रामपाल (हरियाणा)

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संत रामपाल
जन्म रामपाल सिंह जतिन
8 सितम्बर 1951 (1951-09-08) (आयु 68)
धनाना , पंजाब (अभी हरियाणा), भारत में
राष्ट्रीयता भारतीय
अन्य नाम बाबा रामपाल ,रामपाल दास
व्यवसाय कबीर पंथ समुदाय के संस्थापक
वेबसाइट
jagatgururampalji.org

रामपाल (अंग्रेजी :Rampal) एक भारतीय आध्यात्मिक कबीर पंथी गुरु हैंं जो स्वयं को कबीर का अवतार बताते हैं तथा कबीर को भगवान बताते हैं।[1] ये वर्तमान में हिसार केंद्रीय कारावास में आजीवन कारावास की सजा के लिए बंद है।[1] ये सतलोक आश्रम के स्थापक भी है जो कि भारतीय राज्य हरियाणा के हिसार क्षेत्र में स्थित है।[1]

विवाद[संपादित करें]

सन् २००६ में रामपाल ने सार्वजनिक तौर पर सत्यार्थ प्रकाश के कुछ भागों पर आपत्ति जताई थी।[2] इससे गुस्साए आर्य समाज के हजारो समर्थको ने १२ जुलाई२००६ को करौथा के सतलोक आश्रम को घेर लिया व हमला किया।[3] बचाव में सतलोक आश्रम के अनुयायियों ने भी पलटवार किया। इस झड़प में सोनू नामक एक आर्य समाजी अनुयायी की हत्या हो गई।[3] जिसमें संतरामपाल के विरुद्ध हत्या का केस चलाया गया व उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।[3] कुछ महीने जेल में बिताने के बाद, २००८ में इन्हें ज़मानत पर रिहा कर दिया गया। नवंबर २०१४ में पुनः कोर्ट ने इन्हें गिरफ्तार करने का आदेश दिया। लेकिन सतलोक आश्रम बरवाला में हज़ारों समर्थकों की मौजुदगी के कारण पुलिस इन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकी।[4] १९ नवंबर २०१४ को समर्थकों व पुलिस के बीच हुई हिंसा के बाद इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।[4] इसमें ५ महिलाओं और १ बालक की मृत्यु हुई जिनका मुकदमा संतरामपालदास पर बनाया गया। ये बंधक बनाने के मुकदमे में २९ अगस्त २०१७ को बरी हो गए। लेकिन हत्या व देशद्रोह के मुकदमे के कारण जेल में ही हैं।[4] ११अक्टूबर २०१८ को हिसार कोर्ट द्वारा इन्हें तथा इनके कुछ अनुयायियों को बरवाला की घटना में हुई हत्याओं का दोषी करार कर दिया गया एवं आजीवन कारावास की सजा सुनाई।[5]

जीवन[संपादित करें]

रामपाल का जन्म सोनीपत के धनाणा गांव में १९५१ में हुआ था। इन्होंने अपनी शिक्षा पूर्ण करने के तत्पश्चात हरियाणा सरकार के सिंचाई विभाग में अभियंता बन गए थे। इनकी आधिकारिक जीवनी के अनुसार, ये सभी हिंदू देवी देवताओं के कठोर भक्त थे।[6] लेकिन इस भक्ति से इन्हें कभी आत्मिक शांति का अनुभव नहीं हुआ। एक दिन ये स्वामी रामदेवानंद जी, एक कबीर पंथी गुरू, से मिले। जिन्होंने इन्हें समझाया कि वे इस भक्ति से मोक्ष प्राप्त नहीं कर सकते क्योंकि ये माया द्वारा फैलाया जाल है।[6]

संत रामपाल दास का कहना है कि इसके पश्चात इन्होंने भगवत गीता, कबीर सागर, गरीबदास जी द्वारा रचित सत ग्रंथ, पुराण तथा अन्य कई ग्रंथ पढ़े। इनका मानना है कि इन्हें इन पुस्तकों में स्वामी रामदेवानंद जी द्वारा बताए वचनों के प्रमाण मिले, तत्पश्चात इन्होंने घोर जाप किया जिसके बाद इन्हें आत्मिक शांति महसूस होने लगी।[6]

१९९४ में स्वामी रामदेवानंद जी ने इन्हें गुरू पद दे दिया। उसके बाद ये संत रामपाल दास बन गए।[6]

सन् १९९५ में रामपाल ने अपने अभियंता पद से इस्तीफा दे दिया जोकि २००० में स्वीकृत हुआ।[6] और बाद में करोंथा गांव में सतलोक आश्रम की स्थापना की थी , हालांकि २००६ में इनके गिरफ्तार होने के बाद सेे ये आश्रम सरकार के क़ब्ज़े में है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Who is Sant Rampal?".
  2. "Rohtak clash: Sant Rampal triggered it".
  3. "Krontha incident".
  4. "Sant Rampal acquitted in two criminal cases".
  5. "Sant Rampal, 14 others sentenced to life for murder of four women".
  6. "A Brief Introduction of Saint Rampal Ji Sahib's Life History".