राम प्रकाश

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प्रो॰ राम प्रकाश को १९४९ में भारत से सरकार द्वारा मारीशस बुलाया गया था। उनके हिन्दी, संस्कृत, फ्रेंच और अंग्रेजी ज्ञान के समक्ष सारा मारीशस नतमस्तक था। उन्होंने सरकारी नीति को कार्यरूप देकर स्कूली पाठ्यक्रम में रखा। देश में पहली बार हिन्दी छात्र अध्यापकों का सफल प्रयोग किया गया। आज उनके द्वारा संपादित नवीन हिन्दी पाठ्य-पुस्तक माला को देश की सर्वोत्तम प्राथमिक कक्षाओं की पाठ्य-पुस्तक माना जाता है।[1]


सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. पांडेय, राकेश (जनवरी अक्टूबर-दिसम्बर २००५). मारीशस में हिन्दी एक सिंहावलोकन. गीता कालोनी, नई दिल्ली: प्रवासी संसार. पृ॰ १३-१९. |year= में तिथि प्राचल का मान जाँचें (मदद); |access-date= दिए जाने पर |url= भी दिया होना चाहिए (मदद)