रावण संहिता

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रावण के दश मुह मतलब वह किसी भी बात को दश तरिके से समझाने मे सक्षम है वह भविष्य मे [र्क ( रक, रख) ] समाज की पुनर्स्थापना के लिए पुनः जिवित होगा रकीयो, रखीयो के वर्ण की पुनर्स्थापना होगी हमारे सभी मत्र रा से सुरू होते है ये ही सही व भगवान अरिहंत ,निराकार, निरूप, अलख की सही उपासना है

रावण संहिता एक प्राचीन ग्रन्थ है। माना जाता है कि दशानन रावण सभी शास्त्रों का जानकार और श्रेष्ठ विद्वान था। उसने ज्योतिष, तन्त्र, मन्त्र जैसी अनेक पुस्तकों की रचना की थी। इन्हीं में से एक रावणसंहिता है। इसमें रावण ने बिल्व पत्र पूजन का विशेष महत्व बताया है। ज्योतिषशास्त्रियों के अनुसार रावण संहिता के अध्याय 4 में बिल्व वृक्ष से सम्बन्धित बातों का उल्लेख किया है, जिनको अपनाकर अपार लक्ष्मी प्राप्त की जा सकती है।

सन्दर्भ[संपादित करें]