रामस्वरुप चतुर्वेदी

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रामस्वरुप चतुर्वेदी (जन्म १९३१ ई॰ -- २००३) एक हिन्दी साहित्यकार हैं।

रामस्वरूप चतुर्वेदी का जन्म में कानपुर में हुआ। चतुर्वेदी जी की आरम्भिक शिक्षा उनके पैतृक गाँव कछपुरा (आगरा) में हुई। चतुर्वेदी जी ने बी॰ए॰ क्राइस्ट चर्च कानपुर से, एम॰ए॰ की उपाधि इलाहाबाद विश्वविद्यालय से १९५२ में, डी॰फिल॰ १९५८ में तथा डी॰लिट॰ की उपाधि १९७२ में प्राप्त की। आप १९५४ से इलाहाबाद विश्व विद्यालय में हिन्दी विभाग में प्राध्यापक रहे।[1] हिन्दी नयी कविता के प्रमुख कवियों-जगदीश गुप्त, रामस्वरुप चतुर्वेदी और विजयदेवनरायण साही में से एक हैं।

उनकी मृत्यु २००३ में हुई थी।[2]

प्रमुख कृतियाँ:-

हिन्‍दी नवलेखन (1960), भाषा और संवेदना (1964), अज्ञेय और आधुनिक रचना की समस्‍या (1968), हिन्‍दी साहित्‍य की अधुनातन प्रवृत्तियां (1969), कामायनी का पुनर्मूल्‍यांकन (1970), मध्‍यकालीन हिन्‍दी काव्‍यभाषा (1974), कविता यात्रा, रत्‍नाकर से अज्ञेय तक (1976), सर्जन और भाषिक संरचना (1980), इतिहास और आलोचक दृष्टि (1982), हिन्‍दी साहित्‍य और संवेदना का विकास (1986), काव्‍यभाषा पर तीन निबंध (1989), प्रसाद, निराला, अज्ञेय (1989), कविता का पक्ष (1994), हिन्‍दी गद्यः विन्‍यास और विकास (1996), आधुनिक कविता यात्रा (1998), आचार्य रामचंद्र शुक्‍ल आलोचना का अर्थ और अर्थ की आलोचना (2001), भक्तिकाव्‍य यात्रा (2002)।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. हिन्दी साहित्य कोश, भाग-2, प्रकाशक- ज्ञानमण्डल लिमिटेड, वाराणसी, प्रधान सम्पादक- धीरेन्द्र वर्मा, प्रथम संस्करण (संवत 2020)
  2. "संग्रहीत प्रति". मूल से 18 नवंबर 2018 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 18 नवंबर 2018.