रामपाल (हरियाणा)
| रामपाल | |
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रामपाल | |
| जन्म |
रामपाल सिंह जाटयान 8 सितम्बर 1951 धनाना, सोनीपत, हरियाणा, भारत |
| राष्ट्रीयता | भारतीय |
| उपनाम | रामपाल दास |
| पेशा | धार्मिक नेता, सतलोक आश्रम के संस्थापक |
| प्रसिद्धि का कारण | कबीर पंथ से प्रेरित संप्रदाय की स्थापना |
रामपाल (जन्म: 8 सितंबर 1951), जिन्हें रामपाल दास के नाम से भी जाना जाता है, एक भारतीय धार्मिक नेता और कबीर पंथ से प्रेरित एक संप्रदाय के संस्थापक हैं। वे हरियाणा के हिसार क्षेत्र में स्थित सतलोक आश्रम के संस्थापक हैं। रामपाल कबीर को सर्वोच्च ईश्वर (परमात्मा) मानते हैं।[1]
नवंबर 2014 में पुलिस के साथ एक हिंसक गतिरोध के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था और 2018 में हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। अप्रैल 2026 में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय से उन्हें कुछ मामलों में जमानत और सजा से राहत मिली है।[2]
प्रारंभिक जीवन
[संपादित करें]रामपाल का जन्म 8 सितंबर 1951 को हरियाणा के सोनीपत जिले के धनाना गाँव में हुआ था। शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात वे हरियाणा सरकार के सिंचाई विभाग में कनिष्ठ अभियंता (Junior Engineer) के पद पर कार्यरत हुए।[3]
वे बचपन से ही हिंदू देवी-देवताओं के उपासक थे। 1988 में उनकी मुलाकात एक गरीबदासीय कबीर पंथी गुरु, स्वामी रामदेवानंद से हुई। रामदेवानंद ने उन्हें समझाया कि पारंपरिक हिंदू धार्मिक अभ्यास श्रीमद्भगवद्गीता और अन्य धर्मग्रंथों के अनुकूल नहीं हैं। इसके बाद 17 फरवरी 1988 को रामपाल ने स्वामी रामदेवानंद से दीक्षा ली। 1994 में रामदेवानंद ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया।[4]
1995 में रामपाल ने अपने अभियंता पद से इस्तीफा दे दिया (जो 2000 में स्वीकृत हुआ) और करौथा (रोहतक) में 'सतलोक आश्रम' की स्थापना की।
शिक्षा और नियम
[संपादित करें]रामपाल अपने अनुयायियों को कबीर को सर्वोच्च परमात्मा मानकर उनकी पूजा करने का उपदेश देते हैं। उन्होंने अपने अनुयायियों के लिए कुछ सख्त नियम (भक्ति मर्यादा) निर्धारित किए हैं, जिनमें मुख्य हैं:[5]
- किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थ (बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू, शराब, गांजा) का सेवन न करना।
- मांस और अंडे का सेवन वर्जित है।
- जुआ खेलना, चोरी और ठगी न करना।
- मृत्युभोज, दहेज प्रथा, दिखावा, मुंडन, और मूर्तिपूजा का निषेध।
- केवल एक कबीर परमात्मा की पूजा करना, हालांकि अन्य सभी देवताओं का सम्मान करना।
रामपाल ने अपने धार्मिक विचारों को फैलाने के लिए कई पुस्तकें भी लिखी हैं, जिनमें ज्ञान गंगा, जीने की राह, और गीता तेरा ज्ञान अमृत प्रमुख हैं।
विवाद और कानूनी मामले
[संपादित करें]करौथा आश्रम विवाद (2006) सन् 2006 में रामपाल ने आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा रचित पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश के कुछ भागों पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी की थी। इसके विरोध में 12 जुलाई 2006 को आर्य समाज के समर्थकों ने करौथा के सतलोक आश्रम का घेराव किया।[6] दोनों पक्षों के बीच हुई हिंसक झड़प में एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई। इस मामले में रामपाल पर हत्या का मामला दर्ज हुआ और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 2008 में उन्हें जमानत मिल गई। 20 दिसंबर 2022 को रोहतक की अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में रामपाल सहित 23 आरोपियों को इस मामले से बरी कर दिया।[7]
बरवाला आश्रम गतिरोध (2014) नवंबर 2014 में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने अवमानना के एक मामले में रामपाल को गिरफ्तार करने का आदेश दिया। जब पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने बरवाला स्थित सतलोक आश्रम पहुँची, तो उनके हजारों समर्थकों ने आश्रम को घेर लिया और पुलिस के साथ हिंसक गतिरोध हुआ। इस घटना में पांच महिलाओं और एक बच्चे की मृत्यु हो गई। 19 नवंबर 2014 को रामपाल को गिरफ्तार कर लिया गया।[8]
न्यायालयीन फैसले
- अगस्त 2017: हिसार न्यायालय ने रामपाल को बंधक बनाने के दो आपराधिक मामलों (एफआईआर 426 और 427) में बरी कर दिया।[9]
- अक्टूबर 2018: हिसार कोर्ट ने रामपाल और उनके अनुयायियों को बरवाला आश्रम हिंसा मामले (एफआईआर 429 और 430) में हत्या का दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई।[10]
- जुलाई 2021: ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत दर्ज एक मामले में अदालत ने उन्हें सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।[11]
- अगस्त 2025: पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि रामपाल लगभग 10 वर्ष जेल में बिता चुके हैं और साक्ष्यों में संदेह है, उनकी उम्रकैद की सजा को निलंबित कर दिया।[12]
- अप्रैल 2026: देशद्रोह के मामले में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत दे दी, जिससे उनकी जेल से रिहाई का मार्ग प्रशस्त हुआ।
सामाजिक कार्य
[संपादित करें]रामपाल और उनके अनुयायियों द्वारा 'अन्नपूर्णा मुहिम' नामक एक राहत अभियान चलाया जाता है, जिसके तहत जरूरतमंद परिवारों को मुफ्त राशन और दैनिक उपयोग की वस्तुएं वितरित की जाती हैं। इसके अतिरिक्त, हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों में आई बाढ़ के दौरान उनके संगठन ने बाढ़ राहत कार्यों में हिस्सा लिया, जिसमें जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी निकालने के लिए पंप और पाइपलाइन उपलब्ध कराना शामिल था। इन राहत और सेवा कार्यों के लिए उन्हें कई स्थानीय ग्राम पंचायतों, खाप और किसान संगठनों द्वारा सम्मानित किया गया है।
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "Rampal: How did an engineer become a revered guru?". BBC News (ब्रिटिश अंग्रेज़ी भाषा में). 2014-11-19. अभिगमन तिथि: 2026-04-09.
- ↑ "Controversial self-styled godman Rampal gets bail in sedition case; to be released after over a decade". The Indian Express (अंग्रेज़ी भाषा में). 2026-04-08. अभिगमन तिथि: 2026-04-09.
- ↑ "From Junior Engineer To Godman: The Rise, Arrest And Fall Of Rampal". www.ndtv.com (अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2026-04-09.
- ↑ "कभी जूनियर इंजीनियर था रामपाल, खुद को बताता था संत कबीर का अवतार". News18 हिंदी. अभिगमन तिथि: 2026-04-09.
- ↑ "गुरु दीक्षा के नाम पर रामपाल के थे 11 अजीबो गरीब नियम - Rampal's rules for his 'blessings'". Jagran. अभिगमन तिथि: 2026-04-09.
- ↑ "Rohtak clash: Sant Rampal triggered it". The Times of India. 2013-05-13. आईएसएसएन 0971-8257. अभिगमन तिथि: 2026-04-09.
- ↑ "सतलोक आश्रम हिंसा केस: संत रामपाल सहित 23 आरोपी हुए बरी, भाई महेंद्र दास पर चलेगा मामला". AajTak. 2022-12-20. अभिगमन तिथि: 2026-04-09.
- ↑ "Indian Guru Rampal arrested after deadly ashram clashes". BBC News (ब्रिटिश अंग्रेज़ी भाषा में). 2014-11-19. अभिगमन तिथि: 2026-04-09.
- ↑ "Self-styled Godman Rampal Acquitted in Two Criminal Cases | India.com". www.india.com (अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2026-04-09.
- ↑ Kumar, Ashok (2018-10-16). "Sant Rampal, 14 others sentenced to life for murder of four women". The Hindu (Indian English भाषा में). आईएसएसएन 0971-751X. अभिगमन तिथि: 2026-04-09.
- ↑ "हरियाणाः हिसार कोर्ट ने इस मामले में रामपाल समेत 5 को बरी किया, 7 साल पहले हुए थे गिरफ्तार". AajTak. 2021-07-27. अभिगमन तिथि: 2026-04-09.
- ↑ "HC suspends death penalty of Rampal in 2014 violence case". Hindustan Times (अंग्रेज़ी भाषा में). 2025-09-05. अभिगमन तिथि: 2026-04-09.