रामदेव पशु मेला नागौर
| रामदेव पशु मेला नागौर | |
|---|---|
| आधिकारिक नाम | रामदेव पशु मेला नागौर |
| अनुयायी | हिन्दू |
| प्रकार | धार्मिक |
| शुरुआत | माघ शुक्ल १ |

पूरे राजस्थान राज्य में नागौर ज़िले में पशुपालन विभाग सबसे ज्यादा पशु मेले आयोजित करवाता है। इस मेले के बारे में प्रारंभ में प्रचलित मान्यता है कि मानसर गांव के समुद्र भू-भाग पर रामदेव जी की मूर्ति स्वतः ही अद्भुत हुई। श्रद्धालुओं ने यहां एक छोटा सा मंदिर बनवा दिया है और यहां मेले में आने वाला पशुपालक इस मंदिर में जाकर अपने पशुओं के स्वास्थ्य की मनौती मांग ही खरीद [1] फरोख्त किया करते हैं। आजादी के बाद से मेले की लोकप्रियता को देखकर राज्य के पशु पालन विभाग [2]ने इसे राज्यस्तरीय पशु मेलों में शामिल किया तथा फरवरी १९५८ से पशुपालन विभाग इस मेले का संचालन कर रहा है। यह पशु मेला प्रतिवर्ष नागौर शहर से ५ किलोमीटर दूर मानसर गांव में माघ शुक्ल १ से माघ शुक्ल १५ तक लगता है। मारवाड़ के लोकप्रिय नरेश स्वर्गीय श्री उम्मेद सिंह जी को इस मेले का प्रणेता माना जाता है। इस मेले में नागौरी नस्ल के बैलों की बड़ी मात्रा में बिक्री होती है। [3]
इन्हें भी देखें
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[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ दैनिक भास्कर. "रामदेव पशु मेला आज से, 600 पशु पहुंचे". अभिगमन तिथि: 26 सितम्बर 2017.
- ↑ पत्रिका. "आखिर देश के हर कौने से नागौर क्यों पहुंचे ?". राजस्थान पत्रिका. 26 सितंबर 2017 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 26 सितम्बर 2017.
- ↑ पत्रिका. "पशु मेले में साल दर साल घट रहे नागौरी बैल". राजस्थान पत्रिका. 26 सितंबर 2017 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 26 सितम्बर 2017.