रामनारायण उपाध्याय

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रामनारायण उपाध्याय हिन्दी के प्रसिद्ध लेखक हैं। उनका जन्म २ मई १९१८ को कालमुखी, मध्य प्रदेश के खंडवा में हुआ और शिक्षा गाँव में हुई। आपने गाँधी-जीवन से लेखन की प्रेरणा लेकर लेखन आरम्भ किया।

भाषा शैली- सहज, सरल प्रभावशाली गद्य। इनके व्यंग्यों के बारे में अज्ञेय जी ने लिखा है- मधुर व्यंग्य जो जाड़ों के घाम जैसा स्निग्ध, अपने मन से भर जाए और सधा हुआ सूक्ष्म स्पर्श जो भाव को जगाए पर चैंकने न दे।

प्रकाशित कृतियाँ-व्यंग्य, ललित निबन्ध, रूपक, रिपोर्ताज, लघु कथाएँ, संस्मरण आदि विधाओं में ३० से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। हम तो बाबुल तेरे बाग की चिड़िया (लोक साहित्य) निमाड़ का सांस्कृतिक अध्ययन (लोक साहित्य) बक्शीशनामा, धुँधले काँच की दीवार, नाक का सवाल, मुस्कराती फाइलें, गँवईं मन और गाँव की याद, दूसरा सूरज आदि व्यंग्य संकलन हैं। जनम-जनम के फेरे (ललित निबन्ध) मृग के छौने (गद्य रूपक) जिनकी छाया भी सुखकर है तथा जिन्हें भूल न सका (संस्मरण) कथाओं की अंतर्कथा, चिट्ठी, मामूली आदमी आदि प्रसिद्ध पुस्तकें हैं।