रामोपाख्यान

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महाभारत के वन पर्व में रामोपाख्यान नाम से राम की कथा आयी है।

कथा[संपादित करें]

जब दुष्ट रावण के अत्याचारों से धरा काँपने लगी तो ऋषि और सिद्धगण ब्रह्माजी के पास पहुँचे। अग्निदेव ने ब्रह्माजी से कहा कि आपके वरदान से ही रावण अवध्य हुआ है और अब सम्पूर्ण जगत को त्रास दे रहा है। अतः अब आप ही इस दुष्ट से हमारी रक्षा कीजिए। तब ब्रह्माजी ने उन्हें सांत्वना प्रदान करते हुए कहा कि उनके अनुरोध पर विष्णु भगवान श्रीराम रूप में भूतल पर अवतार लेंगे और वे ही रावण का संहार करेंगे।

उसके बाद ब्रह्मा जी ने देवराज इन्द्र को समस्त देवताओं के संग मिलकर पृथ्वी पर जन्म लेने का आदेश देते हुए कहा कि तुम सब वानरों और रीछों की स्त्रियों से ऐसे वीर पुत्रों को उत्पन्न करो, जो इच्छाधारी और शक्तिशाली हों तथा भगवान श्रीराम की सहायता कर सकें। तब सभी देवता, गंधर्व और नाग अपने-अपने अंश से पृथ्वी पर जन्म लेने के संबंध में विचार-विमर्श करने लगे। उसी समय सभी देवताओं के सामने ही ब्रह्माजी ने दुन्दुभी नाम की एक गंधर्व स्त्री को बुलाया और उसे देवताओं का कार्य सिद्ध करने के लिए पृथ्वी पर जाने की आज्ञा दी।

सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]