आचार्य राममूर्ति त्रिपाठी

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आचार्य राममूर्ति त्रिपाठी (जन्म-स्थान: नीवी कलाँ, वाराणसी (उ.प्र.) जन्म - ४ जनवरी १९२९ निधन- ३० मार्च २००९) शिक्षा: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से एम.ए., पी-एच.डी.; साहित्याचार्य, साहित्यरत्न। काव्यशास्त्र एवं दर्शन के प्रकांड पंडित।

हिन्दी एवं संस्कृत के विद्वान एवं समालोचक थे। वे सागर विश्वविद्यालय में प्राध्यापक रहे; विक्रम विश्वविद्यालय में हिन्दी के विभागाध्यक्ष रहे तथा कई विश्वविद्यालयों के अतिथि शिक्षक (विजिटिंग फैकल्टी) भी रहे। वे शब्द शक्ति एवं रस विचार के अप्रतिम व्याख्याकार थे।[1]

जीवनी[संपादित करें]

आचार्य राममूर्ति त्रिपाठी का जन्म वाराणसी के नीवीं कला गाँव में ४ जनवरी सन १९२९ को हुआ था। उन्होने एम ए (हिन्दी साहित्य), पीएचडी एवं डी लिट की उपाधि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से ली थी। श्रीमठ, काशी ने उन्हें जगदगुरू रामानंदाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया था। भारत का ऐसा पहला मठ है जो हर वर्ष संस्कृत-हिन्दी साहित्य के एक विद्वान को एक लाख रुपया देकर सम्मानित करता है।

कृतित्व[संपादित करें]

  • व्यंजना और नवीन कविता
  • भारतीय साहित्य दर्शन
  • औचित्य विमर्श
  • रस विमर्श
  • साहित्यशास्त्र के प्रमुख पक्ष
  • लक्षणा और उसका हिन्दी काव्य में प्रसार
  • रहस्यवाद
  • काव्यालंकार सार संग्रह और लघु वृत्ति की (भूमिका सहित) विस्तृृत व्याख्या
  • नृसिंह चम्पू (व्याख्या)
  • हिन्दी साहित्य का इतिहास
  • कामायनी: काव्य, कला और दर्शन
  • आधुनिक कला और दर्शन
  • भारतीय काव्यशास्त्र: नई व्याख्या
  • तंत्र और संत
  • आगम और तुलसी
  • रस सिद्धांत: नए संदर्भ (प्रस्तोता के रूप में)
  • भारतीय काव्यशास्त्र के नए क्षितिज

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

  • http://drshailendrasharma.blogspot.in/2014/07/blog-post.html?m=1