है। यह एक प्राचीन मुड़ा हुआ वायलिन है, जो भारत और श्रीलंका के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में लोकप्रिय है। यह एक प्राचीन भारतीय तानेवाला संगीत वाद्ययंत्र है जिस पर पश्चिमी वाद्य संगीत वाद्य जैसे वायलिन और वायला बाद में आधारित थे।[1][2]

इतिहास[संपादित करें]

मध्यकालीन भारत के इतिहास के दौरान, राजा संगीत के संरक्षक थे; इससे शाही परिवारों में रावण हत्था की बढ़ती लोकप्रियता में मदद मिली। राजस्थान और गुजरात में, राजकुमारों द्वारा सीखा जाने वाला यह पहला संगीत वाद्ययंत्र होता था। राजस्थान की संगीत परंपरा ने महिलाओं के बीच भी रावणहत्था को लोकप्रिय बनाने में सहायता की। इस का उपयोग लोकदेवता पाबूजी कि पड़ नायक जाति के भोपों द्वारा रावणहत्था वाद्ययंत्र के साथ बाॅची जाती है।

जैसलमेर में रावणहत्था बजाता हुआ एक व्यक्ति

पौराणिक कथाओं के अनुसार, रावण हिंदू भगवान शिव के प्रतापी भक्त थे, और उन्होंने रावणहत्था का उपयोग करके उनकी सेवा की। हिंदू महाकाव्य रामायण में, राम और रावण के बीच युद्ध के बाद, हनुमान एक रावणहथा उठाकर उत्तर भारत लौट आये। भारत में, रावणहत्था अभी भी राजस्थान में बजाया जाता है। भारत से, रावणहत्था पश्चिम की ओर मध्य-पूर्व और यूरोप तक पहुंचा, जहां 9वीं शताब्दी में, इसे रावणस्त्रोंग कहा जाने लगा। कुछ लोगों का मानना ​​था कि रावणहत्था भगवान हनुमान द्वारा लंका से भारत लाया गया था।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. सिंह, झुझार. "Interview: Kala Ramnath (इंटरव्यू: कला रामनाथ)". न्यूज़ एक्स. यूट्यूब. मूल से 24 अप्रैल 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि २२ जून २०१७.
  2. एलन, एडवार्ड हेरॉन (1914). Violin-making, as it was and is: Being a Historical, Theoretical, and Practical Treatise on the Science and Art of Violin-making, for the Use of Violin Makers and Players, Amateur and Professional. Preceded by An Essay on the Violin and Its Position as a Musical Instrument (अंग्रेज़ी में). E.Howe. |access-date= दिए जाने पर |url= भी दिया जाना चाहिए (मदद)